बिहार के दरभंगा जिले से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। यहां के कीरतपुर प्राइमरी स्कूल के मासूम बच्चों को अब और अधिक समय तक जान जोखिम में डालकर जर्जर और खतरनाक इमारतों के साए में पढ़ाई नहीं करनी होगी। शिक्षा विभाग और प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए स्कूल को तुरंत दूसरी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है।
जानलेवा स्थिति में चल रहा था स्कूल
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कीरतपुर प्राइमरी स्कूल की पुरानी बिल्डिंग पूरी तरह से जर्जर और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी थी। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना और दीवारों का कमजोर होना आम बात हो गई थी। ऐसे में हर दिन स्कूल आने वाले छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा तलवार लटक रहा था। अभिभावक लगातार डरे हुए थे कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए जब यह गंभीर मामला उच्चाधिकारियों और शासन तक पहुंचा, तो इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लिया गया। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए प्रशासन ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
अब गोसवा में संचालित होंगी कक्षाएं
बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में स्कूल को गोसवा शिफ्ट करने का पक्का फरमान सुनाया है। अब से इस स्कूल की تمام (सभी) कक्षाएं गोसवा स्थित निर्धारित परिसर में संचालित की जाएंगी।
- सुरक्षा पहली प्राथमिकता: बच्चों को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
- पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर: गोसवा में सुचारू रूप से कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
- अभिभावकों ने ली राहत की सांस: स्थानीय स्तर पर इस आदेश के बाद लोगों में खुशी और संतोष का माहौल है।
प्रशासनिक सतर्कता और आगे की कार्रवाई
शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और बच्चों को बुनियादी व सुरक्षित माहौल देने के दावे के तहत यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राज्यभर में इस तरह के जितने भी जर्जर विद्यालय भवन चिह्नित किए जा रहे हैं, वहां चरणबद्ध तरीके से सुधार या पुनर्स्थापना का कार्य किया जा रहा है ताकि किसी भी छात्र की जान को जोखिम में न डाला जाए।
गोसवा में स्कूल के शिफ्ट होने के बाद से वहां जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने का काम भी तेजी से शुरू कर दिया गया है ताकि बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। स्थानीय शिक्षा समिति और शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुचारू रूप से पठन-पाठन का कार्य सुनिश्चित करें।