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वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन: चेतनारायण सिंह ने ठोकी ताल, ओल्ड पेंशन और वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दों पर सियासी दलों को घेरा

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन: चेतनारायण सिंह ने ठोकी ताल, ओल्ड पेंशन और वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दों पर सियासी दलों को घेरा

उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षक संगठनों के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आगामी चुनावों के मद्देनजर वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिष्ठित अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। पर्चा दाखिल करने के तुरंत बाद उन्होंने जिस आक्रामक और बेबाक अंदाज में राजनीतिक दलों पर निशाना साधा, उसने चुनावी सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है।

राजनीतिक दलों पर सीधा हमला: संगठनों को खत्म करने की साजिश

नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए चेतनारायण सिंह ने राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि आज मुख्यधारा के राजनीतिक दल शिक्षक संगठनों के समानांतर अपने खुद के प्रत्याशी मैदान में उतार रहे हैं। उनके अनुसार, यह इन स्वतंत्र संगठनों के वजूद को मिटाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे राजनीतिक दलों ने शिक्षक संगठनों को पूरी तरह से समाप्त करने का व्रत ले लिया हो। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षक समाज अपनी वैचारिक स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा करना अच्छी तरह जानता है और इस तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली मुख्य मुद्दा

चेतनारायण सिंह के चुनावी एजेंडे में सबसे ऊपर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) की बहाली का मुद्दा छाया रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक लंबे समय से ओपीएस की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकारें इस पर गंभीर नजर नहीं आ रही हैं।

क्या हैं मुख्य मांगें?

  • नई पेंशन योजना (NPS) को पूरी तरह से समाप्त करना।
  • शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की तत्काल बहाली।
  • सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।

उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन केवल एक आर्थिक लाभ का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों शिक्षकों की सेवानिवृत्ति के बाद की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। शिक्षक वर्ग इस मोर्चे पर पीछे हटने वाला नहीं है।

स्ववित्तपोषित और वित्तविहीन शिक्षकों की दुर्दशा पर चिंता

केवल सरकारी या सहायताप्राप्त संस्थानों तक सीमित न रहते हुए, चेतनारायण सिंह ने स्ववित्तपोषित और वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की दयनीय दशाओं का भी पुरजोर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों का शोषण लंबे समय से हो रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि इन शिक्षकों को भी अन्य नियमित शिक्षकों की भांति न्यूनतम वेतनमान और यात्रा भत्ता (TA) जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। वित्तविहीन शिक्षकों की अनिश्चित सेवा शर्तें और उनके बेहद कम पारिश्रमिक में सुधार लाना शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में पहला कदम होना चाहिए।

मदरसा और संस्कृत शिक्षकों के लिए समान सेवा शर्तें

शिक्षा क्षेत्र की विसंगतियों पर बात करते हुए उन्होंने मदरसा और संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी जिक्र किया। उन्होंने मांग की कि मदरसा और संस्कृत शिक्षकों को अनुदानित महाविद्यालयों, माध्यमिक और बेसिक विद्यालयों के शिक्षकों के बिल्कुल समान वेतनमान और सेवा शर्तें मिलनी चाहिए।

उनका तर्क था कि शिक्षा की रीढ़ को मजबूत करने वाले हर शिक्षक को, चाहे वह किसी भी बोर्ड या पद्धति के अंतर्गत पढ़ा रहा हो, समान अधिकार और सुविधाएं मिलने से ही शिक्षा व्यवस्था में समानता आएगी। वेतन और सुविधाओं के मामले में यह भेदभाव पूरी तरह समाप्त होना चाहिए।

वंचित वर्ग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

सिर्फ शिक्षकों के व्यक्तिगत हितों तक ही नहीं, बल्कि चेतनारायण सिंह ने समाज के गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल अपने वेतन और भत्तों की लड़ाई लड़ना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे पिछले पायदान पर खड़े वंचित वर्ग के बच्चों तक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा पहुंचाना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि यदि उन्हें शिक्षक मतदाताओं का दोबारा आशीर्वाद मिलता है, तो वे सदन के भीतर और बाहर शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष जारी रखेंगे। उनके इस आक्रामक और मुद्दों पर आधारित तेवर ने वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन के रण को बेहद दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अन्य दल और प्रत्याशी इस चुनौती का किस प्रकार सामना करते हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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