बिहार के सीमांचल इलाके में इन दिनों आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उल्लास का एक अलग ही दौर देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में किशनगंज जिले से एक बेहद सुखद और भव्य तस्वीर सामने आई है, जहाँ जिले के प्रसिद्ध देव घाट पर 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत एक अलौकिक संध्या गंगा आरती का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न सिर्फ स्थानीय निवासियों बल्कि दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं का भी मन मोह लिया।
गंगा समिति, नमामि गंगे और जिला परिषद की संयुक्त पहल
यह भव्य आयोजन किसी एक संस्था का प्रयास नहीं था, बल्कि इसे कई प्रतिष्ठित निकायों और संगठनों के सामूहिक प्रयासों से धरातल पर उतारा गया। गंगा समिति, नमामि गंगे परियोजना और जिला परिषद किशनगंज के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था।
कार्यक्रम की शुरुआत से ही देव घाट के चप्पे-चप्पे को फूलों और दीपों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। शाम ढलते ही जब घाट पर हजारों की संख्या में दीप प्रज्वलित किए गए, तो पूरा वातावरण प्रकाशमय हो उठा।
वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य आरती से गूंजा घाट
संध्या ढलते ही देव घाट का नजारा वाराणसी और हरिद्वार के गंगा घाटों जैसा प्रतीत होने लगा। पंडितों के द्वारा विधि-विधान से शुरू किए गए वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद से पूरा वातावरण गूंज उठा। जब एक साथ दर्जनों आचार्यों ने पारंपरिक तरीके से विशाल दीपों और कपूर के साथ मां गंगा की आरती शुरू की, तो वहां मौजूद हर शख्स इस भक्तिमय माहौल में डूब गया।
- मंत्रोच्चार: काशी और हरिद्वार के तर्ज पर विशेष वैदिक मंत्रों का उच्चारण।
- दीपदान: हजारों श्रद्धालुओं द्वारा मां गंगा में दीप प्रवाहित किए गए।
- उपस्थिति: स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में आम जनता की सहभागिता।
आरती के दौरान 'हर हर गंगे' के उद्घोष से पूरा किशनगंज जिला गंजायमान हो उठा। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के चेहरे पर इस आयोजन को लेकर एक अलग ही उत्साह और श्रद्धा भाव देखा गया।
'सेवा संकल्प अभियान' का मुख्य उद्देश्य
इस भव्य आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए 'सेवा संकल्प अभियान' के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था। नमामि गंगे और जिला परिषद के अधिकारियों ने इस मौके पर उपस्थित जनसमूह को जल स्रोतों की स्वच्छता और उनके संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि नदियां हमारी जीवनरेखा हैं और इनके बिना मानव अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। किशनगंज से बहने वाली नदियां यहां की आबोहवा और कृषि को समृद्ध करती हैं, इसलिए इनकी निर्मलता और अविरलता बनाए रखना हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
स्थानीय लोगों और युवाओं में दिखा भारी उत्साह
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें युवाओं की भागीदारी बड़े पैमाने पर देखने को मिली। सोशल मीडिया के इस दौर में जहां युवा अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं, वहीं किशनगंज के देव घाट पर युवाओं का यह हुजूम इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी परंपराओं को लेकर कितनी जागरूक और उत्सुक है।
कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद का वितरण किया गया और सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपने आसपास के जल स्त्रोतों को गंदा नहीं होने देंगे तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अपना पूरा योगदान देंगे।
निष्कर्ष
किशनगंज के देव घाट पर हुआ यह संध्या गंगा आरती आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने सामाजिक एकता, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक नया अध्याय लिख दिया है। आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजनों से क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है।