नारायणी विहार कॉलोनी में बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल
उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र कहे जाने वाले वाराणसी शहर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दावों और विकास के तमाम कागजी पुलंदों की पोल खोलने के लिए काफी है। शहर के चितईपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली नारायणी विहार कॉलोनी इन दिनों किसी तालाब में तब्दील हो चुकी है। लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद यहां के बाशिंदों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लोगों के घरों के भीतर तक बारिश और गंदे नाले का पानी घुस गया है, जिससे घरेलू सामान से लेकर जरूरी दस्तावेज तक भीग चुके हैं।
स्थानीय स्तर पर जल निकासी का कोई भी ठोस इंतजाम न होने के कारण यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। बारिश थमे हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन सड़कों और गलियों से पानी की एक बूंद भी कम नहीं हुई है। नतीजतन, लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है।
बीमारियों के मंडराते साये ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय निवासियों की परेशानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। पिछले कई दिनों से एक ही जगह पर खड़े इस दूषित और सड़े हुए पानी से अब तीव्र दुर्गंध उठने लगी है। इस स्थिति ने आसपास के पर्यावरण को पूरी तरह से दूषित कर दिया है। सबसे बड़ा खतरा मच्छरों के बेकाबू होते प्रकोप को लेकर है। जलभराव के इस लंबे सिलसिले के कारण मच्छरों ने तेजी से पनपना शुरू कर दिया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा वेक्टर जनित बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
कॉलोनी में रहने वाले बुजुर्गों और छोटे बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। इस माहौल में सांस लेना और सामान्य जीवन जीना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, जनप्रतिनिधियों पर लगाए गंभीर आरोप
इस संकट की घड़ी में जनता का गुस्सा स्थानीय प्रशासन और चुने हुए नुमाइंदों के प्रति खुलकर सामने आ रहा है। कॉलोनी की निवासी प्रभादेवी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी पटरी से पूरी तरह उतर चुकी है। प्रभादेवी के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
लोगों का आरोप है कि उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद श्याम भूषण शर्मा से भी कई मर्तबा गुहार लगाई कि वे इस जलभराव की समस्या का कोई स्थायी समाधान निकालें। आरोप है कि पार्षद की तरफ से इस संवेदनशील मसले पर पूरी तरह से उदासीनता बरती गई और शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। जनता का यह सवाल अब हर जुबान पर है कि जब मुश्किल वक्त में उनका चुना हुआ प्रतिनिधि ही उनसे मुंह मोड़ लेगा, तो वे अपनी फरियाद लेकर आखिरकार किसके पास जाएंगे।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरी घटना ने एक बार फिर से नगर निगम के शहरी प्रबंधन और मानसून पूर्व की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। हर साल बरसात का मौसम आने से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और नालों की सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का ढिंढोरा पीटा जाता है। बावजूद इसके, थोड़ी सी बारिश होते ही शहर के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं।
नारायणी विहार के लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि हर साल बारिश के दिनों में उन्हें इसी नरकीय जीवन को जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि प्रशासन कभी भी स्थायी समाधान की दिशा में काम नहीं करता, बल्कि जब आपदा सिर पर आ जाती है, तब महज खानापूर्ति की जाती है।
आंदोलन की चेतावनी और प्रशासन से त्वरित एक्शन की मांग
सब्र का बांध टूटने के बाद अब नारायणी विहार कॉलोनी के रहवासियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द यहां से पानी की निकासी नहीं कराई गई और फॉगिंग के साथ-साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
गुस्साए लोगों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम की होगी। अब देखना यह है कि इस गंभीर चेतावनी के बाद कुंभकर्ण की नींद सो रहा प्रशासन कब हरकत में आता है और इन परेशान नागरिकों को कब इस जलजले से राहत मिलती है।