उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। चहनिया विकास खंड के अंतर्गत आने वाले कैलावर गांव में तैनात एक लेखपाल और ग्रामीण के बीच का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर तीखी नोकझोंक और बदसलूकी की बात सामने आ रही है। इस घटना ने एक बार फिर मैदानी स्तर पर अधिकारियों और आम जनता के बीच के रिश्तों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, न्याय की गुहार
वायरल वीडियो सामने आने के बाद कैलावर गांव के निवासी सुग्रीव कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर सुग्रीव कुमार ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को एक शिकायती पत्र सौंपा और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यह पूरा विवाद लगभग चार दिन पुराना है जब गांव में भूमि की पैमाइश (नापजोख) का काम चल रहा था। सुग्रीव कुमार का आरोप है कि गांव में चकरोड और नवीन परती की बहुमूल्य भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। इस जमीन पर शौचालय का निर्माण करने के साथ-साथ करकट, ईंट, और पत्थर जैसी निर्माण सामग्री रखकर रास्ते को बाधित किया गया है।
एसडीएम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस अवैध कब्जे और अतिक्रमण को हटवाने के लिए स्थानीय स्तर से लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के न्यायालय तक कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीण अपनी समस्या लेकर मौके पर पहुंचे थे। सुग्रीव का आरोप है कि जब उन्होंने प्रशासनिक नियमों के तहत जमीन को खाली कराने की बात कही, तो वहां मौजूद लेखपाल ने उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।
लेखपाल रंजना सिंह ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इस पूरे मामले में जब दूसरे पक्ष यानी आरोपी लेखपाल रंजना सिंह से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। लेखपाल का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, वह पूरी तरह से भ्रामक है और उसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
रंजना सिंह का दावा है कि वायरल वीडियो में केवल आधे-अधूरे हिस्से को ही दिखाया जा रहा है, जबकि घटना की शुरुआत का शुरुआती क्रम जानबूझकर छुपाया गया है। उनके अनुसार, पैमाइश के दौरान सबसे पहले ग्रामीण पक्ष की तरफ से ही उनके साथ अभद्रता की गई थी और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। लेखपाल का यह भी आरोप है कि उनकी छवि को धूमिल करने और प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने के इरादे से यह सुनियोजित साजिश रची गई है।
जांच के घेरे में प्रशासनिक और ग्रामीण विवाद
एक तरफ जहां ग्रामीण अपनी जमीनी समस्याओं और कथित दुर्व्यवहार को लेकर न्याय की आस लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय लेखपाल इसे अपनी प्रतिष्ठा पर हमला और साजिश करार दे रही हैं। इस दोतरफा बयानबाजी और आरोपों के दौर ने स्थानीय प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
- मुख्य विवाद: कैलावर गांव में भूमि पैमाइश और चकरोड पर अवैध कब्जा।
- ग्रामीणों का दावा: लेखपाल ने पैमाइश के दौरान की बदसलूकी, एसडीएम के यहां पहले भी की गई थी शिकायत।
- लेखपाल का पक्ष: वीडियो एडिटेड और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, ग्रामीणों ने पहले बदतमीजी की थी।
- वर्तमान स्थिति: मामला अधिकारियों की संज्ञान में है और इसकी आंतरिक जांच की जा रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल, यह पूरा प्रकरण जांच के दायरे में आ चुका है। कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण की शिकायत पर उच्च अधिकारियों ने मामले की सुक्ष्मता से पड़ताल करने का आश्वासन दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक जांच में वीडियो की सच्चाई और पैमाइश के दौरान हुई असल घटनाओं पर से पर्दा कब उठता है। क्या यह मामला केवल एक गलतफहमी का नतीजा है या इसके पीछे कोई गहरी प्रशासनिक लापरवाही छिपी है, इसका फैसला आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।