बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों खलबली मची हुई है। मामला एक ऐसे हाई-प्रोफाइल अफसर दंपती से जुड़ा है, जिनके ठिकानों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की रेड के बाद अब कानूनी शिकंजा कसता चला जा रहा है। आय से अधिक संपत्ति के इस गंभीर मामले में पटना के एडीएम आपूर्ति रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी सह दानापुर की अवर निबंधक कुमारी स्वीटी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। जांच एजेंसियों ने अब इनके खिलाफ वित्तीय मोर्चे पर भी बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत दोनों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
भारतीय स्टेट बैंक के खातों पर कसी गई लगाम
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, निगरानी टीम ने इस कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए एडीएम रविंद्र कुमार दिवाकर और अवर निबंधक कुमारी स्वीटी के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में मौजूद खातों की पहचान कर ली है। दोनों के नाम पर बैंक में कुल दो मुख्य खाते संचालित बताए जा रहे हैं। इन खातों में जमा भारी-भरकम राशि और पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए संदिग्ध लेन-देन (Transactions) की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों के जरिए अवैध कमाई को किस तरह से ठिकाने लगाया गया या सफेद किया गया।
पैतृक विभागों को भेजी गई रिपोर्ट, निलंबन की तलवार
छापेमारी के दौरान मिले चौंकाने वाले दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर निगरानी ब्यूरो ने दोनों अधिकारियों के पैतृक विभागों को आधिकारिक सूचना भेज दी है। इस पत्र में छापेमारी के दौरान जब्त की गई तमाम चल और अचल संपत्तियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा संलग्न किया गया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार जल्द ही इनके खिलाफ बड़ी विभागीय कार्रवाई का आगाज कर सकती है। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि इन दोनों दागी अधिकारियों पर जल्द ही निलंबन की गाज गिर सकती है।
सात संपत्तियों का खुलासा, दो फ्लैट्स को जोड़कर बनाया जा रहा था आलीशान आशियाना
निगरानी की अब तक की तफ्तीश में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस अफसर दंपती ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कोसों दूर जाकर अकूत संपत्ति बनाई है। जांच में इनके नाम पर कुल सात अलग-अलग जगहों पर जमीन और फ्लैट होने के दस्तावेज मिले हैं। इनमें खास तौर पर दानापुर के नजदीक स्थित कश्यप ग्रीन होम्स का मामला चर्चा में है। इस सोसायटी के ब्लॉक ए में स्थित दो फ्लैट—नंबर ए-401 और ए-402—इनकी सूची में शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन दोनों फ्लैट्स को आपस में तोड़कर एक बड़ा और भव्य डुप्लेक्सनुमा फ्लैट तैयार किया जा रहा था, जिस पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा था।
इंटीरियर डिजाइनिंग के खर्च का होगा तकनीकी मूल्यांकन
दोनों फ्लैट्स को आपस में जोड़कर कराए जा रहे हाई-एंड इंटीरियर वर्क ने जांच टीम का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस भव्य सजावट और इंटीरियर पर असल में कितना खर्च किया गया है, इसका सटीक आकलन करने के लिए अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। इसके लिए तकनीकी परीक्षक कोषांग (Technical Examiner Cell) की एक विशेष टीम को इस कार्य में लगाया गया है। यह टीम यह जांच करेगी कि इंटीरियर पर जो सामग्री और कारीगरी इस्तेमाल हुई है, उसका वास्तविक बाजार मूल्य क्या है और इसके भुगतान के लिए स्रोत क्या थे।
छापेमारी में मिले लगभग 80 लाख रुपये नकद
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जब इन अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई, तो वहां से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ। दोनों ठिकानों को मिलाकर कुल 79 लाख 98 हजार 410 रुपये नकद मिले। इनमें अकेले पटना वाले फ्लैट से 70 लाख 53 हजार 710 रुपये की गड्डियां बरामद हुईं, जबकि बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से 9 लाख 44 हजार 700 रुपये हाथ लगे। इतनी बड़ी मात्रा में घर में कैश मिलना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जिसे जांच का सबसे मजबूत आधार बनाया जा रहा है।
52 लाख के जेवरात और 48 ब्रांडेड घड़ियां
नकद के अलावा जब लॉकरों और कमरों की तलाशी ली गई, तो सोने, चांदी और हीरों के बेशकीमती आभूषणों का जखीरा भी हाथ लगा। कुल 52 लाख 60 हजार 829 रुपये के गहने जब्त किए गए, जिसमें पटना से करीब 24 लाख और बेगूसराय से 28 लाख से अधिक के आभूषण शामिल हैं। इसके अलावा, छापेमारी के दौरान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और महंगे ब्रांडों की 48 घड़ियां भी बरामद हुईं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 6 लाख 1 हजार रुपये आंकी गई है। हालांकि, पूछताछ के दौरान अधिकारी ने इन घड़ियों को अपने तबादले के समय सहयोगियों द्वारा दिए गए 'उपहार' के रूप में बताया है, जिसकी सत्यता की जांच की जा रही है।
कार और इलेक्ट्रॉनिक सामान के बिलों की भी पड़ताल
जांच के दौरान सिर्फ नकदी और गहने ही नहीं, बल्कि लग्जरी जीवनशैली की कई अन्य चीजें भी सामने आई हैं। टीम को छापेमारी में एक टाटा स्टार्म कार, तीन अत्याधुनिक एयर कंडीशनर (AC) और बड़े पैमाने पर खरीदे गए अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामानों के खरीद बिल मिले हैं। इन तमाम बिलों का मिलान अधिकारियों की वैध आय से किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये विलासिता की वस्तुएं किस आय से खरीदी गईं।
कामकाज और फैसलों की भी हो सकती है समीक्षा
करीब 80 लाख रुपये नकद और करोड़ों की बेनामी संपत्ति के खुलासे के बाद अब शासन स्तर पर इनके पिछले प्रशासनिक और कार्यकालीय फैसलों की समीक्षा किए जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। एडीएम आपूर्ति और अवर निबंधक के पद पर रहते हुए इन्होंने अपने कार्यकाल में जनता या सरकार के हित में क्या फैसले लिए और किन फाइलों को प्राथमिकता दी, इसकी भी फाइलें खंगाली जा सकती हैं। बहरहाल, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की यह कार्रवाई बिहार के प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा संदेश दे रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।