बदलते दौर में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी5 पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर में एक बेहद सराहनीय और जरूरी पहल देखने को मिली है। बाल सुरक्षा और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत शहर के विभिन्न विद्यालयों में विशेष जागरूकता अभियानों का दौर तेजी से चल रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराना और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या उत्पीड़न के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है।
मंगलवार को शहर के कई प्रतिष्ठित विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं में सीधे न्यायिक अधिकारी पहुंचे और उन्होंने किशोरावस्था की दहलीज पर खड़ी छात्राओं से सीधा संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने न केवल उन्हें गुड टच और बैड टच का फर्क समझाया, बल्कि आज के डिजिटल युग में मंडरा रहे साइबर खतरों से भी आगाह किया।
चुप्पी तोड़ीए, डर को पीछे छोड़िए
अभियान के दौरान न्यायविदों ने एक स्वर में छात्राओं को यह संदेश दिया कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके साथ गलत तरीके से छूने की कोशिश करे, असहज करने वाला व्यवहार करे या फिर इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन परेशान (Cyber Stalking/Harassment) करे, तो इस पर बिल्कुल चुप न रहें। अक्सर बच्चियां समाज के डर या झिझक के कारण ऐसी वारदातों को छिपा लेती हैं, जो अपराधियों के हौसले और बुलंद कर देती हैं।
न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में समझाया कि किसी भी अनुचित व्यवहार पर डर या संकोच के कारण चुप रहना किसी समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे हालात में तुरंत अपने अभिभावक (माता-पिता), स्कूल के शिक्षक या फिर सीधे कानूनी सहायता तंत्र तक अपनी बात पहुंचाना ही सुरक्षा की दिशा में उठाया गया सबसे पहला और सबसे मजबूत कदम है।
विभिन्न विद्यालयों में चला संवाद का दौर
कानपुर के कई प्रमुख बालिका विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों की टीमें पहुंचीं और उन्होंने हजारों छात्राओं को प्रशिक्षित किया:
- पीपीएन बालिका इंटर कॉलेज, परेड: यहां अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अतुल नायक ने करीब 280 छात्राओं के साथ संवाद किया और उन्हें कानून के पहलुओं से रूबरू कराया।
- खालसा गर्ल्स इंटर कॉलेज, हरजिंदर नगर: इस स्कूल में एडीजे सुभाष सिंह और अमित सिंह ने लगभग 603 छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम और साइबर सुरक्षा के विभिन्न तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जानकारी दी।
- खालसा गर्ल्स इंटर कॉलेज, गोविंद नगर: यहां न्यायिक अधिकारी दीपाली सिंह, शिप्रा श्रीवास्तव और डॉ. परवेज अख्तर ने मोर्चा संभाला और 510 छात्राओं का उचित मार्गदर्शन किया।
- मुस्लिम जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज, चमनगंज: इस केंद्र पर अपर जिला जज कंचन सागर, न्यायिक मजिस्ट्रेट साधना गिरी और एलएसए रिजवान अली खान ने छात्राओं को उनके अधिकारों और सुरक्षात्मक उपायों के बारे में विस्तार से बताया।
- अन्य विद्यालय: कैलास सरस्वती इंटर कॉलेज और आर्य कन्या इंटर कॉलेज में भी सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारियों ने पहुंचकर बच्चों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
मुसीबत के वक्त याद रखें ये तीन जादुई नंबर
जागरूकता सत्र का सबसे अहम हिस्सा आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देना रहा। वक्ताओं ने छात्राओं और शिक्षकों को खासतौर पर हिदायत दी कि वे संकट के समय घबराएं नहीं, बल्कि इन तीन बेहद महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों को हमेशा याद रखें और जरूरत पड़ने पर इनका बेझिझक इस्तेमाल करें:
- 15100 (नालसा हेल्पलाइन - NALSA Helpline): मुफ्त कानूनी सहायता और सलाह के लिए।
- 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन - Child Helpline): बच्चों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति या खतरे में तुरंत मदद पाने के लिए 24 घंटे उपलब्ध सेवा।
- 112 (आपात सेवा - Emergency Response Support System): किसी भी गंभीर खतरे या तुरंत पुलिस सहायता की आवश्यकता होने पर।
डिजिटल दुनिया के खतरों से भी चेताया
आज के समय में बच्चे बहुत कम उम्र से ही स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी, आपत्तिजनक संदेश या ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सत्र के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि सोशल मीडिया पर अजनबी लोगों से दोस्ती न करें और यदि कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उन्हें परेशान करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत अपने घर पर साझा करें।
समाज और अभिभावकों की बड़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जागरूकता अभियान केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि घर के अंदर भी एक ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार किया जाना चाहिए जहां बच्चे बिना किसी खौफ के अपनी बात कह सकें। जब तक समाज और परिवार मिलकर बच्चों को यह भरोसा नहीं दिलाएंगे कि वे उनके साथ हर परिस्थिति में खड़े हैं, तब तक इस तरह के कानूनी प्रावधानों का जमीनी स्तर पर पूरा फायदा मिलना मुश्किल है।
कानपुर प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का यह कदम निश्चित रूप से बाल सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रकार के आयोजनों से न सिर्फ बच्चों में जागरूकता बढ़ती है, बल्कि असामाजिक तत्वों के मन में कानून का डर भी पैदा होता है। आने वाले दिनों में इस अभियान को और भी व्यापक स्तर पर चलाए जाने की योजना है ताकि हर एक बच्चे तक सुरक्षा का यह संदेश पहुंचाया जा सके।