महाराष्ट्र के भंडारा जिले में इस बार मौसम की बेरुखी ने अन्नदाताओं की नींद उड़ा दी है। बारिश के लंबे अंतराल और उसके बाद भी पर्याप्त पानी न मिलने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए भंडारा के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने सीधे खेतों में उतरकर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उनके इस दौरे से किसानों में एक उम्मीद जगी है कि प्रशासन अब उनकी सुध लेगा।
खेतों में पहुंचे पालकमंत्री, खुद परखा फसलों का नुकसान
अक्टूबर 2026 के इस दौर में जहां एक तरफ फसल कटाई की तैयारियां होनी चाहिए थीं, वहीं भंडारा के कई इलाकों में मायूसी छाई हुई है। पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने मोहाड़ी और तुमसर तहसील के विभिन्न गांवों का ताबड़तोड़ दौरा किया। उन्होंने मोहाड़ी तहसील के हिवरा, जाम, धोप और कांद्री तथा तुमसर तहसील के देव्हाड़ा, सुकली और पालोरा गांवों में जाकर सीधे किसानों के खेतों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने फसलों की मौजूदा स्थिति को बहुत करीब से देखा। बारिश न होने के कारण धान और अन्य फसलों की ग्रोथ पर जो बुरा असर पड़ा है, उसकी बारीकी से जानकारी ली। किसानों ने उन्हें बताया कि कैसे उनकी महीनों की मेहनत और लागत पानी के अभाव में बर्बाद हो रही है।
किसानों से सीधा संवाद और उनकी प्रमुख मांगें
दौरे के दौरान पालकमंत्री ने किसी वीआईपी सर्किट हाउस में बैठक करने के बजाय सीधे खेतों की मेड़ पर खड़े होकर किसानों से संवाद किया। किसानों ने अपनी व्यथा खुलकर उनके सामने रखी। किसानों का कहना था कि इस साल मौसम के दगा देने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
- मोहाड़ी और तुमसर को सूखाग्रस्त घोषित करना: किसानों ने पुरजोर मांग उठाई कि मोहाड़ी और तुमसर तहसीलों को तत्काल सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
- धान उत्पादक किसानों को बोनस: इलाके के किसानों ने सरकार से मांग की कि संकट की इस घड़ी में धान उत्पादक किसानों को विशेष बोनस दिया जाए ताकि वे कर्ज के जाल से बाहर निकल सकें।
- समय पर राहत राशि: प्राकृतिक आपदा के नियमों में ढील देकर जल्द से जल्द मुआवजा दिए जाने की बात भी किसानों ने प्रमुखता से रखी।
अधिकारियों को दिए सख्त और स्पष्ट निर्देश
किसानों की समस्याएं सुनने के बाद पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद कृषि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे बिना किसी हीला-हवाली के फसलों के नुकसान का 'वस्तुनिष्ठ पंचनामा' (Objective Panchnama) तैयार करें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी वास्तविक नुकसान हुआ है, उसका सटीक आंकलन करके तुरंत शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए। इसके साथ ही, मौजूदा मौसम में फसलों को बचाने या आगे की खेती के लिए किसानों को तुरंत कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की रणनीति
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा या प्रतिकूल मौसम के कारण जब भी किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, तो शासन के तय मानदंडों के मुताबिक ही राहत पैकेज या मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। पालकमंत्री के इस दौरे और वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट के आने के बाद शासन स्तर पर इन प्रभावित तहसीलों के लिए किसी बड़े राहत पैकेज की घोषणा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
दौरे के दौरान मौजूद रहे प्रमुख चेहरे
इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान पालकमंत्री के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विधायक राजू कारेमोरे और विधायक परिणय फुके ने भी शिरकत की। इनके अलावा राजस्व विभाग, कृषि विभाग और अन्य संबंधित महकमों के जिला स्तर के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में अपनी परेशानियां अधिकारियों के सामने रखीं।
फिलहाल, किसानों की निगाहें अब सरकार और प्रशासन की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो इन पंचनामों के आधार पर तैयार होकर मंत्रालय जाएगी। देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस आपदा पर राहत का मरहम लगा पाता है।