मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर से शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। शिक्षक भर्ती परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने (पदवृद्धि) और दूसरी काउंसलिंग आयोजित करने की मांग को लेकर वर्ग-1 के चयनित और प्रतीक्षारत (वेटिंग) अभ्यर्थी उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को इन अभ्यर्थियों ने अपने आंदोलन को और तेज करते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
रोशनपुरा चौराहे पर रोके गए प्रदर्शनकारी
नीलम पार्क में पिछले 43 दिनों से लगातार धरना दे रहे शिक्षक अभ्यर्थी सोमवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकले थे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए ये अभ्यर्थी जब रोशनपुरा चौराहे के पास पहुंचे, तो भारी पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद आक्रोशित अभ्यर्थी वहीं सड़क पर ही बैठ गए और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
तेज धूप और उमस के बीच घंटों तक चले इस प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया जब एक महिला शिक्षिका की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चक्कर खाकर सड़क पर गिरने के बाद मौके पर मौजूद अन्य साथियों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत उनकी मदद की और प्राथमिक उपचार दिलाया। इस घटना के बाद अभ्यर्थियों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी और अधिक बढ़ गई।
पुलिस की अपील और अभ्यर्थियों का अड़ियल रुख
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। पुलिस ने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे मुख्यमंत्री हाउस तक मार्च करने के बजाय रोशनपुरा चौराहे पर ही अपना ज्ञापन सौंप दें और शांतिपूर्वक नीलम पार्क वापस लौट जाएं। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, वे पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल पुलिस ने सीएम हाउस की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।
अनोखे नारों के साथ सरकार पर साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों का अंदाज भी चर्चा का विषय बना रहा। अपनी पीड़ा और नाराजगी व्यक्त करने के लिए उन्होंने अनोखे नारों का सहारा लिया। भीड़ के बीच से 'एक कचौरी, दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा' जैसे नारे गूंजते रहे। गौरतलब है कि इससे पहले भी इस आंदोलन के दौरान भोजन और नाश्ते से जुड़े ऐसे ही व्यंग्यात्मक नारे काफी सुर्खियों में रहे हैं, जिनके जरिए शिक्षक अभ्यर्थी अपनी अनदेखी का विरोध कर रहे हैं।
प्रमुख मांगें: पदवृद्धि और द्वितीय काउंसलिंग
वर्ग-1 के इन अभ्यर्थियों का मुख्य दर्द यह है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा-2023 में बड़ी संख्या में मेधावी युवा शामिल हुए और उत्तीर्ण भी हुए, लेकिन अंततः नियुक्ति बेहद सीमित पदों पर ही दी गई। इसके चलते हजारों योग्य उम्मीदवार आज भी रोजगार की आस में भटक रहे हैं। अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- शिक्षक भर्ती परीक्षा में रिक्त पदों की संख्या बढ़ाई जाए (पदवृद्धि)।
- योग्य और पात्र अभ्यर्थियों के लिए दूसरी काउंसलिंग का दौर जल्द शुरू किया जाए।
- प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल सभी उम्मीदवारों को चरणबद्ध तरीके से नियुक्ति दी जाए।
लंबा खिंचता संघर्ष और पहले उठाए गए कदम
यह आंदोलन रातों-रात खड़ा नहीं हुआ है। इसके पीछे पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय का संघर्ष और मानसिक प्रताड़ना जुड़ी है। भोपाल के नीलम पार्क में पिछले 43 दिनों से अनवरत चल रहे इस धरने के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए कई चरम कदम उठाए हैं।
इससे पहले आंदोलन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने आमरण अनशन और भूख हड़ताल जैसी राह भी चुनी थी। कुछ हफ्तों पहले एक अभ्यर्थी के लंबे निर्जल अनशन के दौरान स्वास्थ्य अत्यधिक बिगड़ जाने की घटना भी सामने आई थी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया था। इसके अलावा, आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर भी अपनी व्यथा और गुहार पहुंचाई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया है।
आगे क्या होगा?
सोमवार को हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां बेरोजगार युवा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मशक्कत कर रहा है। आने वाले दिनों में यदि शासन स्तर पर कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिस पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं।