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ECHS वाराणसी में पूर्व सैनिकों की बदहाली: 80 किमी दूर से आए सूबेदार मेजर को करना पड़ा अपमान का सामना

ECHS वाराणसी में पूर्व सैनिकों की बदहाली: 80 किमी दूर से आए सूबेदार मेजर को करना पड़ा अपमान का सामना

देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे वीर सैनिक जब रिटायरमेंट के बाद अपने और अपने परिवार के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाएं, तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सीधे तौर पर रक्षा मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना 'ईसीएचएस' (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) की जमीनी हकीकत की पोल खोलता है।

पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। वाराणसी ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक में फैली भारी अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं के खिलाफ अब पूर्व सैनिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और क्यों एक सूबेदार मेजर को अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पड़ी।

80 किलोमीटर का सफर, और फिर मिला सिर्फ निराशा का बोर्ड

मामले की गंभीरता को तब और बल मिला जब सूबेदार मेजर साहब सिंह चौहान (सुसंबंधित दस्तावेजों और बयानों के अनुसार) ने अपनी आपबीती साझा की। बीते दिनों (14 अगस्त 2026) सूबेदार मेजर साहब सिंह चौहान अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए अपने मूल निवास से करीब 80 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके ईसीएचएस वाराणसी पहुंचे थे।

उन्हें उम्मीद थी कि फौज से रिटायर होने के बाद उन्हें और उनकी अर्धांगिनी को कायदे का इलाज मिल जाएगा। लेकिन अस्पताल के गेट के अंदर कदम रखते ही उनके साथ जो हुआ, वह किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था।

  • लंबी कतार में एक घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करने के बाद अचानक काउंटर बंद कर दिया गया।
  • काउंटर पर 'ओवरलोड' का बोर्ड टांग दिया गया, जिससे वहां मौजूद दर्जनों बुजुर्ग पूर्व सैनिक और उनके परिजन हैरान रह गए।
  • जब इस मनमानी का विरोध किया गया, तो वहां के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना था।

OIC (Officer-in-Charge) का संवेदनहीन रवैया

पीड़ित सूबेदार मेजर के मुताबिक, जब इस मामले की शिकायत ईसीएचएस के ओआईसी (OIC) से की गई, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। ओआईसी ने दो टूक शब्दों में कह दिया, "आप कहीं भी जाइए, आज अस्पताल में सिर्फ दो ही डॉक्टर हैं, हम काउंटर नहीं खोलेंगे!"

यह बयान इस बात का प्रमाण है कि देश के लिए अपनी जवानी खपाने वाले इन सैनिकों के प्रति प्रशासनिक अमले में कितनी संवेदना बची है। जब बात हाथ से निकलती दिखी, तो पीड़ित सैनिक अपनी फरियाद लेकर सीधे एम कमांडेंट के पास पहुंचे।

कमांडेंट के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं खुले कपाट

मामले की गंभीरता को समझते हुए कमांडेंट ने तुरंत संज्ञान लिया और ओआईसी को अपने कार्यालय में तलब किया। काफी बातचीत के बाद यह तय हुआ कि दोपहर 2:00 बजे काउंटर दोबारा खोले जाएंगे और मरीजों का इलाज होगा।

अपनी बुजुर्ग पत्नी की खातिर सूबेदार मेजर और अन्य पूर्व सैनिक दोपहर 2:00 बजे तक भूखे-प्यासे अस्पताल परिसर में ही इंतजार करते रहे। लेकिन विडंबना देखिए कि कमांडेंट के आदेश के बावजूद 2:00 बजे काउंटर नहीं खुले। थक-हार कर और अपमान का घूंट पीकर इन पूर्व सैनिकों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा।

महिला पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के साथ भी भेदभाव

ईसीएचएस वाराणसी में केवल डॉक्टरों या काउंटर बंद होने की ही समस्या नहीं है, बल्कि यहां का डेली रूटीन भी बुजुर्गों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। वीर नारियों (Martyrs' Wives) और महिला पूर्व सैनिकों को भी आम जवानों वाली लंबी और भीड़भाड़ वाली कतारों में खड़ा होना पड़ता है। उनके लिए किसी तरह की अलग या प्राथमिकता वाली व्यवस्था न होना प्रशासनिक लाचारी को साफ दर्शाता है।

इसके अलावा, अस्पताल की फार्मेसी (दवा वितरण काउंटर) को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं:

  • अधिकतर जरूरी दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं होतीं।
  • मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
  • डॉक्टरों पर आरोप है कि वे मरीज की बीमारी की नई जांच करने के बजाय पिछली पुरानी दवाइयों की पर्ची को ही रिपीट कर देते हैं, भले ही उससे मरीज को आराम मिले या न मिले।

सोशल मीडिया पर उठी सुधार की मांग

इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय पूर्व सैनिकों में भारी रोष व्याप्त है। सूबेदार मेजर साहब सिंह चौहान और अन्य सैन्य संगठनों ने देश भर के सभी सेवारत और पूर्व सैनिकों से इस खबर को ज्यादा से ज्यादा वायरल करने की अपील की है। उनका उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं, बल्कि स्टेशन हेडक्वार्टर वाराणसी का ध्यान इन गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करना है, ताकि समय रहते ईसीएचएस की व्यवस्था में सुधार किया जा सके।

जब तक देश के उन वीर सपूतों को सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलेंगी, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश की रक्षा में बिता दी, तब तक ऐसी स्वास्थ्य योजनाएं कागजी हाथी ही साबित होंगी। अब देखना यह होगा कि स्टेशन हेडक्वार्टर वाराणसी इस वायरल अपील और शिकायतों पर क्या एक्शन लेता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: ईसीएचएस वाराणसी में मुख्य समस्या क्या आ रही है?

Ans: मुख्य समस्याओं में डॉक्टरों की कमी, समय से पहले काउंटर बंद करना, ओआईसी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, महिलाओं के लिए अलग कतार का न होना और जरूरी दवाइयों का उपलब्ध न होना शामिल है।

Q2: कमांडेंट के आदेश के बाद भी मरीजों को इलाज क्यों नहीं मिला?

Ans: कमांडेंट द्वारा दोपहर 2 बजे काउंटर खोलने के निर्देश के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया, जिससे पूर्व सैनिकों को निराश लौटना पड़ा।

Q3: इस मामले में पूर्व सैनिकों ने क्या कदम उठाया है?

Ans: सूबेदार मेजर साहब सिंह चौहान के नेतृत्व में सैनिकों ने इस लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई है और स्टेशन हेडक्वार्टर से तत्काल सुधार की मांग करते हुए इसे वायरल करने की अपील की है।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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