बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाले हेल्थ सप्लीमेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स और विशेष आहार उत्पादों को लेकर उत्तर प्रदेश का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। प्रदेश में इन उत्पादों के निर्माण, पैकेजिंग, और कारोबार में गुणवत्ता के कड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग की इस सख्त कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले तत्वों पर लगाम लगाना और पूरी निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
लाइसेंस और कारोबार की श्रेणियां हुईं तय
नए नियमों के मुताबिक, न्यूट्रास्यूटिकल्स सेक्टर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी इकाई को अपने कारोबार के प्रकार और उत्पाद श्रेणी के अनुसार एफएसएसएआई (FSSAI) से वैध लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना उचित अनुमति के निर्माण, री-लेबलिंग, री-पैकिंग, आयात या वितरण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कारोबारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल उन्हीं श्रेणियों के तहत व्यापार करें, जिसकी उन्हें आधिकारिक अनुमति मिली हुई है।
विभाग ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स और अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों को किसी भी कीमत पर 'दवा' या 'औषधि' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इन उत्पादों की संरचना और उपयोग का उद्देश्य ऐसा होना चाहिए जो इन्हें मेडिकल ड्रग्स से पूरी तरह अलग रखे। किसी भी उत्पाद में हार्मोन, स्टेरॉयड, मादक पदार्थ या कृत्रिम औषधीय सक्रिय अवयवों (Active Pharmaceutical Ingredients) का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
कच्चे माल और अनुसूचियों की सख्त पाबंदियां
उत्पादों के निर्माण में केवल उन्हीं सामग्रियों का उपयोग किया जा सकेगा, जिन्हें खाद्य प्राधिकरण की निर्धारित अनुसूचियों में जगह दी गई है। इसे चार मुख्य भागों में बांटा गया है:
- अनुसूची-1: विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व।
- अनुसूची-2: पौधे और उनसे जुड़ी वनस्पतियां।
- अनुसूची-3: विशिष्ट अणु, पृथक पदार्थ और अर्क।
- अनुसूची-4: प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक तत्व।
निर्माताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि उनके पास अर्क के अनुपात, दैनिक उपयोग की सीमा, विलायक (Solvent) के प्रकार और मानकीकरण से जुड़े सभी तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए। यदि कोई गैर-अनुमोदित विलायक या प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो उसके लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी होगा।
स्वास्थ्य से जुड़े दावों और विज्ञापनों पर कड़ी नजर
आज के समय में विज्ञापनों के जरिए बड़े-बड़े दावे करने का चलन आम हो गया है, लेकिन नए नियमों के बाद कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी उत्पाद के सेवन से विशेष स्वास्थ्य लाभ का दावा किया जाता है, तो उसके लिए खाद्य प्राधिकरण की पूर्व अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, किसी भी उत्पाद के लेबल या प्रचार में यह दावा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है कि वह किसी बीमारी को रोक सकता है, ठीक कर सकता है, या उसके प्रभाव को कम कर सकता है। यह नियम प्रिंट, डिजिटल, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर एक समान रूप से लागू होगा।
विटामिन और खनिजों की मात्रा को लेकर भी सीमा तय कर दी गई है। उत्पाद में इनकी मात्रा एफएसएसएआई और आईसीएमआर-एनआईएन द्वारा निर्धारित 100 प्रतिशत अनुशंसित दैनिक मात्रा (RDA) से अधिक नहीं होनी चाहिए। दैनिक सेवन की गणना पूरे दिन की कुल खपत के आधार पर की जाएगी, न कि केवल एक टैबलेट या कैप्सूल के हिसाब से।
लेबलिंग और चेतावनियों को लेकर स्पष्ट निर्देश
उत्पादों के डिब्बों या पैकेट पर दी जाने वाली जानकारियां अब बेहद स्पष्ट और बड़े अक्षरों में लिखनी होंगी। ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर भी इन चेतावनियों को दिखाना अनिवार्य किया गया है:
- "औषधीय उपयोग के लिए नहीं" (Not for Medicinal Use)
- "अनुशंसित दैनिक मात्रा से अधिक न लें"
- लक्षित आयु वर्ग और सेवन के स्पष्ट निर्देश
- बच्चों की पहुंच से दूर रखने की चेतावनी
- विविध आहार के विकल्प के रूप में इस्तेमाल न करने की घोषणा
विशेष चिकित्सा उद्देश्य वाले उत्पादों के मामले में यह लिखना अनिवार्य होगा कि इनका उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह के अंतर्गत ही किया जाना चाहिए। ऐसे उत्पादों का खुलेआम आम जनता के बीच विज्ञापन करना भी वर्जित है।
गुणवत्ता जांच और असुरक्षित बैच की वापसी
नियामक एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि तैयार उत्पादों में सक्रिय अवयवों, भारी धातुओं (जैसे सीसा, पारा, कैडमियम और आर्सेनिक), सूक्ष्मजीवों और कीटनाशक अवशेषों की जांच केवल एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त एनएबीएल (NABL) प्रयोगशालाओं से ही कराई जानी चाहिए। साथ ही, कच्चे माल के हर बैच के लिए विश्लेषण प्रमाणपत्र (COA) और सप्लाई चेन का पूरा रिकॉर्ड रखना कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
यदि किसी स्तर पर कोई बैच असुरक्षित पाया जाता है, तो कंपनियों के पास एक मजबूत 'प्रोडक्ट रिकॉल' (उत्पाद वापसी) सिस्टम होना चाहिए, ताकि तुरंत बाजार से माल वापस खींचा जा सके। आयातित उत्पादों और विदेशी कंपनियों द्वारा देश के जैव संसाधनों के इस्तेमाल के मामले में भी संबंधित राष्ट्रीय प्राधिकरणों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।