पर्वतीय और दूरस्थ इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत कर रहे समाज के वंचित वर्गों की आवाज अब सीधे राज्य की प्रशासनिक राजधानी तक पहुंच रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अनूठी पहल के तहत विभिन्न दूरदराज के क्षेत्रों से पहुंचे अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया। मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में आम जनता ने बिना किसी मध्यस्थ के अपनी समस्याओं का कच्चा चिट्ठा मुख्यमंत्री के सामने रखा।
सड़क, शिक्षा और रोजगार पर रहा विशेष जोर
टिहरी, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी और देहरादून के विभिन्न ग्रामीण तथा पर्वतीय अंचलों से आए प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष बुनियादी जरूरतों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। संवाद के दौरान मुख्य रूप से पक्की सड़कों का जाल बिछाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और आजीविका के साधन मजबूत करने जैसी बुनियादी समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री धामी ने लोगों की एक-एक बात को बेहद संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने मौके पर मौजूद तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को यह कड़े निर्देश दिए कि इन सभी समस्याओं का निस्तारण केवल फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि इन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तय समयसीमा के भीतर हल किया जाए।
समावेशी विकास सरकार का मुख्य ध्येय
जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी सरकार का मूल मंत्र समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे आखिरी व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली खूबसूरती तभी सार्थक होती है जब सत्ता और जनता के बीच की दूरियां मिटती हैं और सीधा संवाद स्थापित होता है।
"सरकार का उद्देश्य केवल कागजी योजनाएं तैयार करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का प्रत्येक वर्ग और क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़े। हम समावेशी विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।"
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान ने हमें सामाजिक न्याय और समता का जो मार्ग दिखाया है, सरकार उसी प्रेरणा से आगे बढ़ रही है। एससी-एसटी और अन्य कमजोर तथा वंचित वर्गों का सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है।
कल्याणकारी योजनाओं का मिल रहा है लाभ
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए देश भर में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका सीधा लाभ उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों के लोगों तक भी पहुंच रहा है:
- एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय: जनजातीय क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को बेहतरीन आवासीय शिक्षा की सुविधा।
- पीएम-जनमन योजना: प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत दूरस्थ बस्तियों का कायाकल्प।
- धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: गांवों के समग्र विकास के लिए विशेष पहल।
- छात्रवृत्ति योजनाएं: एससी-एसटी वर्ग के युवाओं और छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा का मार्ग सुगम बनाना।
उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू हैं। जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेष बजट प्रावधान किए गए हैं ताकि किसी भी क्षेत्र की उपेक्षा न हो सके।
संस्कृति के संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत करने के मोर्चे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने 'आदि गौरव महोत्सव' जैसे आयोजनों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक हस्तशिल्प और रीति-रिवाजों को एक बड़ा मंच और पहचान मिल रही है।
इसके साथ ही, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों के हुनर की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों (Local Products) को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। विपणन (Marketing) और आधुनिक प्रशिक्षण के जरिए इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
जनता की भागीदारी के बिना विकास अधूरा
अपने पिछले पांच वर्षों के अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर और उत्तरकाशी जैसे दुर्गम क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया है। इन दौरों के दौरान स्थानीय जनता से सीधे संवाद करने से उन्हें वहां की जमीनी हकीकत और वास्तविक जरूरतों को बेहद करीब से समझने का मौका मिला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार नीतियां बना सकती है और संसाधन मुहैया करा सकती है, लेकिन किसी भी क्षेत्र का स्थायी और दीर्घकालिक विकास तभी संभव है जब उसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी हो। उत्तराखंड को देश का एक अग्रणी और विकसित राज्य बनाने के इस महाअभियान में सरकार और जनता को एक टीम की तरह मिलकर कदम बढ़ाने होंगे।
इस उच्च स्तरीय संवाद कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न जिलों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।