महाराष्ट्र के सुदूर और आदिवासी बहुल गड़चिरोली जिले से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते जिले का भामरागड़ इलाका पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट चुका है और एक टापू में तब्दील हो गया है। स्थानीय नदियों, खासकर पर्लकोटा और इंद्रावती के जलस्तर में अचानक भारी इजाफा होने के कारण दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिला प्रशासन से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस आपदा के बीच त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 525 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
पर्लकोटा और इंद्रावती नदियों का रौद्र रूप
सितंबर 2026 के इस आखिरी हफ्ते में मानसून की विदाई से ठीक पहले प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भामरागड़ तहसील से गुजरने वाली पर्लकोटा नदी और इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते घरों और सड़कों पर कई फीट पानी भर गया, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश का सीधा असर इन नदियों के बहाव पर पड़ा है। पानी का वेग इतना तेज है कि ग्रामीण इलाकों में आवागमन के तमाम रास्ते बंद हो चुके हैं। पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण परिवहन के साधन पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
63 गांवों का संपर्क कटा, प्रशासनिक मशीनरी अलर्ट पर
इस भयंकर बाढ़ के कारण भामरागड़ क्षेत्र के लगभग 63 गांवों का जिला मुख्यालय और अन्य नजदीकी कस्बों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित होने से हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गए हैं। गांवों के भीतर फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बना हुआ है।
हालाँकि, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राहत कार्यों की मॉनिटरिंग खुद वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं ताकि राहत सामग्रियों और बचाव दलों को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों तक भेजा जा सके।
SDRF और स्थानीय टीमों का साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन
मुश्किल हालात के बीच राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय बचाव टीमों ने देवदूत बनकर मोर्चा संभाला है। जलभराव और तेज बहाव के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने अथक प्रयास करते हुए अब तक 525 नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में शिफ्ट किया है।
- प्रमुख बचाव कार्य:
- पर्लकोटा और इंद्रावती के बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 525 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
- SDRF की विशेष टीमों ने बोट्स का इस्तेमाल कर फंसे हुए ग्रामीणों को रेस्क्यू किया।
- राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
दो गंभीर मरीजों के लिए बनी जीवनरेखा
बाढ़ के इस तांडव के बीच एक मानवीय संवेदना और त्वरित कार्रवाई का वाकया भी सामने आया है। भामरागड़ के बाढ़ प्रभावित और कटे हुए इलाकों में अचानक दो लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। चारों तरफ पानी भरा होने और संपर्क टूटने के कारण उनका अस्पताल पहुंचना असंभव सा लग रहा था।
ऐसे समय में SDRF की टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक विशेष अभियान चलाया। टीम ने बोट और स्थानीय संसाधनों की मदद से दोनों गंभीर मरीजों को उफनती धाराओं के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला और बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। समय पर इलाज मिलने से दोनों की जान बचाई जा सकी, जिसकी स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है।
प्रशासन की अपील और आगे की चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ घंटों तक इलाके में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट रूप से अपील की है कि:
- लोग उफनती नदियों या पुलों को पार करने की बिल्कुल कोशिश न करें।
- प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश मिलते ही तुरंत सहयोग करें।
- किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष (Control Room) से संपर्क करें।
भामरागड़ की यह घटना एक बार फिर मानसून के आखिरी दौर में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और उनसे निपटने की तैयारियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। फिलहाल, राहत और बचाव का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और सरकार स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पाने का प्रयास कर रही है।