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छत्रपति संभाजीनगर में भावुक विदाई: मनपा स्कूल की प्रिंसिपल खान रईसा बेगम हुईं रिटायर

छत्रपति संभाजीनगर में भावुक विदाई: मनपा स्कूल की प्रिंसिपल खान रईसा बेगम हुईं रिटायर

शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठा, समर्पण और अटूट लगन की जब भी मिसाल दी जाएगी, तब छत्रपति संभाजीनगर के किराडपुरा मनपा विद्यालय की मुख्याध्यापिका और विस्तार अधिकारी खान रईसा बेगम का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाएगा। लंबे समय तक अपनी सेवा देने के बाद जब खान रईसा बेगम सेवानिवृत्त हुईं, तो पूरा माहौल भावनाओं से भर गया। उनके विदाई समारोह में सिर्फ अधिकारी और राजनेता ही नहीं, बल्कि उनके पढ़ाए हुए छात्र और सहकर्मी भी मौजूद थे, जिनकी आंखें नम थीं और लबों पर उनके द्वारा दिए गए संस्कारों की दास्तान थी। यह विदाई समारोह महज एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक ऐसी शिक्षिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर था, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सरकारी स्कूल के बच्चों के भविष्य को संवारने में झोंक दी।

मौलाना अबुल कलाम आजाद अनुसंधान केंद्र में सजा भव्य विदाई का मंच

शहर के प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम आजाद अनुसंधान केंद्र में आयोजित इस विदाई समारोह की चमक और वहां मौजूद लोगों की भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि खान रईसा बेगम ने अपने सेवाकाल में समाज और शिक्षा जगत पर कितनी गहरी छाप छोड़ी है। कार्यक्रम की शुरुआत बेहद सादगी के साथ हुई, लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, वक्ताओं के भाषणों और छात्रों के संस्मरणों ने पूरे माहौल को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। समारोह में शिरकत करने वाले हर शख्स की जुबान पर रईसा बेगम के कार्यकुशलता और उनके नेतृत्व की तारीफ थी।

इस गरिमामयी अवसर पर शहर के महापौर समीर राजूरकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने खान रईसा बेगम के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारी को नौकरी नहीं बल्कि एक पवित्र कर्तव्य माना। महापौर ने कहा, "खान रईसा बेगम ने अपने सेवाकाल में पूरी निष्ठा और समर्पण की भावना से कार्य किया है। मनपा विद्यालय के विकास के प्रति उनकी लगन उनके द्वारा किए गए कार्यों में साफ झलकती है। उनके कार्य आने वाली पीढ़ी के शिक्षकों के लिए एक आदर्श हैं, जिन्हें हर किसी को अपनाना चाहिए।"

किराडपुरा विद्यालय के कायाकल्प की अनकही कहानी

किसी भी सरकारी स्कूल की तस्वीर बदलना आसान काम नहीं होता, लेकिन किराडपुरा महानगरपालिका क्रमांक-1 विद्यालय ने इस बात को साबित कर दिखाया कि अगर नीयत साफ हो और नेतृत्व मजबूत हो, तो बदलाव संभव है। महापौर ने विद्यालय के विकास में खान रईसा बेगम के अमूल्य योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे रईसा बेगम ने न केवल स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाया, बल्कि वहां पढ़ने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भी दिन-रात एक कर दिए।

इस दौरान प्रशासनिक सहयोग का जिक्र करते हुए महापौर ने तत्कालीन उप आयुक्त अय्यूब खान के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर के प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षकों के बीच जो तालमेल बैठा, उसी का नतीजा है कि आज यह विद्यालय क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है। विद्यालय के भौतिक स्वरूप से लेकर बच्चों की पठन-पाठन की शैली तक, हर चीज में रईसा बेगम का विजन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

'ऐसे समर्पित शिक्षक हर महानगरपालिका में होने चाहिए'

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समर्पित नेतृत्व की वकालत की। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वे आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, तब महानगरपालिका विद्यालयों के उत्थान के लिए कई प्रयास किए गए थे, और उन प्रयासों को जमीन पर उतारने में खान रईसा बेगम जैसी शख्सियतों ने अहम भूमिका निभाई।

जी. श्रीकांत ने जोर देकर कहा, "खान रईसा बेगम जैसे समर्पित शिक्षक और मुख्याध्यापक प्रत्येक महानगरपालिका तथा सरकारी विद्यालय में होने चाहिए। किराडपुरा विद्यालय का आज जो स्वरूप नजर आता है, उसे बदलने में रईसा बेगम की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी रही है। उनके इन तमाम प्रयासों और सफलता का पूरा श्रेय उन्हीं को जाता है।"

भविष्य के शिक्षकों के लिए एक जीवंत मार्गदर्शिका

छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने भी समारोह में अपने विचार साझा किए। हालांकि उन्हें खान रईसा बेगम के साथ काम करने का बहुत लंबा समय नहीं मिला, लेकिन उनके जाने के बाद जब उन्होंने उनके पिछले कार्यों और फाइलों का अध्ययन किया, तो उन्हें रईसा बेगम की कार्यशैली की गहराई का अंदाजा हुआ।

आयुक्त अमोल येडगे ने कहा कि खान रईसा बेगम ने अपने सेवाकाल के दौरान जो मानक स्थापित किए हैं, वे आने वाले समय में नए शिक्षकों और मुख्याध्यापकों के लिए एक कंपास (दिशसूचक) का काम करेंगे। उनके द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलकर ही कोई भी शिक्षक अपने विद्यालय और बच्चों को ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

जब विद्यार्थियों और सहकर्मियों ने साझा कीं अपनी यादें

समारोह का सबसे भावुक पल वह था जब मंच पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों और सहकर्मियों ने खान रईसा बेगम के साथ बिताए पलों को याद करना शुरू किया। कई छात्र अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने बताया कि कैसे रईसा बेगम सिर्फ एक प्रधानाध्यापिका नहीं थीं, बल्कि वे बच्चों के लिए एक अभिभावक की तरह थीं, जो हर मुसीबत में उनके साथ खड़ी रहती थीं।

सहकर्मियों ने बताया कि वे काम के प्रति कितनी सख्त थीं, लेकिन उतनी ही नरम दिल और मददगार भी थीं। उनकी यही खूबी उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी। शिक्षकों ने कहा कि स्कूल का हर एक कोना, हर एक कमरा आज भी उनकी मौजूदगी का अहसास कराता है।

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी और भव्य समापन

इस विदाई समारोह में शहर के कई जाने-माने चेहरे और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्थायी समिति सभापति अनिल मकरीये, विपक्ष के नेता अब्दुल समीर साजिद, नगरसेवक वसीम अहमद, अब्दुल्ला हिलाबी, सोहेल खान, और नगरसेविका तरन्नुम अकील अहमद ने भी शिरकत की। इसके अलावा जालना महानगरपालिका की उप आयुक्त नंदा गायकवाड सहित प्रशासन के कई बड़े अधिकारी और भारी संख्या में शिक्षक व छात्र इस ऐतिहासिक विदाई के गवाह बने।

कार्यक्रम के अंत में खान रईसा बेगम और अय्यूब खान ने मंच से सभी उपस्थित अतिथियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अपने सहकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। जैसे ही रईसा बेगम ने अपनी बात समाप्त की, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नम आंखों और भारी मन से दी गई यह विदाई इस बात का सबूत है कि इंसान अपने ओहदे से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों और इंसानी रिश्तों से याद रखा जाता है। खान रईसा बेगम का यह सफर भले ही आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया हो, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर के शैक्षणिक इतिहास में उनका यह अध्याय हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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