आकाश की ऊंचाइयों पर उड़ते एक विमान के कॉकपिट के भीतर जब अचानक मौत का साया मंडराने लगा, तो उस भारतीय पायलट के मन में बस एक ही बात थी—किसी भी कीमत पर विमान और उसमें सवार सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान बचाना। यह खौफनाक वाकया है फ्लाइदुबई (Flydubai) की उड़ान संख्या FZ1073 का, जिसने हाल ही में पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। विमान के भारतीय कैप्टन स्मीत मच्छार (Smit Machchhar) ने अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक वीडियो कॉल में उस डरावने पल का जिक्र किया है जब उन्हें लगा कि वे अब नहीं बचेंगे, लेकिन अपनी सूझबूझ से उन्होंने इतिहास बदल दिया।
कॉकपिट में क्या हुआ था उस दिन?
घटना 30 सितंबर की है, जब बोइंग 737 मैक्स (Boeing 737 Max) विमान दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भर रहा था। इस विमान में कुल 174 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश इजरायली नागरिक थे। कैप्टन स्मीत मच्छार, जिन्हें विमानन क्षेत्र में 17 साल का लंबा अनुभव है, ने बातचीत में खुलासा किया कि उड़ान बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रही थी। इसी दौरान सह-पायलट (को-पायलट) हम्मम अल-हम्ममी (Hamam al-Hammami) नमाज पढ़ने के लिए अपनी सीट से उठे।
सम्मान के भाव के तहत कैप्टन मच्छार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन करीब चार से पांच मिनट बाद उनके सिर के पिछले हिस्से पर एक जोरदार प्रहार हुआ। हमला इतना अचानक और तेज था कि उन्हें लगा शायद पूरे विमान पर ही कोई बाहरी हमला हो गया है। जब दूसरा प्रहार हुआ, तब उन्हें अहसास हुआ कि यह हमला उनके पीछे खड़े व्यक्ति यानी सह-पायलट की तरफ से किया जा रहा है।
"सह-पायलट के पहले प्रहार से मेरी दृष्टि (विज़न) पूरी तरह से धुंधली हो चुकी थी और मुझे महसूस हो रहा था कि विमान तेजी से नीचे की ओर गोता लगा रहा है," कैप्टन मच्छार ने इजरायली प्रधानमंत्री को बताया।
मौत के मुहाने पर खड़े होकर उठाया वह कदम
हमले के बाद कैप्टन मच्छार लहूलुहान अवस्था में कॉकपिट के फर्श पर गिर गए थे, उनकी आंखें ठीक से देख नहीं पा रही थीं और विमान लगातार नीचे गिर रहा था। उस विकट परिस्थिति में भी उन्होंने हार नहीं मानी। किसी तरह घिसटते हुए वे कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे पहली बार खोला। लेकिन सह-पायलट अल-हम्ममी ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और कैप्टन फिर से फर्श पर गिर पड़े।
उस पल को याद करते हुए कैप्टन मच्छार ने बताया, "मुझे लगा कि अब मैं मरने वाला हूं, और तभी मैंने अपनी बची-खुची ताकत का पूरा इस्तेमाल करते हुए दरवाजे पर जोर लगाया।" जब दरवाजा दूसरी बार खुला, तो बाहर यात्री और क्रू मेंबर्स मदद के लिए तैयार खड़े थे। वे अंदर आए, हमलावर सह-पायलट को काबू में किया और विमान के नियंत्रण को वापस अपने हाथ में लिया। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिम में स्थित ताबूक में सुरक्षित उतार लिया गया।
हनुमान चालीसा का पाठ और जीवन के लिए संघर्ष
इससे पहले, 2 अक्टूबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत में भी कैप्टन स्मीत मच्छार ने साझा किया था कि वे अपनी जिंदगी की आखिरी लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि वे दूसरों की सांसें नहीं थमने देंगे। इस जानलेवा हमले के दौरान उन्होंने अपने आराध्य को याद करते हुए मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था, जिसने उन्हें मानसिक संबल प्रदान किया।
कॉकपिट के दरवाजे का रहस्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान कैप्टन से पूछा कि क्या कॉकपिट के दरवाजे को खोलने के लिए किसी 'पिन' को खींचना पड़ता है? इस पर कैप्टन मच्छार ने स्पष्ट किया कि दरवाजे पर कोई पिन नहीं होती। कॉकपिट के अंदर से दरवाजा केवल एक नॉब को घुमाने से खुलता है, जबकि बाहर के लोगों को अंदर आने के लिए एक विशेष कोड की आवश्यकता होती है।
घटना के समय बाहर मौजूद लोग लगातार कोड दर्ज कर रहे थे, लेकिन हमलावर सह-पायलट अंदर से दरवाजे को बंद रखे हुए था। सबसे कठिन काम उस नॉब तक पहुंचना था। एक बार जब कैप्टन का हाथ नॉब तक पहुंच गया, तो एक छोटा और तेज घुमाव ही दरवाजा खोलने के लिए काफी साबित हुआ।
'भारत, इजरायल और दुनिया के हीरो'
इस अद्भुत बहादुरी और जांबाज सूझबूझ के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मीत मच्छार की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छार और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर देश की यात्रा करने का विशेष निमंत्रण भी दिया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि हमलावर सह-पायलट किसी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हो सकता था।
फिलहाल, कैप्टन मच्छार को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थानांतरित कर दिया गया है, जहाँ वे पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में अपने स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल के विमानन सुरक्षा अधिकारी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हमले के पीछे की असली साजिश और मकसद क्या था।
निष्कर्ष
कैप्टन स्मीत मच्छार की यह गाथा केवल एक विमान दुर्घटना को टालने की कहानी नहीं है, बल्कि यह अदम्य साहस, मानसिक दृढ़ता और कर्तव्यनिष्ठा का एक ऐसा उदाहरण है जो सदियों तक याद रखा जाएगा। जब मौत सामने खड़ी हो, तब भी केवल दूसरों की सुरक्षा के बारे में सोचना ही एक सच्चे नायक की पहचान होती है।