हरियाणा में पिछले 38 दिनों से प्रदेशभर की व्यवस्था को ठप करने वाली सफाई कर्मियों की ऐतिहासिक और लंबी हड़ताल आखिरकार शुक्रवार को समाप्त हो गई। इस हड़ताल के खत्म होने से न सिर्फ आम जनता ने राहत की सांस ली है, बल्कि स्थानीय निकायों और शहरों की साफ-सफाई व्यवस्था को भी दोबारा पटरी पर लौटने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद इस गतिरोध का सकारात्मक अंत हुआ।
मुख्यमंत्री के साथ मैराथन बैठक के बाद बनी सहमति
शुक्रवार को हुई इस अहम बैठक में नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि शामिल रहे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद संवेदनशीलता दिखाते हुए कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया और कई बड़े ऐलान किए। बैठक का माहौल इतना सकारात्मक रहा कि समझौते पर मुहर लगने के बाद मुख्यमंत्री ने नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर इस बात का संदेश दिया कि सरकार अपने कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस बड़े समझौते के बाद कर्मचारी संगठनों ने अपने तेवर नरम करते हुए आगामी 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित 'न्याय जन पंचायत' को स्थगित करने का भी ऐलान कर दिया है। इससे साफ है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच का यह समझौता दोनों पक्षों के लिए संतोषजनक रहा है।
मीटिंग से पहले मंत्रियों के साथ चला दौर
मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात होने से पहले कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और कृष्ण बेदी ने सफाई कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ लंबी मंत्रणा की थी। इस शुरुआती दौर की बातचीत में ही कई बुनियादी मुद्दों पर आपसी सहमति बन चुकी थी, जिससे अंतिम मुहर लगाना आसान हो गया। सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया कि पालिका रोल के सफाई कर्मचारियों को अब एकमुश्त वर्दी भत्ते के बजाय 440 रुपये प्रतिमाह सीधा वर्दी भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा, समान काम-समान वेतन और एरियर से जुड़ी लंबित मांगों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और नियमानुसार एलटीसी का लाभ भी दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य और मेडिकल सुविधाओं में बड़ा सुधार
सफाई कर्मचारियों, सीवरमैनों (चाहे वे नियमित हों, पालिका रोल पर हों या फिर एचकेआरएनएल के जरिए कार्यरत हों) के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब हर साल नगर निकाय के खर्च पर स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से इन सभी कर्मचारियों का अनिवार्य मेडिकल चेकअप कराया जाएगा।
इसके साथ ही, नगर निकायों के नियमित कर्मचारियों, पेंशनधारकों और उनके आश्रितों को सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू 'मेडिकल कैशलेस नीति' का दायरा बढ़ाते हुए इसके लाभ की सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी गई है। इससे हजारों परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
अनुबंधित कर्मियों के लिए अनुभव के अंक और नियमितीकरण
हड़ताल के दौरान उठाई गई सबसे अहम मांगों में से एक अनुबंधित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करना था। इस पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए तय किया है कि नगर पालिका के पे-रोल सफाई कर्मचारियों को खाली पड़े पदों पर चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाएगा।
- अनुभव के अंक: नियमित भर्ती प्रक्रिया में अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर को उनके काम के अनुभव के आधार पर विशेष नंबर (अंक) दिए जाएंगे, जिससे उन्हें पक्की नौकरी मिलने में आसानी होगी।
- जीवन बीमा सुरक्षा: ड्यूटी के दौरान या किसी दुर्घटना में मृत्यु होने पर बैंक के माध्यम से 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा और दिव्यांग होने पर 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
- मेडिकल अवकाश: सफाई कर्मचारियों के मेडिकल अवकाश की सीमा को 10 दिन से बढ़ाकर सीधे 20 दिन कर दिया गया है।
- ग्रुप-सी पदोन्नति: पढ़े-लिखੇ कर्मचारियों को उनकी योग्यता और पात्रता के आधार पर ग्रुप-सी के पदों पर पदोन्नति (प्रमोशन) के बेहतरीन अवसर दिए जाएंगे।
- सीवरमैन का वेतन: सीवरमैनों के जोखिम भरे काम को देखते हुए उनके वेतन में 2100 रुपये की सीधी वृद्धि का लाभ दिया जाएगा। आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मचारियों को भी न्यूनतम वेतन, ईएसआई और ईपीएफ का सुरक्षा कवच मिलेगा।
फायर कर्मचारियों की मांगों पर भी लगी मुहर
सफाई कर्मियों के साथ-साथ हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन की मांगों पर भी सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। फरीदाबाद के दिवंगत फायर कर्मचारी भावीचंद शर्मा और रणबीर के परिवारों को सहायता राशि के रूप में सरकार ने पहले ही क्रमशः 60 लाख और 30 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। अब रणबीर के परिवार को बकाया 20 लाख रुपये की राशि भी जल्द देने पर सहमति बन गई है।
भविष्य के लिए एक स्थायी नीति बनाते हुए यह तय किया गया है कि यदि इस तरह की किसी दुर्घटना में किसी कर्मचारी की मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही, अनुकंपा के आधार पर नौकरी के आवेदनों पर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
फायर कर्मचारियों के भत्ते और चयन प्रक्रिया
फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के खाली पड़े पदों की भर्ती के नए मापदंड अगले 45 दिनों के भीतर तैयार कर लिए जाएंगे और उसके ठीक 15 दिन बाद इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस चयन मापदंड समिति में यूनियन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा, फायर कर्मचारियों को हर महीने 5,000 रुपये का विशेष जोखिम भत्ता और 7,500 रुपये वार्षिक वर्दी भत्ता देने पर भी सहमति बन चुकी है। हड़ताल की अवधि को लेकर कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने साफ किया है कि पे-रोल कर्मचारियों की हड़ताल अवधि को अतिरिक्त ड्यूटी अवकाश के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा और नियमित कर्मचारियों की सर्विस में इस हड़ताल की वजह से किसी भी प्रकार का ब्रेक नहीं माना जाएगा।
सामान्य जनजीवन की बहाली
38 दिनों तक चली इस लंबी हड़ताल के कारण हरियाणा के शहरी इलाकों में कचरे के ढेर और सीवर जाम की समस्याओं ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। सरकार और कर्मचारी संघ के बीच बनी इस सर्वसम्मति के बाद अब प्रदेशभर में स्थिति तेजी से सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेते हुए प्रशासन को पूरा सहयोग देने का भरोसा जताया है, जिससे राज्य में एक बार फिर प्रशासनिक और नागरिक व्यवस्थाएं पूरी गति के साथ पटरी पर लौटती दिख रही हैं।