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सीएम योगी को बच्चों ने भेजे अनोखे खत, स्टडी टेबल पाकर यूं जताया आभार

सीएम योगी को बच्चों ने भेजे अनोखे खत, स्टडी टेबल पाकर यूं जताया आभार

उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में इन दिनों एक ऐसी तस्वीर देखने को मिल रही है जो किसी के भी चेहरे पर मुस्कान ले आए। शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की एक ऐसी बयार बही है, जिसने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सपनों को नए पंख दे दिए हैं। हाल ही में इस मंडल के चार जिलों में 'शिक्षा की उड़ान' अभियान के तहत एक लाख से अधिक बच्चों को जब स्टडी टेबल सौंपी गईं, तो बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस छोटी सी पहल ने बच्चों के जीवन में जो सकारात्मक बदलाव लाया है, उसका इजहार उन्होंने बेहद ही अनोखे और मासूम अंदाज में किया है।

फूलों से सजे पत्र और मुख्यमंत्री का जीवंत चित्र

छोटे बच्चों की कल्पना और भावनाओं की कोई सीमा नहीं होती। जब उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए एक व्यवस्थित स्टडी टेबल मिली, तो उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना आभार जताने के लिए अपनी कला और भावनाओं का खुलकर इस्तेमाल किया। किसी छात्र ने फूलों और पत्तियों से अपने आभार पत्र को सजाया, तो किसी नन्हीं कलाकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खूबसूरत चित्र बनाकर सबको हैरान कर दिया। इन पत्रों में बच्चों की वो मासूमियत साफ झलक रही थी, जो यह बता रही थी कि शिक्षा के प्रति उनका उत्साह कितना बढ़ गया है।

इन बच्चों ने अपने हाथों से लिखे पत्रों में लिखा कि अब उन्हें जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने में जो असुविधा होती थी, उससे मुक्ति मिल गई है। स्टडी टेबल मिलने से उनकी रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला दबाव कम हुआ है और वे अब ज्यादा देर तक और बेहतर तरीके से अपनी किताबें पढ़ पा रहे हैं। कई स्कूलों के बच्चों ने मिलकर एक बड़ा धन्यवाद कार्ड भी तैयार किया, जिस पर सभी ने अपने छोटे-छोटे हस्ताक्षर किए थे।

क्या है 'शिक्षा की उड़ान' अभियान?

यह पूरा मामला देवीपाटन मंडल के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख जिलों—बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती से जुड़ा है। इन जिलों में प्रशासनिक स्तर पर 'शिक्षा की उड़ान' नामक एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।

अक्सर यह देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों को जमीन पर दरी या चटाई बिछाकर पढ़ना पड़ता है। इससे न केवल उनके बैठने का पोस्चर खराब होता है, बल्कि लंबे समय तक नीचे झुककर पढ़ने से उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए इस अभियान की रूपरेखा तैयार की गई थी।

एक लाख बच्चों तक पहुंची राहत

'शिक्षा की उड़ान' अभियान के तहत देवीपाटन मंडल के इन चारों जिलों में युद्ध स्तर पर काम किया गया। स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और सीएसआर (कॉपोर्रेट सोशल責任) फंड्स के सहयोग से एक लाख बच्चों तक स्टडी टेबल और बेंच का यह सेट पहुंचाया गया। यह अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है, जो यह दर्शाता है कि अगर सही नीयत और दिशा में प्रयास किए जाएं, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर को कैसे बदला जा सकता है।

  • बहराइच: हजारों बच्चों को मिली नई स्टडी टेबल, स्कूलों में दिखा उत्साह का माहौल।
  • बलरामपुर: सीमावर्ती इलाकों के स्कूलों में भी बच्चों को मिला आधुनिक शिक्षण उपकरण का लाभ।
  • गोंडा: ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों की बदली सूरत, बच्चों की उपस्थिति में हुआ सुधार।
  • श्रावस्ती: शिक्षा के मोर्चे पर पिछ माने जाने वाले इस जिले में एक नए युग की शुरुआत।

अभिभावकों और शिक्षकों की जुबानी बदलाव की कहानी

केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षक भी इस पहल से बेहद गदगद हैं। एक स्थानीय सरकारी स्कूल के शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पहले बच्चे जमीन पर बैठते थे तो कुछ ही देर में उनकी पीठ में दर्द होने लगता था, जिससे वे distrapt हो जाते थे। अब स्टडी टेबल मिलने से क्लासरूम का माहौल बिल्कुल बदल गया है। बच्चे अब एक अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से बैठते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता बढ़ी है।"

वहीं, एक छात्रा के अभिभावक ने भावुक होते हुए कहा, "हम लोग इतने सक्षम नहीं हैं कि बाजार से बच्चों के लिए महंगी स्टडी टेबल खरीद सकें। मुख्यमंत्री जी ने हमारे बच्चों की इस तकलीफ को समझा और उन्हें यह उपहार भेजा। हमारे लिए यह किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है। अब हमारे बच्चे भी बड़े स्कूलों के बच्चों की तरह आराम से बैठकर पढ़ सकेंगे।"

शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ सालों से 'ऑपरेशन कायाकल्प' और अन्य अभियानों के जरिए राज्य के सरकारी स्कूलों के कायाकल्प में जुटी हुई है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास, बाउंड्री वॉल, बिजली, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अब बच्चों के बैठने की व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। देवीपाटन मंडल का यह 'शिक्षा की उड़ान' अभियान इसी कड़ी का एक मजबूत हिस्सा बनकर उभरा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चों को स्कूल में एक सम्मानजनक और आरामदायक माहौल मिलता है, तो स्कूल के प्रति उनका जुड़ाव बढ़ता है। इससे ड्रॉपआउट रेट (बीच में स्कूल छोड़ने की दर) में भारी कमी आती है। स्टडी टेबल जैसी छोटी लगने वाली सुविधाएं वास्तव में बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई बच्चों की कला

जब इन बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र और आभार पत्र सोशल मीडिया पर सामने आए, तो इंटरनेट यूजर्स ने इसकी जमकर तारीफ की। लोगों ने बच्चों की मासूमियत और मुख्यमंत्री की इस पहल की सराहना करते हुए इसे जनहित का एक बेहतरीन उदाहरण बताया। कई लोगों ने लिखा कि असल विकास जमीन पर ऐसे ही दिखाई देता है जब अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आती है।

फिलहाल, देवीपाटन मंडल के इन चारों जिलों के स्कूलों में एक अलग ही ऊर्जा देखने को मिल रही है। जिन बच्चों ने कभी अपनी पढ़ाई के लिए ऐसी सुविधाओं के बारे में सिर्फ सपने देखे थे, वे अब गर्व के साथ अपनी नई स्टडी टेबल पर बैठकर ककहरा सीख रहे हैं। यह अभियान न केवल शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि शासन और जनता के बीच भरोसे के एक नए पुल का निर्माण भी कर रहा है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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