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दिल्ली के नए बारापुला फ्लाईओवर पर ट्रैफिक का महाजाम, एक दशक पुरानी प्लानिंग बनी जी का जंजाल

दिल्ली के नए बारापुला फ्लाईओवर पर ट्रैफिक का महाजाम, एक दशक पुरानी प्लानिंग बनी जी का जंजाल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आवागमन को सुगम बनाने के लिए शुरू किए गए नए बुनियादी ढांचे अक्सर अपनी शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक और इंजीनियरिंग चूकों की पोल खोलने लगते हैं। ताजा मामला बहुप्रतीक्षित बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का है, जिसके जनता के लिए खुलते ही वाहन चालकों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है। मयूर विहार, डीएनडी और सनडायल लूप से आने वाला ट्रैफिक जब सराय काले खां के पास पुराने और संकरे बारापुला फ्लाईओवर पर मिलता है, तो वहां वाहनों का सैलाब उमड़ पड़ता है। स्थिति यह है कि उद्घाटन के तुरंत बाद से ही इस मार्ग पर किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे लोगों का सफर आसान होने के बजाय और अधिक समय लेने लगा है।

डिजाइन में बड़ी खामी और सड़कों की क्षमता में अंतर

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे कॉरिडोर का संयुक्त मुआयना किया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अचानक होने वाला मर्जर (Sharp Merger) और सड़क की क्षमता (Road Capacity) में भारी अंतर इस भीषण जाम की सबसे बड़ी वजह है। फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर तीन लेन चौड़ा है, लेकिन जिस बिंदु पर यह पुराने बारापुला फ्लाईओवर से जुड़ता है, वहां सड़क की चौड़ाई अचानक कम हो जाती है। इसके अलावा, सनडायल लूप के पास ट्रैफिक का मर्जर बहुत ही तीखा और आयताकार (Rectangular) है। इसके कारण वाहनों को क्रमिक रूप से आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता और वे एक बहुत ही कम दूरी के दायरे में एक-दूसरे को ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है.

एक दशक पुरानी प्लानिंग और बदलती यातायात की तासीर

इस परियोजना से जुड़े तकनीकी जानकारों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह समस्या केवल इंजीनियरिंग डिजाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी पॉलिसी से जुड़ी चूक भी है। इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना आज से एक दशक से भी अधिक समय पहले की गई थी। मूल योजना के अनुसार इसे साल 2017 में ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक अड़चनों और निर्माण में देरी के कारण आखिरकार यह अक्टूबर 2026 में जनता को समर्पित किया गया। इन नौ वर्षों के लंबे अंतराल में पूर्वी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और व्यापक एनसीआर क्षेत्र की जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, और सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।

जब इस प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था, तब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के भीतर यातायात की आवाजाही का पैटर्न पूरी तरह से अलग था। डीएनडी फ्लाईवे और नेशनल हाईवे 24 जैसे व्यस्त मार्गों पर दबाव को बांटने के लिए इस कॉरिडोर को डिजाइन किया गया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि यही मार्ग अपने शुरुआती उद्गम स्थलों से ही भारी तादाद में वाहनों को अपनी ओर खींच रहे हैं। नतीजतन, नए फ्लाईओवर के आसपास के इलाकों पर उसकी क्षमता से कहीं अधिक दबाव पड़ रहा है, जिसे पुरानी डिजाइन सहन करने में असमर्थ साबित हो रही है।

प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर आपातकालीन कदम

लगातार मिल रही शिकायतों और सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक को देखते हुए यातायात प्रबंधन से जुड़े महकमे ने युद्धस्तर पर मंथन शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने मौजूदा ज्यामिति (Geometry) में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि सनडायल लूप के पास वाहनों के मिलने की प्रक्रिया को एक सुगम वक्र (Smooth Curve) में बदला जा सके। इसके साथ ही, संकरे हिस्से पर अत्यधिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक सिग्नल या नियंत्रित संकेतों को लगाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि एक साथ भारी तादाद में गाड़ियां बॉटलनैक तक न पहुंच सकें।

  • मैनुअल रेगुलेशन: जब तक कोई स्थायी तकनीकी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को मौके पर तैनात कर हाथों से यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है।
  • नेविगेशन ऐप्स में सुधार: अधिकारियों का यह भी मानना है कि गूगल मैप्स और अन्य नेविगेशन प्लेटफॉर्म्स पर सड़क के नए कॉन्फ़िगरेशन और रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा का अपडेट न होना भी भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है।
  • वैकल्पिक मार्ग: नेविगेशन सिस्टम को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जब बारापुला मार्ग पर वाहनों का दबाव चरम पर हो, तो चालकों को एनएच 24 जैसे वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा सके।

यातायात पुलिस की विशेष एडवाइजरी

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रायफिक) डी.के. गुप्ता ने नागरिकों से अपील की है कि वे सफर पर निकलने से पहले यातायात सलाहकारों (Traffic Advisories) का गंभीरता से पालन करें। उन्होंने कहा, "यात्री विशेष रूप से पीक आवर्स के दौरान सड़क पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें और जहां तक संभव हो वैकल्पिक मार्गों का चयन करें। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस हर नागरिक के सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"

यह स्थिति इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अपने तय समय से वर्षों पिछड़ जाती हैं, तो वे भविष्य की वास्तविक शहरी जरूरतों को पूरा करने में किस प्रकार विफल हो सकती हैं। अब देखना यह होगा कि पीडब्ल्यूडी और ट्रैफिक पुलिस मिलकर इस तकनीकी रूप से उलझे हुए जंक्शन को कितनी जल्दी एक व्यावहारिक और टिकाऊ रूप दे पाते हैं, ताकि आम जनता को प्रतिदिन लगने वाले इस जाम से स्थाई राहत मिल सके।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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