अक्टूबर 2026 के इस दौर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, जिससे उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हाहाकार मच गया है। आसमान में अचानक उमड़े काले बादलों ने जब तांडव दिखाना शुरू किया, तो ग्रामीण इलाकों के किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गईं। देखते ही देखते मूसलाधार बारिश के साथ आसमान से बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। इस अचानक हुई प्राकृतिक आपदा ने खेतों में लहलहाती फसलों को मिनटों में तबाह कर दिया, जिससे अन्नदाताओं का कलेजा मुंह को आ गया।
अचानक बदले मौसम ने बढ़ाई धड़कनें
मंगलवार दोपहर बाद बरेली के कई इलाकों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। इसके साथ ही हुई ओलावृष्टि ने खेतों की तस्वीर बदलकर रख दी। जिन किसानों के चेहरे कुछ दिन पहले तक अपनी फसल की बंपर पैदावार देखकर खिलखिला रहे थे, वे अब अपने खेतों में बर्बाद पड़ी फसलों को देखकर सन्न रह गए। कई इलाकों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहां ओलों की सफेद चादर खेतों पर बिछ गई थी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि का सीधा असर रबी की शुरुआती फसलों और खेतों में खड़ी अन्य पकी हुई फसलों पर पड़ा है। धान, गन्ना और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। फसल कटाई के मुहाने पर खड़े किसानों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
कलेजा थामकर बैठ गए अन्नदाता
बरेली के ग्रामीण अंचलों में इस वक्त मातम जैसा माहौल है। अपनी सालभर की मेहनत को आंखों के सामने ओलों की मार से नष्ट होते देखना किसी भी किसान के लिए असहनीय है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी लगाकर खेती की थी। उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होगी तो घर के हालात सुधरेंगे, लेकिन प्रकृति की इस मार ने सब कुछ तबाह कर दिया।
- फसलों को भारी नुकसान: धान और अन्य मौसमी फसलें जमीन पर बिछ गईं।
- सब्जी उत्पादक बेहाल: टमाटर, गोभी और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह गल चुकी हैं।
- आर्थिक संकट: कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान अब कर्ज चुकाने की चिंता में डूब गए हैं।
प्रशासनिक सर्वे की मांग तेज
स्थानीय किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से नुकसान का आंकलन (सर्वे) कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने सुध नहीं ली और उचित मुआवजा नहीं दिया, तो उनके सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। प्रशासन के अधिकारियों तक किसानों की यह पीड़ा पहुंचाई जा रही है ताकि जल्द से जल्द राहत कार्यों को गति दी जा सके।मौसम विभाग की चेतावनी
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, ऊपरी वायुमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण इस तरह के अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों तक आसमान में आंशिक बादल छाए रहने और हल्की फुहारें पड़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि, बड़े पैमाने पर ओलावृष्टि का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है, लेकिन किसानों की धड़कनें अभी भी थमी नहीं हैं।
बरेली में हुई इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसान किस हद तक मौसम के रहमो-करम पर निर्भर होते हैं। जब भी प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, सबसे पहले मार इसी वर्ग पर पड़ती है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस संकट की घड़ी में अन्नदाताओं के आंसू पोछने के लिए कितनी जल्दी और क्या ठोस कदम उठाता है।