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चंदौली के पड़ाव चौराहे पर नो एंट्री खुलते ही रेंगने लगता है पूर्वांचल, रोज की इस मुसीबत से कब मिलेगी राहत?

चंदौली के पड़ाव चौराहे पर नो एंट्री खुलते ही रेंगने लगता है पूर्वांचल, रोज की इस मुसीबत से कब मिलेगी राहत?

पूर्वांचल के सबसे व्यस्त और संवेदनशील तिराहों में शुमार चंदौली जिले का पड़ाव चौराहा इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और भारी ट्रैफिक के कारण रोज एक बड़े संकट से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि दिन ढलते ही यहां वाहनों का ऐसा रेला उमड़ता है कि आम जनता का जीवन बेपटरी हो जाता है। खासकर, भारी वाहनों के लिए 'नो एंट्री' के कपाट खुलते ही इस पूरे इलाके में भीषण जाम लग जाता है, जिससे गुजरने वाले हर मुसाफिर की सांसें थम जाती हैं।

सकरी पुलिया और ओवरब्रिज बना जी का जंजाल

पढ़ाव रेलवे ओवरब्रिज और इसके आसपास की सड़क की बनावट इस कदर है कि वह मौजूदा ट्रैफिक के दबाव को झेलने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रही है। जानकारों का मानना है कि इस मार्ग पर पुलिया बेहद सकरी है। जब एक साथ कई भारी वाहन और कारें इस तंग हिस्से से गुजरने की कोशिश करती हैं, तो बोटलनेक (Bottle-neck) की स्थिति पैदा हो जाती है।

रोज शाम को लगने वाला यह जाम केवल समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों जिंदगियों के लिए एक अदृश्य खतरे की घंटी भी है। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का कहना है कि शाम ढलते ही यहां स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।

पूर्वांचल के गेटवे पर क्यों बन रही है ऐसी स्थिति?

  • भारी वाहनों का दबाव: वाराणसी और बिहार को जोड़ने वाले इस अहम मार्ग पर दिनभर पाबंदी के बाद जैसे ही नो एंट्री खुलती है, ट्रक और कंटेनर बेतरतीब ढंग से आगे बढ़ने की होड़ में लग जाते हैं।
  • यातायात प्रबंधन की कमी: चौराहे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की सीमित संख्या और बेपरवाह वाहन चालकों के कारण नियमों की धज्जियां उड़ती हैं।
  • सड़कों पर अवैध कब्जा: सड़क किनारे खड़े होने वाले वाहन और अतिक्रमण इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना देते हैं।

हादसों का सबब बनता जा रहा है यह सफर

इस भीषण जाम के बीच सबसे डरावनी बात यह है कि यहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। दोपहिया वाहन चालक इस जाम के बीच से निकलने की कोशिश में अक्सर ट्रकों की चपेट में आ जाते हैं। कई बार एंबुलेंस भी इस जाम में फंस जाती है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

एक स्थानीय नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "शाम के 4 बजे से रात के 9 बजे तक इस रास्ते से गुजरना किसी जंग जीतने जैसा है। बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं तो वे इसी जाम में फंस जाते हैं। प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।"

क्या हो सकता है इस समस्या का स्थाई समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रूट पर ट्रैफिक को सुचारू रखना है, तो कुछ कड़े कदम उठाने ही होंगे। इनमें निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

  • नो एंट्री खुलने के समय में बदलाव किया जाए या चरणों में भारी वाहनों को छोड़ा जाए।
  • पढ़ाव ओवरब्रिज और सकरी पुलिया के चौड़ीकरण के लिए तत्काल प्रभाव से प्रोजेक्ट तैयार हो।
  • चौराहे पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल और पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की जाए।
  • वेंडर ज़ोन बनाकर सड़क किनारे के अतिक्रमण को पूरी तरह हटाया जाए।

फिलहाल, चंदौली का यह हिस्सा सुधार की बाट जोह रहा है। जब तक कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाता, तब तक यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को रोजाना इस नर्क जैसे जाम से दो-चार होना ही पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. चंदौली के पड़ाव चौराहे पर अक्सर जाम क्यों लगता है?

पढ़ाव चौराहे पर रेलवे ओवरब्रिज और पुलिया के सकरी होने के साथ-साथ 'नो एंट्री' खुलने के बाद एक साथ भारी वाहनों के आने से भीषण जाम लगता है।

2. क्या इस जाम से दुर्घटनाओं का खतरा रहता है?

हाँ, सकरी सड़क और बेतरतीब ट्रैफिक के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिससे दोपहिया चालकों और पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा खतरा होता है।

3. इस समस्या से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा है?

स्थानीय लोग लगातार ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन से इस पर सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि पूर्वांचल के इस व्यस्त मार्ग पर आवागमन को सुरक्षित बनाया जा सके।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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