पूर्वांचल के चंदौली जिले में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय आस्था के केंद्रों को नया जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। चहनियां ब्लॉक के मथेला गांव में स्थित सुप्रसिद्ध और प्राचीन मां काली मंदिर का जल्द ही भव्य कायाकल्प होने जा रहा है। लंबे समय से जर्जर हाल में मौजूद इस मंदिर परिसर की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है।
राज्यसभा सांसद साधना सिंह की पहल रंग लाई
स्थानीय ग्रामीणों की सालों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा सांसद साधना सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री को पत्र भेजकर इस प्राचीन धरोहर के जीर्णोद्धार का अनुरोध किया था। सांसद की इस सक्रिय पहल के बाद अब मंदिर के सुंदरीकरण और सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक बजट को मंजूरी मिल चुकी है।
हाल ही में सांसद प्रतिनिधि अतुल सिंह प्रिंस ने दिल्ली जाकर राज्यसभा सांसद साधना सिंह से मुलाकात की थी और क्षेत्रवासियों का मांग पत्र सौंपा था। सांसद ने इसे क्षेत्र की धार्मिक भावना और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा बेहद जरूरी मुद्दा मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
"मथेला का मां काली मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि चंदौली और आसपास के हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। इसके जीर्णोद्धार से क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और भक्तों को बेहतर माहौल मिलेगा।"
श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं
हर साल नवरात्रि और वार्षिक मेलों के दौरान मथेला मंदिर में हजारों भक्त दर्शन-पूजन के लिए जुटते हैं। परिसर की जर्जर स्थिति के कारण दूर-दराज से आने वाले भक्तों को काफी असुविधा झेलनी पड़ती थी। अब नए कायाकल्प प्लान के तहत परिसर में निम्नलिखित विकास कार्य कराए जाएंगे:
- नया आधुनिक बारात घर: स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के मांगलिक व सामाजिक कार्यों के लिए परिसर में बारात घर का निर्माण।
- परिसर का सुंदरीकरण: मंदिर के मुख्य ढांचे का जीर्णोद्धार और परिसर की आकर्षक लैंडस्केपिंग।
- पेयजल व शेड व्यवस्था: कतार में खड़े होने वाले भक्तों के लिए शुद्ध पेयजल और धूप-बारिश से बचाव हेतु शेड।
- प्रकाश और स्वच्छता: पूरे मंदिर क्षेत्र में हाई-मास्ट लाइटें और आधुनिक शौचालयों का निर्माण।
क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर
मंदिर के कायाकल्प की खबर मिलते ही मथेला गांव और पूरे चहनियां ब्लॉक में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का जीर्णोद्धार होने से न केवल श्रद्धालुओं की राह आसान होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जीर्णोद्धार का काम जल्द ही धरातल पर शुरू होने जा रहा है।