बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर सहित पूरे जिले में छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (सीजी सेट-2026) रविवार को पूरी पारदर्शिता और कड़े प्रशासनिक पहरे के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला, हालांकि कई केंद्रों पर अनुपस्थिति का आंकड़ा भी दर्ज किया गया। जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के संयुक्त प्रयासों से परीक्षा प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी कर ली गई।
कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुआ आयोजन
परीक्षा की शुचिता और गरिमा को बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। कलेक्टर आकाश छिकारा के प्रत्यक्ष नेतृत्व में बस्तर जिले के सभी 49 परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन ने बेहद सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे।
नियमों के मुताबिक, सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले ही अपने-अपने केंद्रों पर पहुंचना अनिवार्य किया गया था। मुख्य द्वार पर ही मेटल डिटेक्टर के जरिए प्रत्येक छात्र की गहन तलाशी ली गई। इसके बाद वीक्षकों ने प्रवेश पत्र और मूल पहचान पत्रों का बारीकी से सत्यापन किया। जिन अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्रों में फोटो स्पष्ट नहीं थी, उनसे दो नई पासपोर्ट साइज तस्वीरें जमा कराने के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी गई।
दोनों पालियों के आधिकारिक आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बस्तर जिले में सीजी सेट परीक्षा के लिए दोनों पालियों में कुल 9,777 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 73 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और प्रोफेसर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
- प्रथम पाली: कुल पंजीकृत 9,777 अभ्यर्थियों में से 7,161 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 2,616 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
- द्वितीय पाली: इस पाली में 7,131 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया, वहीं 2,646 अभ्यर्थी अनुपस्थित पाए गए।
सख्त ड्रेस कोड और पाबंदियों का पालन
परीक्षा हॉल में नकल या किसी भी तरह के अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने बेहद कड़ा ड्रेस कोड लागू किया था। इसके तहत परीक्षार्थियों को खासी पाबंदियों का सामना करना पड़ा:
- परीक्षार्थी केवल हल्के रंग की हाफ टी-शर्ट और साधारण कपड़े पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचे।
- पैरों में जूते-मोजे पहनने की अनुमति नहीं थी, छात्र केवल चप्पल पहनकर ही अंदर जा सके।
- बेल्ट, घड़ी, पर्स, धूप का चश्मा, टोपी, स्कार्फ और किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (मोबाइल, ब्लूटूथ आदि) पर पूर्ण प्रतिबंध था।
- महिला अभ्यर्थियों के लिए आभूषण पहनकर आने पर भी रोक रही, ताकि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि की गुंजाइश न बचे।
प्रशासनिक टीम की सक्रियता से सफल रही व्यवस्था
परीक्षा प्रक्रिया को बिना किसी व्यवधान के सुचारू रूप से संचालित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम लगातार मैदान में डटी रही। नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर कृष्ण कुमार जायसवाल, शासकीय काकतीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य व समन्वयक डॉ. अनिल श्रीवास्तव और सहायक समन्वयक डॉ. अजय सिंह ठाकुर की पूरी टीम ने परीक्षा केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया। अधिकारियों की इस सक्रियता का ही नतीजा रहा कि बस्तर के सभी 49 केंद्रों पर परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में संपन्न हुई।
भविष्य की राह हुई आसान
राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने की पात्रता हासिल करने के लिए यह परीक्षा बेहद अहम मानी जाती है। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का परीक्षा में शामिल होना यह दर्शाता है कि यहां के युवा उच्च शिक्षा और अपने उज्ज्वल भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं। परीक्षा संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों को इसकी उत्तरकुंजी (Answer Key) और परिणामों का बेसब्री से इंतजार रहेगा।