अक्सर हम सेहतमंद रहने के लिए दूध को अपनी डाइट का अहम हिस्सा मानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दूध को आप अमृत समझकर पी रहे हैं, वह किसी के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है? हाल ही में मेडिकल जगत से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। महज 33 साल के एक स्वस्थ युवक को उसकी दो छोटी-सी लगने वाली गलतियों ने सीधे अस्पताल के आईसीयू तक पहुंचा दिया। इस हैरान करने वाली घटना का खुलासा जनरल फिजीशियन डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने सोशल मीडिया के जरिए किया है। आइए जानते हैं कि आखिर उस युवक ने ऐसी कौन सी गलतियां की थीं, जिनके कारण उसे दिल की गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा।
20 दिन का बुखार और फिर दिल पर आफत
यह मामला 33 वर्षीय रमेश (बदला हुआ नाम) का है, जो कुछ दिनों के लिए अपने पैतृक गांव गया था। गांव से लौटने के बाद उसे लगातार सिरदर्द, तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगी। परिवार ने स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों को दिखाया, शुरुआती जांच में सामान्य रक्त रिपोर्ट आई, लेकिन व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) का स्तर बढ़ा हुआ मिला। डॉक्टर लगातार दवाइयां देते रहे, लेकिन 10 से 15 दिन बीत जाने के बाद भी रमेश का बुखार टस से मस नहीं हुआ। बल्कि उसकी कमजोरी दिन-प्रतिदिन बढ़ती चली गई।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब रमेश को छाती में तेज दर्द, दिल की धड़कनें तेज महसूस होने (Palpitations) और थोड़ा सा भी चलने पर सांस फूलने जैसी समस्याएं घेरने लगीं। जब करीब 20 दिन यूं ही बीत गए, तब परिजनों ने उसे एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया। वहां जब डीप मेडिकल जांच हुई, तो डॉक्टरों की रिपोर्ट देख कर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई—रमेश का हार्ट फेल हो चुका था।
ब्रूसेलॉसिस इंफेक्शन बना विलेन
अस्पताल में जब डॉक्टरों ने रमेश के पिछले दिनों की जीवनशैली और खानपान की गहराई से जांच की, तो पता चला कि उसे 'ब्रूसेलॉसिस' (Brucellosis) नाम का एक खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन हुआ था। यह एक ऐसा जूनोटिक इंफेक्शन है, जो मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसी बैक्टीरिया के कारण पहले उसे हफ्तों तक तेज बुखार रहा और फिर इंफेक्शन सीधे उसके दिल तक पहुंच गया।
वे दो बड़ी गलतियां, जो बन गईं हार्ट फेलियर का कारण
डॉ. शालिनी सिंह सालुंके के अनुसार, रमेश के दिल के फेल होने के पीछे उसकी दो बड़ी और आम आदतें थीं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं:
- पहली गलती - एंटासिड का अत्यधिक सेवन: रमेश को लंबे समय से एसिडिटी की समस्या थी। इसके लिए वह बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटासिड की गोलियां खरीदकर खाता था। ऐसा वह कई सालों से कर रहा था। इस आदत की वजह से उसके पेट में प्राकृतिक एसिड का स्तर बहुत कम हो गया था, जो शरीर की रक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहा था।
- दूसरी गलती - बिना उबाला कच्चा दूध पीना: गांव जाने के दौरान रमेश ने भैंस का कच्चा दूध पी लिया था। कच्चे और अनपॉश्चराइज्ड दूध में 'ब्रूसेला' नाम का खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद होता है। चूंकि रमेश के पेट में एंटासिड के कारण एसिड की मात्रा बहुत कम थी, इसलिए वह बैक्टीरिया पेट के एसिड से नष्ट हुए बिना सीधे उसके खून में मिल गया।
खून के रास्ते यह बैक्टीरिया उसके दिल तक जा पहुंचा, जिससे उसे 'इफेक्टिव एंडोकार्डिटिस' (Infective Endocarditis) जैसी गंभीर समस्या हो गई और उसका दिल कमजोर होकर फेल हो गया। गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उसकी जान तो बचा ली गई, लेकिन यह घटना हर किसी के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
इन बातों का रखना बेहद जरूरी है ध्यान
चिकित्सकों की सलाह है कि इस तरह की लापरवाही किसी की भी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसलिए भविष्य में इन बातों का खास ख्याल रखें:
- एंटासिड या पेट की अन्य दवाइयों का सेवन कभी भी अपनी मर्जी से और लगातार नहीं करना चाहिए। शरीर में एसिड का एक तय स्तर होना जरूरी है जो हानिकारक बैक्टीरिया को मार सके।
- कच्चा या बिना उबाला हुआ दूध भूलकर भी न पिएं। हमेशा दूध को अच्छी तरह उबालकर या पॉश्चराइज्ड फॉर्म में ही इस्तेमाल करें ताकि उसमें मौजूद बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाएं।
- यदि लंबे समय तक बुखार बना रहे, तो उसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से पूरी बॉडी की डीप स्क्रीनिंग करवाएं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण के महसूस होने पर तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।