उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्थानीय लोगों की सांसें कुछ पलों के लिए थाम दी थीं। चौरीचौरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आमकोल गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सैकड़ों गैस सिलेंडरों से लदे एक भारी-भरकम ट्रक के केबिन में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई। गनीमत यह रही कि समय रहते दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया, जिससे एक भीषण प्राकृतिक या मानव जनित आपदा टल गई।
कैसे शुरू हुआ यह पूरा घटनाक्रम?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आमकोल गांव के निवासी संगम पुत्र रामनरेश कमर्शियल गैस सप्लाई के क्षेत्र में वाहन चालक का काम करते हैं। वह भारत गैस की एक गाड़ी के मुख्य चालक हैं। घटना से एक दिन पहले, वह बैतालपुर से लगभग 370 गैस सिलेंडरों से भरे हुए ट्रक को लेकर अपने पैतृक गांव आमकोल पहुंचे थे।
नियमों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर, ट्रक को गांव के ही एक सार्वजनिक पोखरे (तालाब) के समीप खड़ा कर दिया गया था और चालक अपने घर चला गया था। योजना के मुताबिक, इस गैस लदे ट्रक को अगले दिन यानी शनिवार की सुबह पिपराइच स्थित मुख्य गैस एजेंसी पर ले जाया जाना था, लेकिन उससे पहले ही सुबह-सवेरे एक बड़ी तकनीकी खामी ने इस खतरनाक स्थिति को जन्म दे दिया।
शॉर्ट सर्किट बना आग की मुख्य वजह
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार के शुरुआती पहर में ट्रक के केबिन के अंदर अचानक शॉर्ट सर्किट हो गई। चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और केबिन का हिस्सा आग की चपेट में आ गया। चूंकि ट्रक के पिछले हिस्से में तीन सौ से अधिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर लदे हुए थे, इसलिए आग की लपटों को देखकर आसपास के घरों के लोग तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए।
आग की गर्मी और लपटों को देखकर कुछ ही मिनटों में पूरा गांव मौके पर इकट्ठा हो गया। लोगों के मन में यह डर बैठ गया था कि अगर आग की यह लपटें सिलेंडरों तक पहुंच जातीं, तो एक साथ सैकड़ों सिलेंडर किसी बम की तरह फट सकते थे और इसका दायरा कई किलोमीटर तक भारी तबाही मचा सकता था।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और राहत
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड को सूचत किया। सूचना मिलते ही चौरीचौरा के क्षेत्राधिकारी (CO) कुंदन सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही दमकल विभाग की गाड़ियां भी सायरन बजाते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं।
फायर कर्मियों ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला और पानी की बौछार कर आग को आगे बढ़ने से रोक लिया। काफी कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। सीओ चौरीचौरा कुंदन सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि शुरुआती जांच में आग लगने का कारण केबिन में शॉर्ट सर्किट होना पाया गया है। समय रहते कदम उठाए जाने के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: आबादी के बीच क्यों खड़े होते हैं खतरनाक वाहन?
इस घटना के टल जाने के बाद जहां प्रशासन ने राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर आमकोल गांव के रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का साफ तौर पर आरोप है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है जब इस तरह के खतरनाक और ज्वलनशील पदार्थों से भरे भारी वाहन रिहायशी इलाकों के भीतर खड़े किए गए हों।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन दो से तीन गैस से भरी बड़ी गाड़ियां गांव की तंग गलियों और पोखरे के पास खड़ी कर दी जाती हैं। इन गाड़ियों में अत्यधिक दबाव वाले गैस सिलेंडर भरे होते हैं, जो गर्मियों या तकनीकी खराबी के चलते कभी भी बड़े खतरे का सबब बन सकते हैं। ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि रात के समय इन गाड़ियों की निगरानी करने वाला कोई नहीं होता, जिससे सुरक्षा को लेकर हमेशा एक तलवार लटकी रहती है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
आमकोल गांव की इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से पुरजोर मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। ग्रामीणों ने ज्ञापननुमा मांग रखी है कि:
- आबादी वाले और घनी बस्तियों के बीच गैस या अन्य ज्वलनशील पदार्थों से भरे भारी वाहनों के खड़े होने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट मालिकों के लिए कड़े नियम बनाए जाएं ताकि वे अपने वाहन सुरक्षित स्थानों या निर्धारित पार्किंग जोन में ही पार्क करें।
- लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों और एजेंसी संचालकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानकों पर खड़े होते हैं सवाल
यह घटना देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खतरनाक सामग्रियों के परिवहन और पार्किंग को लेकर बरती जाने वाली लापरवाहियों की पोल खोलती है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के नियमों के अनुसार ज्वलनशील गैस सिलेंडरों के परिवहन और ठहराव के लिए बेहद कड़े प्रोटोकॉल तय किए गए हैं। बावजूद इसके, कई बार चालक शॉर्टकट अपनाने या अपने घर के नजदीक गाड़ी खड़ी करने के चक्कर में नियमों को ताक पर रख देते हैं।
फिलहाल, आमकोल गांव के लोगों ने इस हादसे से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन से ठोस कदम उठाने की उम्मीद जताई है। गनीमत यह रही कि इस बार एक बड़ा अनर्थ होने से बच गया, लेकिन यह घटना प्रशासन और ट्रांसपोर्टरों दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी जरूर है।