वाराणसी की सांस्कृतिक और पौराणिक धरोहरों में शुमार विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला का मंचन इस वर्ष 2026 में भी अपनी पुरानी और अनूठी परंपराओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्य लीला के आरंभ से पूर्व होने वाले धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में द्वितीय श्री गणेश पूजन अत्यंत विधि-विधान और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर रामनगर का पूरा क्षेत्र राममय नजर आया, जहां हर तरफ रामचरितमानस की चौपाइयों और मंगलध्वनि की गूंज सुनाई दे रही थी।
दो घंटे चले अनुष्ठान में डूबा पूरा वातावरण
लगभग दो घंटे तक चले इस पावन पूजन और पाठ के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने अभूतपूर्व आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति की। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और संकल्प पूजन के साथ हुई। इसके बाद जब रामचरितमानस के बालकांड का पाठ शुरू हुआ, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति भक्ति रस में सराबोर हो गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करना था, बल्कि आधुनिक समय में जीवन मूल्यों, सच्ची श्रद्धा और पारंपरिक संस्कारों को अपने भीतर आत्मसात करने का संदेश देना भी था।
रामायणी दल के स्वरों से जीवंत हुई विनयपत्रिका
पूजन के दौरान सबसे मनमोहक दृश्य वह था जब रामायणी दल ने पारंपरिक नारद वाणी में विनयपत्रिका की प्रसिद्ध पंक्ति— ‘गाइए गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन’ का मधुर गायन किया। इस मंगलाचरण की भक्तिमय प्रस्तुति ने पूरे परिवेश को ऊर्जावान और पवित्र बना दिया। इसके तुरंत पश्चात जब ‘मागत तुलसीदास कर जोरे। बसहु राम-सिय मानस मोरे॥’ का पाठ गूंजा, तो श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। उपस्थित जनसमूह ने इसे अपने आराध्य प्रभु श्रीराम और माता सीता के अनन्त काल तक अपने हृदय में वास करने की कामना से जोड़ा।
पारंपरिक संकल्प और विद्वान आचार्यों की उपस्थिति
सनातन संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, रामलीला अधिकारी पाठक जी ने मुख्य जजमान के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रकांड विद्वान पंडित श्री रामनारायण पांडेय के आचार्यत्व में संकल्प पूजन संपन्न कराया। इस विशेष संकल्प का मुख्य उद्देश्य विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला के इस विशाल अनुष्ठान के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना करना था। साथ ही, इसके माध्यम से राजा, प्रजा, देश-विदेश से रामलीला देखने और सुनने आने वाले सभी श्रद्धालुओं तथा इस आयोजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े प्रत्येक कार्यकर्ता के जीवन में मंगल और कल्याण की प्रार्थना की गई।
यह पूरा धार्मिक अनुष्ठान पंडित रामनारायण पांडेय और शांत नारायण पांडेय द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न कराया गया। इस दौरान रामलीला के पंच स्वरूप— भगवान श्रीराम, माता सीता, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के साथ-साथ महर्षि वशिष्ठ, महाराज दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल के सदस्य और अन्य सभी सहायक पात्र भी पूरी श्रद्धा के साथ उपस्थित रहे। इन सभी स्वरूपों की उपस्थिति ने इस अनुष्ठान को और भी अधिक जीवंत और प्रामाणिक बना दिया।
बालकांड के पदों ने किया श्रद्धालुओं को भावविभोर
गणेश पूजन के उपरांत, बालकांड के अंतर्गत मंगलाचरण से लेकर शुरुआती सात दोहों तक का पाठ नारद वाणी में बहुत ही सधे हुए स्वरों में किया गया। रामचरितमानस की एक-एक चौपाई और उसके गहरे अर्थ जब खुले आसमान के नीचे गूंजे, तो वहां मौजूद लीला प्रेमी और दर्शक भावविभोर हो उठे। कई श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था के आंसू साफ देखे जा सकते थे। लोगों का कहना था कि यह केवल एक पाठ नहीं है, बल्कि यह आत्मा को झकझोरने वाला एक आध्यात्मिक अनुभव है जो उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ता है।
आगामी लीलाओं की भव्यता को लेकर बढ़ रही उत्सुकता
द्वितीय गणेश पूजन और बालकांड के इस सफल आयोजन के बाद अब रामनगर रामलीला के प्रेमियों में आगामी लीलाओं और मंचन को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम की आगामी लीलाओं के दर्शन की प्रतीक्षा के भाव के साथ इस कार्यक्रम का समापन किया। रामनगर की इस ऐतिहासिक रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बिना किसी कृत्रिम साज-सज्जा के, प्राकृतिक परिवेश और पारंपरिक संवाद शैली में आज भी जीवंत है, जो नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में एक मजबूत सेतु का काम कर रही है।
