वाराणसी में मां गंगा के रुख में बदलाव ने नदी किनारे रहने वाले लाखों बाशिंदों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। पिछले तीन दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे बाढ़ और कटाव के मुहाने पर खड़े इलाकों में अब राहत का अहसास होने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जलस्तर घटने की यह रफ्तार लगातार बनी हुई है और प्रशासन के साथ-साथ आम जनता भी चैन की सांस ले रही है।केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े क्या कहते हैं?
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट स्थित आधिकारिक गेज स्थल से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 69.80 मीटर दर्ज किया गया था। जलस्तर में औसतन 1 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कमी आ रही है। जानकारों का मानना है कि यह गिरावट इस बात का संकेत है कि नदी अब धीरे-धीरे अपने सामान्य प्रवाह की ओर लौट रही है, जिससे पिछले कुछ दिनों से बनी दहशत का माहौल अब कम होने लगा है।
चेतावनी स्तर से नीचे बह रही है नदी
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में गंगा नदी का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर तय किया गया है, जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर पर है। इसके अलावा, इतिहास का सबसे उच्चतम बाढ़ स्तर (H.F.L.) 73.901 मीटर दर्ज किया जा चुका है। ताजा स्थिति यह है कि रविवार की सुबह दर्ज किया गया 69.80 मीटर का जलस्तर, चेतावनी बिंदु से भी लगभग 46.2 सेंटीमीटर नीचे है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि फिलहाल किसी भी प्रकार का बड़ा खतरा टल चुका है।
तटवर्ती इलाकों में जीवन हो रहा सामान्य
जलस्तर घटने से वाराणसी के तमाम घाटों और उससे सटे निचले इलाकों में स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। जिन इलाकों में पानी भरने का खतरा मंडरा रहा था या जहां लोगों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी थी, वहां अब हालात नियंत्रण में हैं। दुकानदारों, नाविकों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के राहत भरे बयानों के बाद राहत की सांस ली है।
- घाटों का नजारा: जलस्तर कम होने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट समेत प्रमुख घाटों पर अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जगह सुलभ होने लगी है।
- नाविकों की वापसी: पानी का बहाव धीमा होने और स्तर घटने से नाविकों ने भी अपनी नावें सुरक्षित स्थानों से निकालकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया है।
- कटाव से बचाव: हालांकि जलस्तर कम होने के बाद कई जगहों पर मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है, जिस पर जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन पैनी नजर रखे हुए है।
प्रशासन की सतर्कता अभी भी जारी
भले ही आंकड़े राहत देने वाले हैं, लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मौसम के मिजाज और ऊपर के इलाकों से आ रहे पानी के प्रवाह को ध्यान में रखते हुए लगातार मानिटरिंग की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की टीमों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आकस्मिक बदलाव की सूचना समय रहते साझा की जा सके।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल बरसात और उसके बाद के महीनों में गंगा का यह उतार-चढ़ाव उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस बार समय रहते जलस्तर में आई गिरावट ने एक बड़ी संभावित आपदा को टाल दिया है। फिलहाल, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी गंगा किनारे का माहौल बेहद सुकून भरा और अनुकूल बनता जा रहा है।