बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर अब विकराल रूप धारण कर चुका है। बाढ़ की इस भयंकर विभीषिका के बीच प्रभावित इलाकों के लोगों की मुश्किलें हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ती जा रही हैं। प्रशासनिक सुस्ती और राहत कार्यों की धीमी रफ्तार से नाराज होकर 'बिहार जनसंघर्ष समिति' ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने भागलपुर के जिलाधिकारी को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा, जिसमें कागजी प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए तुरंत युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य शुरू करने की पुरजोर मांग की गई है।
जमीनी हकीकत: कागजी दावों और धरातल के बीच गहरी खाई
प्रशासनिक स्तर पर भले ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हरसंभव मदद पहुंचाने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल की तस्वीर बेहद डरावनी और चिंताजनक है। बीते शुक्रवार को बिहार जनसंघर्ष समिति की एक विशेष जमीनी निरीक्षण टीम ने भागलपुर के कई संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। इस टीम ने विश्वविद्यालय बाल निकेतन स्कूल, टिल्लाह कोठी, साहेबगंज, लालूचक, श्रीरामपुर, बैरिया, गोसाईदासपुर, मथुरापुर, रशदपुर और शंकरपुर जैसे दर्जनों बाढ़ प्रभावित गांवों और मोहल्लों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जो भयावह दृश्य सामने आया, उसने सरकारी दावों की पोल खोल दी। गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने के बाद जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोग पानी के बीच रहने को मजबूर हैं और प्रशासन की ओर से मिलने वाली मदद अभी तक कई इलाकों में ऊंट मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है।
इन गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं बाढ़ पीड़ित
समिति के पदाधिकारियों द्वारा तैयार किए गए रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, प्रभावित बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अकाल पड़ चुका है। लोग निम्नलिखित गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं:
- पेयजल और स्वच्छता संकट: बाढ़ के गंदे पानी के मिलने से पीने के साफ पानी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे जल जनित बीमारियों का खतरा चरम पर है।
- आवागमन और बिजली ठप: कई इलाके चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं, जिससे संपर्क पूरी तरह कट गया है। सुरक्षा कारणों और तकनीकी खराबी के चलते कई बस्तियों की बिजली काट दी गई है।
- खाद्य सामग्री का अभाव: लोगों के पास खाने-पीने के सामान खत्म हो चुके हैं और सरकारी राहत पैकेट समय पर नहीं पहुंच रहे हैं।
- स्वास्थ्य सेवाएं नदारद: गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति बन गई है।
'बाढ़ समाप्त होने का इंतजार न करे प्रशासन'
बिहार जनसंघर्ष समिति के प्रमुख नेताओं ने जिलाधिकारी के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकारी तंत्र को अपनी संवेदनशीलता दिखानी होगी। नेताओं का तर्क है कि अक्सर प्रशासन बाढ़ का पानी उतरने और रिपोर्ट तैयार होने का इंतजार करता है, लेकिन इस लंबी कागजी प्रक्रिया में आम जनता भुखमरी और लाचारी के दलदल में धंस जाती है।
"संकट की इस घड़ी में सरकारी सहायता का उद्देश्य महज औपचारिकता या कागजी प्रक्रिया पूरी करना नहीं होना चाहिए, बल्कि समय पर पीड़ित तक मदद पहुंचाना ही सबसे बड़ा मानवीय धर्म है। राहत राशि के लिए बाढ़ के थमने का इंतजार करना बिल्कुल अस्वीकार्य है।"
मांग पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में समिति के संयोजक गौतम कुमार, सह संयोजक निर्मल कुमार, कोषाध्यक्ष सुभाष कुमार प्रसाद, संरक्षक डॉ. जयंत जलद, उज्ज्वल घोष और दीपक कुमार मंडल जैसे प्रमुख चेहरे शामिल रहे, जिन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है।
समिति की प्रमुख और तात्कालिक मांगें
जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की गई है:
- तत्काल आर्थिक सहायता: सभी प्रभावित परिवारों को बिना किसी जटिल कागजी शर्त के फौरी राहत राशि और सूखा राशन तुरंत मुहैया कराया जाए।
- बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था: बाढ़ और जलजमाव के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद पड़े विद्यालयों के बच्चों की शिक्षा का नुकसान रोकने के लिए सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी या वैकल्पिक पाठशालाएं शुरू की जाएं।
- नावों की पर्याप्त उपलब्धता और पुलिस गश्त: सुदूर दियारा क्षेत्रों और पूरी तरह जलमग्न हो चुके गांवों में फंसे लोगों को निकालने के लिए पर्याप्त सरकारी नावों का इंतजाम हो। साथ ही, असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए पुलिस बल नियमित गश्त करे।
- बेजुबान पशुओं के लिए राहत: इंसानों के साथ-साथ बाढ़ में घिरे मवेशियों के लिए चारे, भूसे, साफ पीने के पानी, सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर आश्रय और नियमित पशु चिकित्सा शिविरों का संचालन किया जाए।
- विशेष स्वास्थ्य शिविर: संवेदनशील समूहों जैसे गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए मेडिकल कैंप लगाकर त्वरित उपचार और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित हो।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
बिहार जनसंघर्ष समिति ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पारदर्शी तथा त्वरित तरीके से राहत सामग्री प्रभावितों तक नहीं पहुंचाई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। बाढ़ पीड़ितों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है, और यदि आने वाले दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो जनता सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगी। फिलहाल, भागलपुर के प्रशासनिक हल्कों में इस मांग पत्र के बाद हलचल तेज हो गई है, और देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर कितनी जल्दी राहत पहुंचा पाता है।