पंजाब के रियल एस्टेट सेक्टर और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े में शिकंजा कसना शुरू किया। मामला गमाडा (GMADA - Greater Mohali Area Development Authority) की नीलामी साइटों से जुड़े लगभग 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है। संघीय जांच एजेंसी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं की गहरी परतों को खंगालने के लिए एक साथ पंजाब और दिल्ली-एनसीआर के कुल 26 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।
सुबह-सुबह शुरू हुई केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार को सुबह तड़के ही ईडी के अधिकारियों की टीमों ने भारी सुरक्षा बल के साथ विभिन्न ठिकानों पर दस्तक दी। यह कार्रवाई इतनी गोपनीय और सुनियोजित थी कि किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। पंजाब के मोहाली, चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) यानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में उन लोगों और फर्मों के ठिकानों को खंगाला जा रहा है, जिन पर इस घोटाले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होने का शक है।
जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला गमाडा की महंगी और प्राइम लोकेशन वाली संपत्तियों की नीलामी में की गई भारी हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर और सिंडिकेट बनाकर नीलामी प्रक्रियाओं में धांधली की गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी-भरकम नुकसान हुआ।
क्या है पूरा गमाडा नीलामी विवाद?
गमाडा पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण विकास प्राधिकरणों में से एक है, जो मोहाली और उसके आसपास के क्षेत्रों में शहरी विकास और योजना का काम संभालता है। समय-समय पर प्राधिकरण द्वारा कमर्शियल और रेजिडेंशियल भूखंडों की खुली नीलामी की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में इन नीलामियों के दौरान कुछ खास लोगों या सिंडिकेट्स द्वारा भारी मात्रा में संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने और बाद में बाजार में कृत्रिम तेजी या मिलीभगत के संकेत मिले थे।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि इस प्रक्रिया में कागजों पर हेराफेरी की गई, बीडी और बोली लगाने के नियमों में सेंध लगाई गई और कुछ प्रभावशाली लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इन अनियमितताओं के कारण सरकारी राजस्व को लगभग 100 करोड़ रुपये का चूना लगा, जिसकी जांच अब केंद्रीय एजेंसियों के हाथ में है।
इन ठिकानों पर टिकी हैं सबकी निगाहें
ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में कई बड़े रियल एस्टेट कारोबारी, कुछ पूर्व और वर्तमान अधिकारी तथा संदिग्ध बिचौलिए (कमर्शियल एजेंट्स) आए हैं। छापेमारी के दौरान टीम दस्तावेजों, डिजिटल एविडेंस, बैंक खातों के विवरण और संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़े कागजातों को बारीकी से खंगाल रही है।
- मोहाली और चंडीगढ़: मुख्य कारोबारी ठिकाने और कुछ पूर्व अधिकारियों के आवास।
- पंजाब के अन्य शहर: लुधियाना और जालंधर में इस घोटाले से जुड़े नेटवर्क के संदिग्ध ठिकाने।
- दिल्ली-एनसीआर: वे फर्जी और मुखौटा कंपनियां (Shell Companies) जिनके जरिए काले धन को सफेद करने या पैसों के लेन-देन का खेल खेला गया था।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मची खलबली
इस छापेमारी के बाद से पंजाब के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है। इस बात की अटकलें तेज हो गई हैं कि जैसे-जैसे ईडी के हाथ दस्तावेज लगेंगे, इस घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय एजेंसियों ने पंजाब में वित्तीय अनियमितताओं पर अपना शिकंजा कसना और तेज कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी, लेकिन फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल रेड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
आगे क्या हो सकता है?
छापेमारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईडी जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फारेंसिक जांच करेगी। इसके बाद पूछताछ के लिए संदिग्धों को समन भेजने का सिलसिला शुरू होगा। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत हाथ लगते हैं, तो आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां भी देखने को मिल सकती हैं। देश की इस शीर्ष जांच एजेंसी की नजर अब इस बात पर है कि घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड कौन था और इस अवैध कमाई को कहां-कहां निवेश किया गया है।