महाराष्ट्र की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर है। इस बार मामला केवल सियासी बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा, मीडिया की आचार संहिता और चुनावी पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों पर खुलकर बहस छिड़ गई है। राज्य के प्रमुख राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब पैपराजी संस्कृति के एक नए और आपत्तिजनक पहलू पर नेताओं का गुस्सा फूटा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई जगताप ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र है, जहां महिलाओं के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पैपराजी फुटेज विवाद और नेताओं का छलका गुस्सा
हाल ही में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पैपराजी द्वारा सेलिब्रिटीज और राजनेताओं के परिवार के सदस्यों के वीडियो शूट करने के तौर-तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब समाजवादी पार्टी के नेता रईस शेख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा के एक वीडियो को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। रईस शेख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि एक पिता के रूप में इस तरह के गलत एंगल से लिए गए फुटेज को देखकर उनका खून खौल उठा है।
इस मामले पर समर्थन जताते हुए कांग्रेस नेता भाई जगताप ने मीडिया से खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि रईस शेख ने बिल्कुल सही और तथ्यात्मक बात कही है। भाई जगताप ने जोर देकर कहा, "यह छत्रपति शिवाजी महाराज और शाहू-फुले-आंबेडकर का महाराष्ट्र है। इस पवित्र भूमि ने हमेशा महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया है। सावित्रीबाई फुले ने इसी धरती से देश की बेटियों को शिक्षित करने की ऐतिहासिक पहल की थी। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति या कैमरा पर्सन किसी महिला या बेटी के खिलाफ अनुचित एंगल से वीडियो बनाता है या इस तरह की हरकत करता है, तो इसे महज एक लापरवाही या सामान्य घटना नहीं माना जा सकता है। इसके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
चुनावी प्रक्रिया और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्ष की हुंकार
महिला सुरक्षा और पैपराजी विवाद के अलावा भाई जगताप ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे सियासी हमले किए। उन्होंने देश की चुनावी व्यवस्था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवादित मुद्दों पर विपक्ष का पक्ष मजबूती से रखा। भाई जगताप ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार देश की चुनावी प्रणाली और निष्पक्षता से जुड़े गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि चाहे बिहार विधानसभा चुनावों का संदर्भ हो, या फिर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से जुड़े चुनावी घटनाक्रम, हर मंच पर वोट चोरी और ईवीएम से जुड़े संदेहों को उठाया गया है। मुंबई में भी विपक्षी दलों ने इस सिलसिले में जोरदार आवाज उठाई है और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जनता के सामने सच्चाई रखी है। भाई जगताप के अनुसार, आज देश की जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो चुकी है और इस मोर्चे पर पूरा विपक्ष पूरी तरह से एकजुट है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत तानाशाही रवैये के साथ काम कर रही है और लगातार संविधान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़क तक पुरजोर तरीके से उठाया है।
राम मंदिर और सीएम योगी आदित्यनाथ पर पलटवार
इस बातचीत के दौरान भाई जगताप ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राहुल गांधी पर दिए गए बयानों पर भी कड़ा पलटवार किया। मुख्यमंत्री योगी के बयानों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि बयानों की ही बात हो रही है, तो पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि राम मंदिर परिसर में हुई कथित चोरी और अनियमितताओं का जिम्मेदार कौन है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्हीं के कार्यकाल में चोरी जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
भाई जगताप ने दावा किया कि यह आरोप कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की तरफ से गढ़ा हुआ नहीं है, बल्कि खुद राज्य के संत-महात्माओं और स्थानीय लोगों ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर का निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल होने से पहले ही जल्दबाजी में उसका उद्घाटन कर दिया गया था, जिसके बाद से लगातार व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कानून और संविधान के दायरे में कार्रवाई की मांग
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भाई जगताप ने मांग की कि प्रशासनिक और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि कानून अपना काम करना चाहिए और यदि कोई भी व्यक्ति नियमों के विरुद्ध कार्य करता पाया जाता है, तो उस पर सख्त विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
अंत में उन्होंने दोहराया कि महाराष्ट्र की संस्कृति अतिथि सत्कार और महिला सुरक्षा की मिसाल रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पैपराजी संस्कृति और मीडिया एथिक्स को लेकर सरकार क्या नए दिशा-निर्देश तय करती है, क्योंकि जनता अब इन मुद्दों पर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।