देश की राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने की रफ्तार को और तेज करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के वास्ते चार्जिंग ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक और सुलभ बनाने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने राजधानी में नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के लिए 382 प्रमुख स्थलों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस बड़े फैसले के बाद अब जल्द ही इन जगहों पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
राजस्व विभाग और डीटीसी द्वारा की गई थी स्थलों की पहचान
दिल्ली सरकार के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान इस पूरी परियोजना की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि राजधानी में चार्जिंग नेटवर्क को घर-घर और हर कोने तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने मिलकर कुल 456 संभावित स्थलों की पहचान की थी। इन सभी स्थानों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद भारी उद्योग मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा गया था, जिनमें से 382 स्थलों को हरी झंडी मिल चुकी है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाले हर श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को आसानी से चार्जिंग की सुविधा मिल सके। चाहे वह दोपहिया वाहन हो, तिपहिया हो या फिर चारपहिया इलेक्ट्रिक कारें, हर वाहन के लिए उपयुक्त चार्जिंग प्वाइंट तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है।
पिछले तीन महीनों में हुआ सभी स्थलों का सख्त मूल्यांकन
दिल्ली की संशोधित इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत पिछले तीन महीनों में चिन्हित किए गए सभी स्थलों का जमीनी स्तर पर दोबारा मूल्यांकन (Re-assessment) किया गया है। इस दौरान तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर इस बात का विशेष ध्यान रखा कि किस खास जगह पर किस प्रकार की चार्जिंग तकनीक सबसे अधिक प्रभावी साबित होगी।
- बिजली की उपलब्धता: हर स्थल पर स्थानीय ग्रिड की क्षमता और पावर सप्लाई का पूरा आकलन किया गया है।
- यातायात का दबाव: ट्रैफिक मूवमेंट और वाहन चालकों की सुविधा को प्राथमिकता दी गई है।
- भविष्य की मांग: आने वाले वर्षों में ईवी की संख्या में होने वाले बेतहाशा इजाफे को ध्यान में रखकर क्षमता तय की गई है।
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने जानकारी दी है कि इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला बनाने के लिए प्रतिष्ठित कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी (KPMG) को परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management Unit) के रूप में जोड़ा गया है। इनकी देखरेख में ही सभी 382 स्थलों का तकनीकी मूल्यांकन पूरा किया गया है।
जल्द जारी होंगे टेंडर, निर्माण कार्यों में आएगी तेजी
मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सरकार का अगला बड़ा कदम टेंडर आमंत्रित करना है। अधिकारियों के मुताबिक, जमीनी स्तर पर काम शुरू करने के लिए विभिन्न निजी और सार्वजनिक कंपनियों से बोलियां मंगाई जाएंगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत जल्द ही ठेके आवंटित किए जाएंगे ताकि तय समयसीमा के भीतर दिल्ली के कोने-कोने में चार्जिंग स्टेशन खड़े किए जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में चार्जिंग स्टेशनों की कमी ही वह सबसे बड़ा कारण है जिसकी वजह से कई लोग पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से ईवी पर शिफ्ट होने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में जब शहरभर में घने चार्जिंग नेटवर्क का जाल बिछ जाएगा, तो लोगों की 'रेंज एंग्जायटी' (बैटरी खत्म होने का डर) पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
लक्ष्य: 2027 और 2028 तक शत-प्रतिशत ईवी पंजीकरण
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए बेहद आक्रामक और स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। नीति के अनुसार:
1 जनवरी 2027 से शहर में नए तिपहिया (Auto) और हल्के व्यावसायिक वाहनों (Light Commercial Vehicles) के लिए शत-प्रतिशत (100%) इलेक्ट्रिक पंजीकरण अनिवार्य करने का लक्ष्य है।
1 अप्रैल 2028 से दोपहिया वाहनों (Two-Wheelers) के लिए भी शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक पंजीकरण का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
इन कड़े और दूरदर्शी लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि उससे पहले ही सड़कों पर चलने वाले वाहनों के अनुपात में मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाए। भारी उद्योग मंत्रालय से मिली 382 स्थलों की यह मंजूरी इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।
आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?
इस नई परियोजना के धरातल पर उतरने से दिल्ली के आम नागरिकों को जबरदस्त सहूलियत मिलेगी। कैब चालकों, डिलीवरी ब्वॉय और निजी वाहन मालिकों को अब चार्जिंग के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा या दूर-दराज के इलाकों में भटकना नहीं पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर चार्जिंग हब बन जाने से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के संकल्प को भी भारी संबल मिलेगा। आने वाले कुछ हफ्तों में टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य की शुरुआत को लेकर कई बड़े ऐलान किए जा सकते हैं।