क्या आपने कभी किसी ऐसे सैनिक के बारे में सुना है जो शहादत के दशकों बाद भी देश की सीमा पर मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रहा हो? सुनने में यह बात अकल्पनीय लग सकती है, लेकिन सिक्किम के नाथू ला पास पर तैनात भारतीय सेना के जवान इसे एक अटूट सच्चाई मानते हैं। हम बात कर रहे हैं भारतीय सेना के अमर वीर 'बाबा हरभजन सिंह' की, जिनकी आस्था और देशभक्ति की मिसाल आज भी सरहद पर जीवंत है।
पंजाब की मिट्टी से नाथू ला की बर्फीली चोटियों तक
बाबा हरभजन सिंह जी का जन्म 30 अगस्त 1946 को पंजाब के कपूरथला जिले के सदराना गाँव में हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा रखने वाले हरभजन सिंह वर्ष 1966 में भारतीय सेना की प्रसिद्ध पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए। इसके बाद उनकी तैनाती पूर्वी सिक्किम के दुर्गम और बर्फीले इलाके नाथू ला में हुई।
1968 की वो दर्दनाक घटना
वर्ष 1968 में सिक्किम की विषम परिस्थितियों में ड्यूटी के दौरान एक दुखद दुर्घटना घटी। बाबा हरभजन सिंह खच्चरों के साथ रसद सामग्री ले जा रहे थे, तभी तेज बहाव वाले नाले में फिसल जाने से वे बह गए। भीषण ठंड और बर्फबारी के बीच तीन दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद उनका पार्थिव शरीर मिला।
कहा जाता है कि शहादत के बाद बाबा हरभजन सिंह ने स्वयं अपने एक साथी सैनिक के सपने में आकर अपने पार्थिव शरीर का पता बताया था, जिसके बाद सेना ने उन्हें तलाशा और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
आज भी सीमा पर मौजूद है बाबा का पहरा
सैनिकों के बीच यह दृढ़ मान्यता है कि बाबा हरभजन सिंह की आत्मा आज भी भारत-चीन सीमा पर मुस्तैद रहती है। अगर सीमा पार से कोई चीनी गतिविधि होती है या कोई खतरा मंडराता है, तो जवानों को पहले ही सचेत कर दिया जाता है। यह भारतीय सैनिकों की अगाध श्रद्धा ही है कि चीन के साथ होने वाली फ्लैग बैठकों (Flag Meetings) में भी बाबा के सम्मान में एक कुर्सी खाली रखी जाती है।

बाबा हरभजन सिंह से जुड़ी मुख्य बातें:
- बाबा हरभजन सिंह मंदिर: सिक्किम में नाथू ला के पास उनके सम्मान में एक भव्य मंदिर बनाया गया है, जहाँ हर साल हजारों श्रद्धालु और सैनिक दर्शन करने आते हैं।
- अनुशासन और कर्तव्य: जवानों का मानना है कि बाबा आज भी यूनिट की सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखते हैं।
- अमर देशभक्ति: उनका जीवन भारतीय सेना के अदम्य साहस, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।
बाबा हरभजन सिंह की यह गाथा केवल एक लोकमान्यता नहीं, बल्कि भारतीय सेना के जवानों के उस अटूट विश्वास का प्रमाण है जो देश की रक्षा के लिए हर परिस्थिति से ऊपर उठकर खड़े रहते हैं। भारत माता के इस अमर सपूत को कोटि-कोटि नमन। जय हिंद! वंदे मातरम्!