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बिहार बाढ़ पर सियासत तेज, मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दिए तीखे जवाब

बिहार बाढ़ पर सियासत तेज, मंत्री विजय कुमार चौधरी ने दिए तीखे जवाब

बिहार में हर साल मानसून के दौरान आने वाली आपदा ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के कई जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। खासकर इस बार गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिसके कारण तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही मची है। आम जनता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इस सालाना आपदा से स्थायी तौर पर कब निजात मिलेगी? इन तमाम सवालों और विपक्षी दलों के तीखे हमलों के बीच राज्य सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बाढ़ राहत कार्यों, केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद और सिल्ट (गाद) प्रबंधन को लेकर खुलकर बात की है।

सिल्ट प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति की सुगबुगाहट, केंद्र बना रहा नया फ्रेमवर्क

बिहार की नदियों में हर साल जमा होने वाली गाद यानी सिल्ट हमेशा से बाढ़ का एक बड़ा कारण रही है। नदियां उथली हो चुकी हैं, जिससे थोड़ी सी बारिश या अधिक पानी छोड़े जाने पर वे तुरंत ओवरफ्लो हो जाती हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अब केंद्र सरकार के स्तर पर ठोस पहल शुरू हो गई है। मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जानकारी दी है कि केंद्र सरकार जल्द ही 'सिल्ट प्रबंधन' के लिए एक राष्ट्रीय नीति का फ्रेमवर्क तैयार कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नदियों से सिल्ट की निकासी नहीं की गई, तो बड़े से बड़े बांध या तटबंध भी बेअसर साबित होते हैं। बिहार सरकार लंबे समय से केंद्र के साथ इस मुद्दे पर समन्वय बैठा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बन जाने से देश की अन्य बाढ़ प्रभावित नदियों के साथ-साथ गंगा और उसकी सहायक नदियों में भी गाद प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकेगा, जिससे आने वाले वर्षों में बाढ़ की विभीषिका को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार: केंद्र से मिल रहा है पूरा सहयोग

बिहार में बाढ़ पीड़ितों की दुर्दशा को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों का मुख्य आरोप यह है कि राज्य को केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय मदद और राहत पैकेज नहीं मिल रहा है। इन तमाम राजनीतिक हमलों को सिरे से खारिज करते हुए जल संसाधन मंत्री ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी।

मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से बिहार को लगातार अपेक्षित सहयोग मिल रहा है। उन्होंने हाल ही में केंद्रीय बजट का हवाला देते हुए बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिहार के जल संसाधन विभाग के विकास और बाढ़ नियंत्रण के लिए 11,500 करोड़ रुपये का एक बड़ा अतिरिक्त पैकेज दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि आगामी वित्तीय वर्षों के बजट में भी राज्य के लिए विशेष सहायता का प्रावधान रखा गया है, जो यह साबित करता है कि केंद्र सरकार बिहार के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।

दिल्ली में उच्च स्तरीय मुलाकात, बजट में शामिल होंगी प्राथमिकताएं

राहत और बचाव कार्यों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए हाल ही में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से सिलसिलेवार मुलाकात की।

इन बैठकों के दौरान मुख्य रूप से बिहार की जल संसाधन प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी उन प्राथमिक योजनाओं पर चर्चा हुई, जिन्हें आगामी बजट में शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। मंत्री ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इन प्रस्तावों को सकारात्मक रूप से लेते हुए राज्य को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करेगी, ताकि भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

जरूरत पड़ने पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में होगी 'एयर ड्रॉपिंग'

जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की बात करें तो सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कई ऐसे इलाके हैं जो पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और वहां सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है। ऐसे संपर्क विहीन इलाकों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना इस वक्त प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

इस पर बात करते हुए जल संसाधन मंत्री ने दो टूक कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिला प्रशासन लगातार जमीनी हालात की समीक्षा कर रहा है। जिन इलाकों में नावों या अन्य माध्यमों से पहुंचना असंभव हो गया है, वहां आवश्यकता पड़ने पर हेलिकॉप्टर के जरिए खाद्य सामग्री और जरूरी सामान की 'एयर ड्रॉपिंग' सुनिश्चित की जाएगी। चिकित्सा टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि महामारी फैलने से रोका जा सके।

राजनीतिक बयानबाजी पर तंज, ज़मीनी राहत पर है सरकार का पूरा फोकस

बिहार को 'बाढ़ राज्य' घोषित किए जाने की विपक्षी नेताओं (विशेषकर तेजस्वी यादव) की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इसे राजनीतिक शिगूफा बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कागजी या प्रतीकात्मक प्रस्तावों का कोई व्यावहारिक लाभ बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिलने वाला है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय सरकार का ध्यान किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी में उलझने का नहीं है, बल्कि पूरी तरह से जमीनी स्तर पर काम करने पर केंद्रित है। प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को समय पर मुआवजा, सूखा राशन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है। आपदा की इस घड़ी में सियासत करने के बजाय सभी को मिलकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए।

निष्कर्ष

बिहार में बाढ़ का संकट कोई नया नहीं है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए सिल्ट प्रबंधन जैसी नीतियां और केंद्र-राज्य का बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन असल परीक्षा इस बात की है कि अंतिम छोर पर खड़े बाढ़ पीड़ित तक समय पर राहत और मदद कितनी तेजी से पहुंचती है। फिलहाल सरकार अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटी है और आने वाले दिनों में केंद्र की नई नीति से कुछ सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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नसीम अहमद

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Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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