महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। मामूली सी रकम और आपसी विवाद इंसान को किस हद तक अंधा बना सकता है, इसकी बानगी भद्रावती शहर में देखने को मिली। महज 16 हजार रुपए की मजदूरी के बकाये को लेकर हुए विवाद में एक 40 वर्षीय व्यक्ति की सरेआम धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई। इस दु Pahle हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागमंदिर चौक पर सुबह-सुबह हुआ खूनी हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना चंद्रपुर जिले के भद्रावती शहर के व्यस्त नागमंदिर चौक पर हुई। बुधवार सुबह करीब 7.30 बजे का समय था, जब हर कोई अपने दैनिक कार्यों और कामकाज के लिए घर से निकल रहा था। इसी दौरान 40 वर्षीय उमदेव भावराव मेश्राम अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर काम के सिलसिले में निकले थे।
जैसे ही उमदेव नागमंदिर चौक के पास पहुंचे, घात लगाकर बैठे आरोपियों ने उनकी मोटरसाइकिल का रास्ता रोक लिया। शुरुआती बहसों के बाद बात इतनी बढ़ गई कि आरोपियों ने सरेआम धारदार हथियारों से उमदेव पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए। मुख्य आरोपी ने उमदेव की गर्दन पर कई गंभीर वार किए, जिससे वे लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उमदेव को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सुबह-सुबह हुई इस दुस्साहसिक वारदात से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग सहम गए।
दो साल से चल रहा था 16 हजार रुपए का विवाद
पुलिस की शुरुआती जांच और खुलासों के मुताबिक, इस खूनी संघर्ष की जड़ें बहुत गहरी थीं और यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ था। मृतक उमदेव मेश्राम के पास मुख्य आरोपी श्रेयस पुल्ली कभी मजदूरी का काम किया करता था। काम पूरा होने के बाद श्रेयस को अपनी मजदूरी के 16 हजार रुपए उमदेव से लेने थे।
बताया जा रहा है कि उमदेव लगातार पैसे देने में टालमटोल कर रहे थे और बाद में भुगतान करने की बात कह रहे थे। यह छोटी सी रकम दोनों पक्षों के बीच विवाद का बड़ा कारण बन गई और यह रंजिश पिछले करीब दो वर्षों से सुलग रही थी। वक्त के साथ यह विवाद रंजिश में बदल गया, जिसने अंततः एक जान ले ली।
हत्या से दो दिन पहले दी गई थी जान से मारने की धमकी
मामले की गहराई से छानबीन कर रही पुलिस को यह भी पता चला है कि इस खूनी वारदात से महज दो दिन पहले भी मुख्य आरोपी श्रेयस पुल्ली मृतक उमदेव के घर पहुंचा था। वहां उसने एक बार फिर अपनी बकाया मजدूरी के पैसे की मांग की थी।
सूत्रों और पुलिस बयानों के अनुसार, उस दौरान भी पैसों के लेनदेन को लेकर तीखी नोकझोंक हुई थी। गुस्से में आकर आरोपी ने उमदेव को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी भी दी थी। हालांकि, किसी ने यह नहीं सोचा था कि महज 48 घंटे के भीतर यह धमकी एक खौफनाक हकीकत में बदल जाएगी और आरोपी इस खूनी अंजाम तक पहुंच जाएगा।
कौन थे मृतक उमदेव मेश्राम?
मृतक उमदेव भावराव मेश्राम मूल रूप से देऊरवाड़ा गांव के रहने वाले थे। जीविकोपार्जन के सिलसिले में वे वर्तमान में भद्रावती के शिवाजीनगर इलाके में प्रज्ञा वाचनालय के पास रह रहे थे। वे रोजाना की तरह बुधवार की सुबह भी अपने काम पर जाने के लिए निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी दिन साबित होगा। उनकी इस तरह अचानक हुई मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव तथा स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही भद्रावती पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तुरंत कई विशेष टीमों का गठन किया गया। पुलिस उपअधीक्षक ईश्वर कातकाडे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी संतोष बादनकर और प्रभारी थानेदार सचिन खेत्रे के मार्गदर्शन में पुलिस दल ने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए।
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार होने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उनकी एक नहीं चली। पुलिस टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय सूचना के आधार पर मुख्य आरोपी श्रेयस पुल्ली का पीछा किया और घटना के कुछ ही घंटों के भीतर उसे धर दबोचा।
मुख्य आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने इस मामले में संलिप्त अन्य दो आरोपियों—वैभव पुल्ली और प्रकाश अण्णा पुल्ली को भी हिरासत में ले लिया है। पुलिस तीनों आरोपियों से लगातार कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हत्याकांड में और कौन-कौन लोग शामिल थे या क्या इसमें किसी और की भी साजिश थी।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
इस सनसनीखेज वारदात के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी रोष और डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि विवाद दो साल से चल रहा था और धमकी भी दी जा चुकी थी, तो समय रहते इसे रोका जा सकता था। दिन दहाड़े एक व्यस्त चौक पर इस प्रकार सरेआम हत्या होना पुलिस गश्त और कानून व्यवस्था की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
बहरहाल, पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि संवादहीनता और बढ़ता हुआ गुस्सा समाज के लिए कितना घातक सिद्ध हो सकता है।