उत्तराखंड की राजनीति के गलियारों में इस समय हलचल काफी तेज हो चुकी है। राज्य से राज्यसभा की एक महत्वपूर्ण सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अधिकृत उम्मीदवार दिनेश आर्य ने मंगलवार को विधिवत रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। देहरादून स्थित विधानसभा परिसर में हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने सूबे के सियासी तापमान को एक बार फिर से बढ़ा दिया है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान सत्ता के शीर्ष नेतृत्व से लेकर संगठन के तमाम दिग्गज चेहरे एक मंच पर नजर आए, जिससे पार्टी की एकजुटता और इस सीट के महत्व का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है।

विधानसभा परिसर में उमड़ा दिग्गजों का हुजूम
मंगलवार का दिन उत्तराखंड की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद खास रहा। निर्धारित समयानुसार बीजेपी उम्मीदवार दिनेश आर्य ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पहुंचकर अपने नामांकन के कागजात प्रस्तुत किए। इस अवसर पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का नजारा भी देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मुस्तैद नजर आए और उन्होंने दिनेश आर्य के साथ खड़े रहकर उनका हौसला बढ़ाया।
नामांकन कक्ष के बाहर और भीतर मौजूद नेताओं की लंबी फेहरिस्त इस बात की गवाही दे रही थी कि पार्टी इस चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रही है। इस हाई-प्रोफाइल मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और खुद मौजूदा राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल समेत कई अन्य विधायक, सांसद और पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी भी विधानसभा परिसर में डटे रहे।
सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं, चार अक्टूबर को हुआ था ऐलान
नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच दिनेश आर्य को औपचारिक रूप से शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि दिनेश आर्य के उच्च सदन में पहुंचने से उत्तराखंड के विकास को और अधिक गति मिलेगी तथा राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की आवाज को एक नई मजबूती हासिल होगी।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने गत चार अक्टूबर को ही उत्तराखंड की इस रिक्त होने वाली राज्यसभा सीट के लिए दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगाई थी और उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया था। पार्टी के इस फैसले के बाद से ही सियासी गलियारों में सुगबुगाहट शुरू हो गई थी और मंगलवार को नामांकन के साथ ही इस पर औपचारिक मुहर भी लग गई है।
क्यों खाली हो रही है यह सीट?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह सीट वर्तमान में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यरत नरेश बंसल की है। मौजूदा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल इसी वर्ष 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। उनके कार्यकाल के समापन से ठीक पहले इस सीट को भरने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराया जा रहा है। चूंकि उत्तराखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास प्रचंड बहुमत है, ऐसे में दिनेश आर्य का उच्च सदन में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है, हालांकि चुनाव आयोग के तय नियमों और कार्यक्रमों के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य है।
राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल और आगे की प्रक्रिया
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक इस चुनाव की पूरी रूपरेखा इस प्रकार तय की गई है:
- नामांकन की अंतिम तिथि: छह अक्टूबर (आज नामांकन का आखिरी दिन था, जिसे दिनेश आर्य ने पूरा कर लिया है)।
- नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी): सात अक्टूबर को सभी दाखिल किए गए पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी।
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: उम्मीदवार यदि अपना नाम वापस लेना चाहें, तो वे नौ अक्टूबर तक ऐसा कर सकेंगे।
- मतदान और मतगणना (यदि आवश्यक हुआ): यदि मुकाबला निर्विरोध नहीं होता है और आवश्यकता पड़ती है, तो 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और स्थिति स्पष्ट होने पर उसी दिन वोटों की गिनती यानी मतगणना भी संपन्न करा ली जाएगी।
राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं निगाहें
चूंकि राज्य में वर्तमान राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से सत्ताधारी दल के पक्ष में झुके हुए हैं, इसलिए इस चुनाव को महज एक औपचारिकता के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, लोकतांत्रिक परंपराओं के निर्वहन के लिए निर्वाचन आयोग के तयशुदा calendario (शेड्यूल) का पूरी सख्ती से पालन किया जा रहा है। दिनेश आर्य के नामांकन के साथ ही अब सबकी निगाहें सात अक्टूबर यानी बुधवार को होने वाली नामांकन पत्रों की जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी कि मुकाबला निर्विरोध संपन्न होता है या फिर 16 अक्टूबर को वोटिंग की नौबत आती है।
राज्य के राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि दिनेश आर्य को मैदान में उतारकर पार्टी ने एक बार फिर से जमीन से जुड़े और कर्मठ कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने का संदेश दिया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि आगामी नौ अक्टूबर को नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद चुनावी मैदान में अंतिम तौर पर कौन-कौन बचता है।