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नालंदा में साइबर ठगों का बड़ा खुलासा: नशेड़ियों को फंसाकर बेचता था फर्जी सिम और बैंक खाते

नालंदा में साइबर ठगों का बड़ा खुलासा: नशेड़ियों को फंसाकर बेचता था फर्जी सिम और बैंक खाते

बिहार के नालंदा जिले से साइबर अपराध के नेटवर्क को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर शख्स को गिरफ्तार किया है जो सीधे तौर पर ऑनलाइन ठगी नहीं करता था, बल्कि ठगों को उनके हथियार यानी फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते मुमुहैया कराता था। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि साइबर ठगों का जाल कितना फैला हुआ है और वे मासूम या मजबूर लोगों को कैसे अपना मोहरा बनाते हैं।

शेखपुरा कनेक्शन और गिरफ्तारी की पूरी कहानी

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपित की पहचान शेखपुरा जिले के चेवाड़ा इलाके के रहने वाले विजय यादव के बेटे 20 वर्षीय नितीश कुमार उर्फ रोमियो के रूप में हुई है। वर्तमान में यह शातिर नालंदा जिले के सोहसराय थाना क्षेत्र के छोटी खासगंज इलाके में रह रहा था। तकनीकी सर्विलांस और मानवीय खुफिया तंत्र के जरिए नालंदा साइबर थाना पुलिस को इस बात की भनक लगी थी कि इलाके में कोई ऐसा शख्स सक्रिय है जो बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते और सिम कार्ड जुटा रहा है और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचा रहा है।

सूचना पुख्ता होने के बाद साइबर थाना डीएसपी सह थानाध्यक्ष ऋषभ आनंद के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने जाल बिछाकर नितीश कुमार उर्फ रोमियो को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से जो बरामदगी हुई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।

नशे की लत और पैसों का लालच: ऐसे बनता था शिकार

यह गिरोह कितनी शातिर चाल चलता था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे समाज के सबसे कमजोर वर्ग को निशाना बनाते थे। आरोपित नितीश ऐसे युवकों की तलाश में रहता था जो किसी न किसी प्रकार के नशे के आदी होते थे या जिन्हें तुरंत पैसों की सख्त जरूरत होती थी।

  • मजबूरी का फायदा: नशे के आदी युवाओं को कुछ ही रुपयों का लालच देकर यह गिरोह उन्हें अपने जाल में फंसा लेता था।
  • दस्तावेजों की चोरी व इस्तेमाल: पैसों की लालच में ये युवक अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी पहचान पत्र नितीश को सौंप देते थे।
  • फर्जी खातों का सृजन: इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे और फर्जी नाम-पते पर सिम कार्ड खरीदे जाते थे।
  • ठगों तक सप्लाई: ये सिम और बैंक अकाउंट्स फिर महंगे दामों पर बड़े साइबर अपराधियों को बेच दिए जाते थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड की रकम ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जाता था।

पुलिस की छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद

नालंदा साइबर थाना पुलिस द्वारा की गई इस छापेमारी में आरोपित के ठिकाने से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्रियां जब्त की गई हैं। पुलिस ने उसके पास से एक स्मार्टफोन, 12 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 5 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड के अलावा अवैध रूप से रखी गई 5.250 लीटर अंग्रेजी शराब और 38,900 रुपये नकद बरामद किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड और दूसरे लोगों के पहचान पत्र मिलने से यह साफ हो गया है कि वह इस धंधे में काफी समय से सक्रिय था और अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा है।

पुलिस अधिकारियों का बयान और आगे की कार्रवाई

इस पूरे मामले पर प्रकाश डालते हुए साइबर थाना के डीएसपी ऋषभ आनंद ने बताया कि आरोपित सीधे तौर पर भले ही लोगों को फोन पर ठगता नहीं था, लेकिन साइबर अपराध के चेन में लॉजिस्टिक्स यानी संसाधन उपलब्ध कराने वाले ऐसे लोगों की भूमिका सबसे अहम होती है। यदि ऐसे मददगारों को न पकड़ा जाए, तो साइबर ठग आसानी से पुलिस की पकड़ से दूर रहते हैं क्योंकि वे कभी अपने असली दस्तावेजों का इस्तेमाल नहीं करते।

फिलहाल, पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि नितीश ने अब तक कुल कितने लोगों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड खुलवाए हैं और वे कौन-कौन से शातिर साइबर अपराधी हैं जो इनसे ये सामान खरीदते थे। इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए भी छापेमारी तेज कर दी गई है।

छापेमारी टीम में शामिल पुलिसकर्मी

इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में साइबर थाना के डीएसपी सह थानाध्यक्ष ऋषभ आनंद के साथ-साथ पुलिस अवर निरीक्षक शैलेश कुमार झा, कुन्दन कुमार, सिपाही पुनेश कुमार, ऋतु राज, करण कुमार, चन्दन कुमार, संदीप कुमार और अन्य सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे। नालंदा पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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