राष्ट्रपिता को अनोखी श्रद्धांजलि: गलियों से लेकर सामाजिक भवनों तक चली सफाई मुहिम
अक्टूबर की गुनगुनी धूप और देश भर में गूंजते राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार। आज यानी 02 अक्टूबर 2026 को पूरा देश गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा है। इस खास अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जिला साहू संघ ने इस पावन दिवस को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सेवा और स्वच्छता के महापर्व के रूप में मनाया है। समाज के लोगों ने एक साथ मिलकर शहर से लेकर दूर-दराज के गांवों तक स्वच्छता की अलख जगाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के विभिन्न ग्रामों और शहरी वार्डों में सुबह से ही विशेष स्वच्छता अभियानों की शुरुआत हो गई थी। हाथों में झाड़ू थामे समाज के युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने मिलकर सार्वजनिक स्थलों, सामाजिक भवनों के परिसरों और गलियों की साफ-सफाई की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को यह याद दिलाना था कि स्वच्छता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
पचपेड़ी गांव में मुख्य आयोजन, बापू की प्रतिमा पर अर्पित किए गए श्रद्धासुमन
इस स्वच्छता महाअभियान की सबसे खास झलक धमतरी जिले के पचपेड़ी गांव में देखने को मिली। यहां जिला साहू संघ के अध्यक्ष गणेश राम साहू ने विशेष रूप से शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर और माल्यार्पण के साथ की गई। उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने बापू के चित्र पर तिलक लगाकर उनकी पूजा-अर्चना की और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया।
पूजा-अर्चना के तुरंत बाद गणेश राम साहू और अन्य पदाधिकारियों ने पचपेड़ी गांव की गलियों का रुख किया। उन्होंने खुद हाथ में झाड़ू उठाकर सड़क और नालियों के आसपास जमे कचरे को साफ किया। अध्यक्ष को खुद श्रमदान करते देख गांव के तमाम युवा और ग्रामीण भी उत्साह के साथ इस मुहिम में कूद पड़े। कुछ ही घंटों में गांव की मुख्य गलियां और सामाजिक भवन का परिसर चमक उठा।
"महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए देश को न केवल स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि समाज को एकता के सूत्र में पिरोया। उनके विचार आज भी हमारे लिए उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं जितने दशकों पहले थे। स्वच्छता से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मन में भी स्वच्छ विचार उत्पन्न होते हैं।" - गणेश राम साहू, अध्यक्ष, जिला साहू संघ, धमतरी
अध्यक्ष गणेश राम साहू ने आगे कहा कि गांधी जयंती का यह विशेष दिन हम सभी के लिए एक आत्ममंथन और कड़ा संकल्प लेने का अवसर है। हमें यह प्रण लेना चाहिए कि हम केवल अपने घर तक सीमित न रहें, बल्कि अपने मोहल्ले, पूरे ग्राम, ब्लॉक, तहसील, जिला, राज्य और अंततः पूरे देश को स्वच्छ रखने में अपना योगदान देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वच्छ भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब हर नागरिक इसे अपनी व्यक्तिगत आदत बना ले।
ग्रामीणों की भारी मौजूदगी और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस सामाजिक और स्वच्छता पर आधारित कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर गजब का जनसमर्थन देखने को मिला। कार्यक्रम की सफलता में ग्राम पंचायत पचपेड़ी के सरपंच विनय कुमार साहू और ग्रामीण साहू संघ पचपेड़ी के अध्यक्ष गंगाराम साहू की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने गांव के हर घर तक जाकर लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
खास बात यह रही कि इस स्वच्छता अभियान में मातृशक्ति यानी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जिला साहू संघ महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष कुलेश्वरी साहू के नेतृत्व में महिलाओं ने न केवल सफाई की, बल्कि घर-घर जाकर महिलाओं को कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ये गणमान्य लोग
- गणेश राम साहू (अध्यक्ष, जिला साहू संघ)
- विनय कुमार साहू (सरपंच, ग्राम पंचायत पचपेड़ी)
- गंगाराम साहू (अध्यक्ष, ग्रामीण साहू संघ पचपेड़ी)
- कुलेश्वरी साहू (उपाध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ, जिला साहू संघ)
- भिखारी साहू (सलाहकार, जिला साहू संघ)
- धनंजय साहू (कार्यकारिणी सदस्य)
- गायत्री साहू, फुलेश्वरी साहू, और दुर्गा साहू (उपाध्यक्ष, परिक्षेत्र साहू समाज तरगोंधी)
इसके अलावा मोहर सिंह साहू, लिकेश साहू, रोहित साहू, पुना साहू, जगदीश साहू, गुलजार साहू समेत सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक जन इस आयोजन के साक्षी बने।
स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने की जरूरत
धमतरी जिले के साहू समाज द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य समाजों और संगठनों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। आज के समय में जब प्लास्टिक कचरा और प्रदूषण हमारे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस तरह के श्रमदान और जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्वच्छता किसी सरकारी योजना के बजाय 'जन-आंदोलन' का रूप नहीं लेगी, तब तक अपेक्षित परिणाम मिलना कठिन है। धमतरी के इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज के अगुआ लोग खुद आगे आकर पहल करें, तो आम जनता स्वतः ही उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित हो जाती है। शाम ढलने तक पचपेड़ी और आसपास के गांवों की आबोहवा बदली हुई नजर आ रही थी—साफ-सुथरी गलियां और नागरिकों के चेहरों पर एक संतुष्ट मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि बापू के सपनों का भारत बनाने की दिशा में एक और छोटा मगर ठोस कदम बढ़ा दिया गया है।