देश के चार महत्वपूर्ण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 6 विधानसभा और लोकसभा सीटों पर आज यानी मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो चुका है। सुबह 7 बजे से ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जिन सीटों पर यह चुनावी दंगल हो रहा है, उनमें पश्चिम बंगाल की दो (नंदीग्राम और रजीनगर), तमिलनाडु की दो (मधुरांतकम और धारापुरम), पुडुचेरी की एक और असम की नगालैंड नहीं बल्कि महत्वपूर्ण नगांव लोकसभा सीट शामिल है। इन सभी सीटों पर डाले गए वोटों की गिनती आगामी 9 अक्टूबर को की जाएगी।
पश्चिम बंगाल: नंदीग्राम और रजीनगर में सुवेंदु अधिकारी सरकार की पहली अग्निपरीक्षा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार का उपचुनाव बेहद खास माना जा रहा है। राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार जीत दर्ज कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के लंबे शासन का अंत किया था। अब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई बीजेपी सरकार के सामने यह पहला बड़ा चुनावी इम्तहान है।
नंदीग्राम सीट का इतिहास बंगाल की राजनीति में काफी भूचाल लाने वाला रहा है। साल 2011 में ममता बनर्जी ने भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दम पर इसी सीट से सत्ता का रास्ता तय किया था। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को इसी रण में शिकस्त दी थी। इस बार के 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने एक बार फिर नंदीग्राम से जीत हासिल की, लेकिन उन्होंने भवानीपुर सीट को अपने पास रखा, जिसके कारण यहां उपचुनाव करवाना पड़ा।
बीजेपी ने इस बार रण में हसिराणी रथ को उतारा है, जो चंद्रनाथ रथ की माता हैं। चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के पूर्व करीबी थे और विधानसभा चुनाव जीतने के ठीक दो दिन बाद, 6 मई को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया और इसे 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया।
तमिलनाडु: थलापति विजय की पार्टी TVK का चुनावी मैदान में बड़ा शक्ति प्रदर्शन
तमिलनाडु की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों—मधुरांतकम और धारापुरम—पर उपचुनाव हो रहे हैं। इन सीटों पर अभिनेता से राजनेता बने और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख सी. जोसफ विजय ने पिछले चार दिनों तक ताबड़तोड़ और आक्रामक चुनाव प्रचार किया है। विजय की पार्टी के लिए यह चुनावी मुकाबला काफी अहम है, क्योंकि यह उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा।
यह मुकाबला मुख्य रूप से चार कोणीय (four-cornered) नजर आ रहा है, जिसमें TVK, DMK, AIADMK और CPI के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। ये दोनों सीटें AIADMK के उन विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं, जिन्होंने चुनाव जीतने के कुछ ही हफ्तों बाद पाला बदलकर विजय का दामन थाम लिया था। खास बात यह है कि वही दोनों नेता—मधुरांतकम से मरागाथम कुमारावेल और धारापुरम से पी. सत्याभामा—अब TVK के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।
द्रमुक (DMK) इस उपचुनाव में उस बड़े गठबंधन के बिना उतर रही है, जो विधानसभा चुनाव में उसके साथ था। कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML जैसे दल अब विजय के राजनीतिक खेमे में शामिल हो चुके हैं, जबकि वामदल (CPI और CPI-M) अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। मधुरांतकम में 2,12,639 मतदाता और धारापुरम में 2,22,406 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
पुडुचेरी और असम में भी सियासी पारा हाई
पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की बात करें तो यहां चार महीने पुरानी एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के लिए यह लोकप्रियता का लिटमस टेस्ट है। हालांकि मैदान में कुल 11 उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला सत्ताधारी AINRC-नेतृत्व वाले NDA, कांग्रेस और उसकी पूर्व सहयोगी DMK के बीच त्रिकोणीय नजर आ रहा है।
उधर, असम की बहुचर्चित नगांव लोकसभा सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यह एक मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां बीजेपी अपने आधार को और अधिक विस्तार देने की जुगत में है, वहीं कांग्रेस अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। इस सीट पर उपचुनाव तत्कालीन सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के कांग्रेस छोड़कर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल होने के कारण जरूरी हुआ था।
चुनावी सरगर्मी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
तमाम सीटों पर हो रहे इन उपचुनावों के नतीजे आने वाले समय में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डालेंगे। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए सभी संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बलों की तैनाती सहित सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। अब देखना यह होगा कि मतदाता किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधते हैं, जिसका खुलासा आगामी 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद होगा।