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फूलों की खेती के पीछे एमडी ड्रग्स का काला कारोबार, एनसीबी के हाथ लगे बड़े सुराग

फूलों की खेती के पीछे एमडी ड्रग्स का काला कारोबार, एनसीबी के हाथ लगे बड़े सुराग

अपराध की दुनिया ने अब अपने नापाक मंसूबों को छिपाने के लिए ऐसे नकाब ओढ़ लिए हैं, जिनके बारे में आम इंसान कभी कल्पना भी नहीं कर सकता। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। संगम नगरी के मांडा इलाके में एक ऐसा खेल चल रहा था, जिसकी भनक स्थानीय पुलिस को भी तब लगी जब जाल बहुत गहरा चुका था। यहां फूलों की खूबसूरत खेती की आड़ में मौत का सामान यानी सिंथेटिक एमडी ड्रग्स (Mephedrone Drugs) तैयार किया जा रहा था। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब देश की सबसे बड़ी एंटी-ड्रग्स एजेंसी यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने इस पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली है।

फूलों की महक के पीछे छिपा था जहरीला कारोबार

मांडा के ग्रामीण इलाके में एक बड़े भूभाग पर फूलों की खेती की जा रही थी। दूर से देखने पर ऐसा लगता था कि कोई किसान अपनी मेहनत से प्रकृति के बीच रोजगार और खूबसूरती दोनों को बढ़ावा दे रहा है। खेतों में खिले रंग-बिरंगे फूल आने-जाने वालों का मन मोह लेते थे। लेकिन यह सब सिर्फ एक छलावा था। फूलों की इस आड़ में अंदरखाने कुछ ऐसा पक रहा था, जो युवाओं की जिंदगी को तबाह करने के लिए काफी था। खेतों के बीच बने गुप्त शेड्स और कमरों में हाई-टेक लैब्स संचालित की जा रही थीं, जहां खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कर एमडी ड्रग्स बनाई जा रही थी।

खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर जब स्थानीय पुलिस और स्पेशल टीमों ने यहां छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फूलों की महक के बीच केमिकल की तीखी गंध तैर रही थी। मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशे की खेप, उसे बनाने वाले उपकरण और खतरनाक रसायन बरामद किए गए। यह सेटअप इतना पेशेवर था कि किसी को शक तक नहीं हुआ कि यहां खेती के नाम पर एक अवैध ड्रग्स फैक्ट्री चलाई जा रही है।

एनसीबी (NCB) की एंट्री और इंटरनेशनल कनेक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी एनसीबी ने इस केस में सीधी एंट्री ले ली है। एनसीबी की विशेष टीमें मुंबई से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में डेरा डाले हुए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस सिंडिकेट के तार केवल प्रयागराज या उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका दायरा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि इस अवैध कारखाने को चलाने वाले शातिर दिमाग अकेले काम नहीं कर रहे थे। इसके पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स कार्टेल काम कर रहा है। एनसीबी अब इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि ड्रग्स बनाने के लिए कच्चा माल (Raw Material) कहां से आता था और तैयार माल को देश के किन-किन हिस्सों में सप्लाई किया जाता था। क्या इसमें विदेश बैठे किसी मास्टरमाइंड का भी हाथ है? इन सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

मुंबई से लेकर यूपी तक फैला है सिंडिकेट

इस हाई-प्रोफाइल ड्रग्स रैकेट के तार मुंबई से जुड़ने के बाद मामले की परतें तेजी से उधड़ रही हैं। एनसीबी के सूत्रों के मुताबिक, इस फैक्ट्री का संचालन करने वाले मास्टरमाइंड और उनके गुर्गों के पुराने आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है। मुंबई के रास्ते ड्रग्स की तस्करी या फिर वहां के तस्करों के साथ इस यूपी मॉड्यूल की क्या कोई सांठगांठ थी, इसकी तकनीकी जांच की जा रही है।

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR): गिरफ्तार आरोपियों और संदिग्धों के फोन नंबरों की कॉल डिटेल निकाली जा रही है ताकि उनके संपर्कों का पता चल सके।
  • मनी ट्रेल (Money Trail): अवैध धंधे से कमाई गई काली कमाई को कहां खपाया जा रहा था, इसकी जांच के लिए बैंक खातों और संपत्तियों की पड़ताल शुरू हो गई है।
  • केमिकल सप्लाई चेन: ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित रसायन कहां से और कैसे खरीदे जाते थे, इस पर विशेष नजर है।

स्थानीय लोगों और तंत्र की भूमिका पर भी उठे सवाल

इतने बड़े पैमाने पर अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का संचालन होना और स्थानीय स्तर पर इसकी भनक न लगना कई बड़े सवाल खड़े करता है। क्या स्थानीय स्तर पर किसी ने इस अवैध गतिविधि को नजरअंदाज किया या फिर इस खेल में कुछ सफेदपोश लोग भी शामिल थे? हालांकि, जांच एजेंसियां बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुख्ता सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं।

प्रशासन अब मांडा और आसपास के इलाकों में उन तमाम जमीनों और फार्महाउस की भी जांच कर रहा है जिन्हें हाल ही में बाहरी लोगों ने किराए पर लिया या खरीदा था। पुलिस और खुफिया तंत्र यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस तरह की कोई अन्य फैक्ट्री या ठिकाना इस क्षेत्र में सक्रिय न हो।

युवाओं की बर्बादी का सौदागर

एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन), जिसे आमतौर पर 'म्याऊं-म्याऊं' या 'डान्स ड्रग' भी कहा जाता है, आज की युवा पीढ़ी के बीच तेजी से पैर पसार रहा है। यह एक सिंथेटिक ड्रग है जो बेहद कम समय में इंसान को अपनी गिरफ्त में ले लेता है और उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इस प्रकार की अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ होना समाज और देशहित में बहुत जरूरी है, क्योंकि यह ड्रग्स युवा पीढ़ी को मौत के मुंह में धकेल रहा है।आगे की कार्रवाई और सख्त कदम

फिलहाल एनसीबी और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले में संलिप्त सभी चेहरों को बेनकाब करने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। पूछताछ के दौरान जो नए नाम सामने आएंगे, उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। यह मामला यह साबित करने के लिए काफी है कि अपराधी किस तरह कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।

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नसीम अहमद

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Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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