Breaking
► रक्षाबंधन से पहले सुशांत को याद कर भावुक हुईं बहन श्वेता, शेयर की बचपन की अनदेखी यादें ► आशा भोसले का आखिरी गाना: 'ओम का हरी' में होगा रिलीज, फैंस के लिए इमोशनल पल ► नेपाल में बाढ़ का तांडव: 359 मौतें, पीड़ितों के लिए ‘वन-डोर पॉलिसी’ लॉन्च ► रक्षाबंधन से पहले शेयर बाजार में आई बहार, सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत चाल ► रक्षाबंधन से पहले धड़ाम हुए सोने-चांदी के भाव, ₹2000 तक की बड़ी गिरावट ► रक्षा बंधन 2026: जानिए कब है सही मुहूर्त, भद्रा का साया और पूजा विधि ► रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और सही नियम ► रक्षा बंधन 2026: इस बार भाई-बहन के इस पावन पर्व पर अपनाएं ये 3 अनोखे और आधुनिक तरीके ► सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ का कर्ज सिर्फ साढ़े 6 करोड़ में सेटल! ► ट्रेन के अंदर रेलवे कर्मचारियों ने किया ऐसा धमाकेदार महिला संगीत, वीडियो देख झूम उठे लोग ► रक्षाबंधन से पहले सुशांत को याद कर भावुक हुईं बहन श्वेता, शेयर की बचपन की अनदेखी यादें ► आशा भोसले का आखिरी गाना: 'ओम का हरी' में होगा रिलीज, फैंस के लिए इमोशनल पल ► नेपाल में बाढ़ का तांडव: 359 मौतें, पीड़ितों के लिए ‘वन-डोर पॉलिसी’ लॉन्च ► रक्षाबंधन से पहले शेयर बाजार में आई बहार, सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत चाल ► रक्षाबंधन से पहले धड़ाम हुए सोने-चांदी के भाव, ₹2000 तक की बड़ी गिरावट ► रक्षा बंधन 2026: जानिए कब है सही मुहूर्त, भद्रा का साया और पूजा विधि ► रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और सही नियम ► रक्षा बंधन 2026: इस बार भाई-बहन के इस पावन पर्व पर अपनाएं ये 3 अनोखे और आधुनिक तरीके ► सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ का कर्ज सिर्फ साढ़े 6 करोड़ में सेटल! ► ट्रेन के अंदर रेलवे कर्मचारियों ने किया ऐसा धमाकेदार महिला संगीत, वीडियो देख झूम उठे लोग

रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और सही नियम

रक्षाबंधन 2026: जानिए राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और सही नियम

भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और जीवनभर के साथ का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। साल 2026 में यह पावन पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र, सफलता और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षाबंधन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, सावन मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे होगा। उदया तिथि और पूर्णिमा के संयोग के चलते मुख्य रूप से 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

राखी बांधने के मुख्य मुहूर्त

  • प्रातःकाल शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक (यह समय अनुष्ठान के लिए सबसे उत्तम है, क्योंकि इस समय तक भद्रा काल भी समाप्त हो चुका होगा)।
  • दोपहर का विकल्प (अपराह्न मुहूर्त): दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक।

किस समय भूलकर भी न बांधें राखी? (राहुकाल)

ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को राहुकाल के दौरान करने की मनाही होती है। रक्षाबंधन के दिन सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। अतः इस समयावधि में भूलकर भी राखी न बांधें।

रक्षाबंधन का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

संस्कृत शब्द 'रक्षाबंधन' का अर्थ है 'सुरक्षा का बंधन'। यह सिर्फ एक धागा नहीं है, बल्कि दो दिलों के बीच आपसी समर्पण और जिम्मेदारी का प्रतीक है। आज के समय में इस पर्व का दायरा केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सार्वभौमिक भाईचारे, दूर के रिश्तेदारों, दोस्तों और समाज के अन्य लोगों के साथ भी स्नेह के बंधन को मजबूत करता है।

पूजा की थाली और पारंपरिक अनुष्ठान

रक्षाबंधन के दिन अनुष्ठान की शुरुआत एक विशेष थाली तैयार करने से होती है। आइए जानते हैं इसके चरण:

  • पूजा थाली सजाना: थाली में राखी, रोली (सिंदूर), अक्षत (अतूट चावल के दाने), मिठाइयां और एक जलता हुआ दीपक (घी का दीया) रखा जाता है।
  • तिलक लगाना: बहन अपनी दाहिने हाथ की अनामिका उंगली (Ring Finger) से भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाती है और समृद्धि के प्रतीक के रूप में उस पर चावल के कुछ दाने (अक्षत) चिपकाती है।
  • आरती उतारना: इसके बाद बहन भाई की आरती उतारती है ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो और जीवन में सकारात्मकता व दिव्य प्रकाश का आगमन हो।
  • रक्षा सूत्र बांधना: बहनें भाई की दाहिने कलाई पर पवित्र राखी बांधती हैं और उनके उज्जवल भविष्य की प्रार्थना करती हैं।
  • मुंह मीठा करना और उपहार: अंत में भाई-बहन एक-दूसरे का मुंह मीठा कराते हैं और भाई अपनी बहन को उपहार या नेग देता है।

रक्षाबंधन से जुड़ी ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं

  • भारतीय संस्कृति में इस पर्व के इतिहास से जुड़ी कई प्रसिद्ध कथाएं मिलती हैं, जो इसके महत्व को और अधिक गहरा करती हैं:

कृष्ण और द्रौपदी की कथा

  • महाभारत काल की एक घटना के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से अपनी उंगली काट ली थी, तब द्रौपदी ने तुरंत अपनी सिल्क की साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनके घाव पर बांध दिया था ताकि खून बहना रुक जाए। इस स्नेह से अभिभूत होकर भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को संकट के समय हरसंभव रक्षा करने का वचन दिया था, जिसे उन्होंने चीरहरण के समय निभाया भी।

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं

  • मध्यकालीन इतिहास में चित्तौड़गढ़ की रानी कर्णावती द्वारा मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजने की घटना बहुत प्रसिद्ध है। जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण करने की धमकी दी, तब रानी कर्णावती ने हुमायूं को एक राखी भेजी और अपनी रक्षा की गुहार लगाई। अलग धर्म के होने के बावजूद सम्राट हुमायूं ने इस पवित्र रिश्ते का मान रखा और रानी की रक्षा के लिए अपनी सेना लेकर निकल पड़े थे।

निष्कर्ष

  • रक्षाबंधन का यह पावन पर्व हमें हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का अहसास कराता है। साल 2026 में सही मुहूर्त का ध्यान रखते हुए इस पर्व को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाएं, ताकि यह दिन आपके और आपके परिवार के लिए मंगलकारी साबित हो।

About the Author

एडमिनिस्ट्रेशन

एडमिनिस्ट्रेशन

Administration (प्रबंधन एवं संचालन)

एडमिनिस्ट्रेशन टीम पर्दे के पीछे रहकर पूरे न्यूज़ प्लेटफॉर्म को सुचारू रूप से चलाने का काम करती है। तकनीकी प्रबंधन, कंटेंट पब्लिशिंग और सिस्टम की न...

Read More