काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र हितों के मुद्दों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। विश्वविद्यालय की फिजाओं में एक बार फिर आंदोलनों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की बीएचयू इकाई ने प्रशासनिक कथित अनियमितताओं, लचर सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कई गंभीर मांगें रखते हुए साफ कर दिया है कि अगर तय सीमा के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छात्र समुदाय बड़े और उग्र आंदोलन के लिए विवश होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभाविप ने एक आक्रामक अभियान का शंखनाद किया है, जिसके तहत ‘चीफ प्रॉक्टर हटाओ, बीएचयू बचाओ’ का नारा बुलंद किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच तल्ख होते इस रिश्तों के पीछे कई ठोस वजहें और विवादित मामले बताए जा रहे हैं, जिन्होंने परिसर की आंतरिक व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि पूरा विवाद क्या है और अभाविप की मुख्य मांगें क्या हैं।
प्रेक्षागृह आवंटन में अनियमितता और दबाव का आरोप
इस पूरे विवाद की सुई सबसे पहले पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के आवंटन से घूमनी शुरू हुई। अभाविप का आरोप है कि 12 सितंबर को इस प्रतिष्ठित प्रेक्षागृह के आवंटन में प्रशासनिक स्तर पर नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। संगठन का दावा है कि नियमों की अनदेखी करके एक विशेष कार्यक्रम के लिए प्रेक्षागृह दे दिया गया।
मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आगे बढ़कर परफॉर्मिंग आर्ट्स संकाय के प्रमुख पर कथित रूप से अनुचित दबाव बनाए जाने की बात भी सामने आई है। अभाविप ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, परिसर में बाहरी व्यक्तियों या आयोजनों के लिए प्रेक्षागृह और अन्य परिसंपत्तियों को अनुमति देने की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई का विरोध
लोकतांत्रिक संस्थानों में अपनी बात रखना और समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना छात्रों का मौलिक अधिकार माना जाता है, लेकिन बीएचयू में इन दिनों इसके विपरीत हालात होने का दावा किया जा रहा है। अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा है कि जो छात्र परिसर की मूलभूत सुविधाओं और अन्य जायज मुद्दों को लेकर आवाज उठाते हैं, उन्हें प्रशासनिक दमन का शिकार बनाया जा रहा है।
- छात्रों के खिलाफ मनमाने ढंग से अनुशासनात्मक समितियां गठित करना।
- पुलिस थानों में छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराना।
- छात्रों को उनके हॉस्टल (छात्रावास) से बेदखल करना या वंचित करना।
संगठन ने मांग की है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। यदि छात्रों पर कोई गंभीर आपराधिक कृत्य सिद्ध नहीं होता है, तो उनके खिलाफ की गई सभी दंडात्मक कार्रवाइयों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
सुरक्षा व्यवस्था और वेतन विसंगति पर गंभीर सवाल
देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार बीएचयू की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। अभाविप ने बीएचयू और आईआईटी बीएचयू (IIT-BHU) के सुरक्षाकर्मियों के बीच वेतन में भारी अंतर का मुद्दा उठाया है। संगठन का तर्क है कि जब दोनों परिसरों में सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी की अवधि लगभग समान है, तो उनके पारिश्रमिक में इतना बड़ा भेद क्यों होना चाहिए?
इसके साथ ही, परिसर की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में अनुभवी और पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दिए जाने की पुरजोर मांग की गई है। मौजूदा समय में परिसर के भीतर बाहरी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही, तेज रफ्तार गाड़ियां और रुआब दिखाने वाले हूटर बजाते काफिलों पर पूरी तरह रोक लगाने की सख्त मांग उठाई गई है।
छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए महिला छात्रावासों के आसपास विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने की बात कही गई है। इसके तहत संवेदनशील और अंधेरे वाले स्थानों पर हाई-क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाने, स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने और नियमित गश्त (पैट्रोलिंग) बढ़ाने की मांग को प्रमुखता से रखा गया है।
मधुबन पार्क और दुकानों पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
विश्वविद्यालय परिसर जैसे पवित्र शैक्षणिक स्थल पर अवैध गतिविधियों का पाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। अभाविप ने आरोप लगाया है कि मधुबन पार्क के आसपास शराब की खाली बोतलें, बीयर के डिब्बे और सिगरेट के पैकेट मिलना इस बात का प्रमाण है कि परिसर की सुरक्षा और नैतिकता दांव पर है। संगठन ने इस क्षेत्र में दिन-रात कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
इसके अलावा, परिसर के भीतर संचालित होने वाली दुकानों—विशेषकर वीटी (VT) क्षेत्र की दुकानों—पर सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही, खाद्य सामग्रियों की ओवरप्राइसिंग पर लगाम कसने के लिए सभी दुकानों पर अनिवार्य रूप से मूल्य सूची (Rate List) प्रदर्शित करने को कहा गया है, ताकि छात्रों का आर्थिक शोषण न हो सके।
प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इन तमाम बिंदुओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष एक स्पष्ट और कड़ा रुख अपना लिया है। संगठन ने प्रशासन को अपनी सभी मांगों के समाधान के लिए पूरे सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
अभाविप के नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित सात दिनों की अवधि के भीतर प्रेक्षागृह आवंटन की जांच, छात्रों पर हुई दमनात्मक कार्रवाई की समीक्षा, सुरक्षा तंत्र में सुधार और अन्य बिंदुओं पर कोई ठोस एवं सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत बीएचयू परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में बीएचयू प्रशासन इन चेतावनियों पर क्या रुख अपनाता है और छात्रों के आक्रोश को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।