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छत्रपती संभाजीनगर दर्दनाक हादसा: डॉक्टर बनने का सपना, मां-बाप में सुलह और पहाड़ से कूदकर जान देने की पूरी सच्चाई

छत्रपती संभाजीनगर दर्दनाक हादसा: डॉक्टर बनने का सपना, मां-बाप में सुलह और पहाड़ से कूदकर जान देने की पूरी सच्चाई

महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर (पूर्व औरंगाबाद) से एक ऐसा खौफनाक और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। खुवड़िया पहाड़ से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत का यह मामला अब देश भर में चर्चा का विषय बन चुका है। शुरुआत में इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें और दावे तैर रहे थे, लेकिन पुलिस की विस्तृत जांच, चश्मदीदों के बयानों और फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम की एक अलग ही तस्वीर पेश की है।

डॉक्टर बनने का सपना और पारिवारिक कलह

इस पूरे हादसे के केंद्र में 19 वर्षीय कुणाल चांदगुडे था। कुणाल पढ़ाई में बेहद होनहार था और उसने इसी साल सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उसके करीबियों और पड़ोसियों के मुताबिक, कुणाल का एक ही सपना था—बड़ा होकर एमबीबीएस (डॉक्टर) बनना। लेकिन घर के भीतर चल रहे पारिवारिक तनाव ने इस युवा छात्र की जिंदगी को एक अलग ही मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था।

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कुणाल के माता-पिता, मुरलीधर चांदगुडे और संगीता के बीच पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था। संगीता के मायके वालों का दावा है कि यह विवाद संपत्ति और आपसी तनाव से जुड़ा था। वहीं, मुरलीधर की बहन शोभा राजेंद्र मस्के का कहना है कि करीब 22 साल पहले मुरलीधर और संगीता ने लव मैरिज की थी, जिसके बाद से परिवार में आंतरिक कलह और दूरियां बनी हुई थीं। हालांकि, कुणाल अपने माता-पिता के बीच सुलह कराना चाहता था और परिवार को एक सूत्र में बांधना उसकी सबसे बड़ी चाहत थी।

घटना वाले दिन क्या हुआ था? पुलिस और प्रशासन का खुलासा

डीसीपी जोन-2, छत्रपती संभाजीनगर, पंकज अतुलकर ने पूरी घटना का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। उनके मुताबिक:

  • सुबह 8:00 बजे: कुणाल अपने घर से आकाश इंस्टीट्यूट के लिए निकला था, लेकिन वह क्लास नहीं पहुंचा।
  • सुबह 9:10 बजे: संस्थान की तरफ से कुणाल के न पहुंचने पर उसकी मां के मोबाइल पर मैसेज भेजा गया।
  • सुबह 10:00 से 10:30 बजे के बीच: कुणाल के खुवड़िया पहाड़ पर होने की खबर मिली, जिसके बाद परिजनों और पुलिस को सूचना दी गई।
  • सुबह 11:30 बजे: फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर बुलाया गया।

फायर ब्रिगेड अधिकारी सैयद सईद ने बताया कि जब रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तो कुणाल पहाड़ी के ऊपर लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। नीचे सुरक्षा के लिए जाल भी बिछाया गया था, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई।

बचाने की कोशिश में गई पिता की जान, फिर मां ने उठाया खौफनाक कदम

कुणाल को आत्महत्या के इरादे से पहाड़ पर चढ़े देख उसे समझाने के लिए उसके माता-पिता और अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, पिता मुरलीधर अपने बेटे के बेहद करीब पहुंचे और उसे संभालने के लिए उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने कुणाल का हाथ पकड़ा, दोनों का संतुलन बिगड़ गया और पिता-पुत्र दोनों करीब 300 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरे। पथरीली सतह पर गिरने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

इस खौफनाक मंज़र को अपनी आंखों के सामने देखने के बाद कुणाल की मां संगीता सदमे में आ गईं। पति और बेटे की मौत के महज कुछ ही सेकंड बाद संगीता ने भी पहाड़ से छलांग लगा दी। नीचे गिरने से उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई। दोपहर करीब ढाई बजे तीनों शवों को घाटी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।

अनोखा पहलू: वफादार पालतू कुत्ते 'शेरू' की दास्तान

इस दुखद घटना के बाद इस परिवार से जुड़ी एक और बात सामने आई जिसने लोगों की आंखें नम कर दीं। परिवार के तीनों सदस्यों की मौत के बाद उनका पालतू कुत्ता 'शेरू' दो दिनों तक घर के अंदर अकेला बंद रहा। पड़ोसियों ने किसी तरह खिड़की या दरवाजे से उसे खाना-पानी पहुंचाया। घर के बाहर जैसे ही किसी की आहट होती, शेरू दौड़कर दरवाजे के पास आ जाता—शायद उसे अब भी अपने मालिकों के लौटने का इंतजार था।

दो दिन बाद 'पेट एनिमल लवर एसोसिएशन' की टीम मौके पर पहुंची और शेरू को सुरक्षित बाहर निकाला। संगठन से जुड़े बारेल सांचीस ने अपील की है कि शेरू को लंबे समय तक शेल्टर होम में रखना ठीक नहीं होगा, इसलिए कोई संवेदनशील परिवार आगे आए और उसे गोद लेकर नया आशियाना दे।

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अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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