पश्चिम बंगाल की राजनीति के गलियारों से एक बड़ी और बेहद दिलचस्प कानूनी खबर सामने आ रही है। भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणामों को लेकर मचे घमासान के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने मौजूदा मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को एक बड़ी राहत देते हुए जवाब दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में धांधली और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों पर अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को आगामी एक अक्टूबर, गुरुवार तक अपना लिखित जवाब कोर्ट के समक्ष पेश करना होगा।
अदालत का नया निर्देश और कानूनी प्रक्रिया
न्यायमूर्ति गौरांग कांत की अदालत में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई मंगलवार को हुई। पिछली कार्यवाहियों के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से उनके वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप कर ने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय की मांग अदालत के सामने रखी थी। अदालत ने इससे पहले अगस्त के महीने में तीन सप्ताह का समय प्रदान किया था। हालांकि, मंगलवार को एक बार फिर समय की मांग दोहराए जाने पर अदालत ने नरमी बरतते हुए गुरुवार, यानी एक अक्टूबर तक की अंतिम मोहलत दे दी है।
मंगलवार को हुई इस सुनवाई में याचिकाकर्ता यानी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से उनके वकील कल्याण बनर्जी के पुत्र शीर्षण्य बंद्योपाध्याय कोर्ट रूम में मौजूद रहे और उन्होंने मामले से जुड़े पक्षों को अदालत के सामने रखा। इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में वह कड़ा मुकाबला है, जिसमें भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस हार के बाद से ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
धांधली के गंभीर आरोप और याचिका का आधार
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर की गई चुनाव याचिका में मतगणना और पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ममता बनर्जी के मुख्य कानूनी प्रतिनिधि और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी द्वारा कोर्ट में रखे गए दावों के अनुसार, चुनाव परिणाम के दिन यानी मतगणना के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली को अंजाम दिया गया था।
- मतगणना केंद्र के भीतर काउंटिंग एजेंटों को जबरन बाहर कर दिया गया था।
- याचिका में दावा किया गया है कि खुद ममता बनर्जी को भी मतगणना केंद्र में प्रवेश करने से रोका गया था।
- प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग के कामकाज पर भी कई गंभीर बिंदु उठाए गए हैं।
इन तमाम गंभीर आरोपों के चलते राज्य की सियासत में उबाल आ गया है और हर किसी की नजरें हाई कोर्ट के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।
ईवीएम और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश
इस कानूनी लड़ाई के तकनीकी और साक्ष्यात्मक पहलुओं को सुरक्षित रखने के लिए अदालत पहले ही बेहद सख्त कदम उठा चुकी है। अपनी पिछली सुनवाइयों में कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव से जुड़े बेहद अहम डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ से बचाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए थे। अदालत के आदेशानुसार:
चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम (EVM) मशीनों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाए। इसके अलावा, मतगणना केंद्रों और उसके आसपास के परिसरों के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) तथा अन्य तमाम मूल दस्तावेजों को भी सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का निर्देश दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर अदालत उनका स्वतंत्र निरीक्षण कर सके।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और आगे की राह
भवानीपुर सीट का यह चुनावी मुकाबला भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मुकाबलों में शुमार रहा है। ऐसे में जब अदालत के आदेश पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपना लिखित जवाब 1 अक्टूबर को दाखिल करेंगे, तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और बचाव पक्ष इन तमाम आरोपों का क्या कानूनी जवाब देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर राज्य की शीर्ष राजनीतिक हस्तियां आमने-सामने हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें एक अक्टूबर पर टिकी हैं, जब शुभेंदु अधिकारी की तरफ से जवाब दाखिल किया जाएगा और अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।