बिहार के तकनीकी शिक्षा परिदृश्य में एक ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल देगा। आज के दौर में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के इर्द-गिर्द घूम रही है, तब बिहार सरकार ने भी समय के साथ कदम ताल मिलाते हुए एक बेहद महत्वाकांक्षी और आधुनिक रोडमैप तैयार किया है। इस नए एक्शन प्लान का मुख्य उद्देश्य राज्य के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों को केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र न रखकर, बल्कि इनोवेशन और रिसर्च के ग्लोबल हब के रूप में विकसित करना है।
समीक्षा बैठक और 98 प्रतिशत नामांकन का बड़ा मील का पत्थर
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कमर कस ली है। हाल ही में विभाग की मंत्री श्रीमती शीला कुमारी ने राज्यभर के सभी राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर बुनियादी ढांचे और छात्रों के प्लेसमेंट तक हर एक पहलू पर बारीकी से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद उत्साहजनक हैं। विभाग के अनुसार, राज्य के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में उपलब्ध कुल सीटों के मुकाबले 98 प्रतिशत नामांकन का शानदार लक्ष्य हासिल किया गया है। सत्र 2022-23 की तुलना में यह प्रगति इस बात का प्रमाण है कि युवाओं का रुझान अब पारंपरिक कोर्स के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
NBA मान्यता की दिशा में ऐतिहासिक कदम
शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को परखने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (NBA) की मान्यता का होना किसी भी संस्थान के लिए बहुत मायने रखता है। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 11 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों की 20 शाखाओं को पहले ही NBA की प्रतिष्ठित मान्यता मिल चुकी है। इसके अलावा, 32 संस्थानों के 42 कार्यक्रमों का मूल्यांकन अभी प्रक्रियाधीन है, जिससे आने वाले दिनों में तकनीकी शिक्षा का स्तर देश के बेहतरीन संस्थानों के समकक्ष खड़ा नजर आएगा।
रिसर्च फंड में कई गुना भारी इजाफा: अब मिलेंगे 30 लाख तक
बिहार के तकनीकी संस्थानों में अभी तक रिसर्च और इनोवेशन के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट सीमित फंड हुआ करती थी। इस समस्या की थाह लेते हुए सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में शोध संस्कृति को पंख देने के लिए रिसर्च फंड में जबरदस्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
- पुरानी व्यवस्था: प्रति परियोजना महज 2 से 3 लाख रुपये तक की राशि मिलती थी।
- नई प्रस्तावित व्यवस्था: इसे सीधे बढ़ाकर 20 से 30 लाख रुपये प्रति परियोजना करने का ठोस प्रस्ताव है।
- प्राथमिक क्षेत्र: इस फंड के जरिए मुख्य रूप से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डेटा साइंस, GIS, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे अत्याधुनिक विषयों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह कदम राज्य के मेधावी छात्रों और प्रोफेसरों को वैश्विक स्तर की रिसर्च करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही ग्लोबल प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशंस तैयार हो सकेंगे।
दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना: मुजफ्फरपुर और भागलपुर को सौगात
उच्च प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को और अधिक स्वायत्तता और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार ने दो नए विशिष्ट विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है।
उत्तरी बिहार के प्रमुख केंद्र मुजफ्फरपुर में 'शहीद जुब्बा साहनी आर्किटेक्चरल एवं सिविल विश्वविद्यालय' की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वहीं, भागलपुर में तकनीकी शिक्षा को एक नई दिशा देने के लिए 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय' की स्थापना की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। ये दोनों विश्वविद्यालय आने वाले समय में देश के तकनीकी मानचित्र पर बिहार को एक मजबूत पहचान दिलाएंगे।
वैश्विक स्तर के लिए तैयार हो रहे हैं बिहारी छात्र
केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर छात्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियों के लिए तैयार करने की बड़ी तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार ने दिग्गज टेक कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है:
- गूगल (Google) समन्वय: शिक्षकों के उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए गूगल के साथ मिलकर विशेष प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) सहयोग: पाठ्यक्रम (Curriculum) को आधुनिक और AI-बेस्ड डिजाइन करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- विदेशी भाषाएं और एक्सपोजर: छात्रों को अंतरराष्ट्रीय जॉब मार्केट में आसानी से प्लेसमेंट मिल सके, इसके लिए जर्मन, फ्रेंच और जापानी भाषा का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट पर भेजने की भी योजना है।
पूर्णिया, मोतिहारी और जमुई में नए तारामंडल का प्रस्ताव
विज्ञान के प्रति बच्चों और युवाओं में जिज्ञासा बढ़ाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी पूरा ध्यान केंद्रित किया है। पूर्णिया, मोतिहारी और जमुई में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए तारामंडल स्थापित करने के प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे जा चुके हैं। इसके साथ ही, रिमोट सेंसिंग सेंटर, बायोटेक्नोलॉजी, नैनोटेक्नोलॉजी और स्पेस पॉलिसी जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में भी रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विभाग में कामकाज की रफ्तार और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए बेल्ट्रॉन (BELTRON) के माध्यम से 'यंग प्रोफेशनल्स' की बहाली प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है।
छात्रों की हर समस्या का समाधान: हॉस्टल से लेकर शत-प्रतिशत प्लेसमेंट तक
समीक्षा बैठक में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों की रोजमर्रा की सुविधाओं और कॉलेज परिसरों में उनकी उपस्थिति (Attendance) पर भी कड़ाई से चर्चा की गई। जिन राजकीय संस्थानों में फिलहाल अपने छात्रावास (Hostels) उपलब्ध नहीं हैं, वहां सरकार किराए पर मकान लेकर स्टूडेंट्स को सुरक्षित और आरामदायक हॉस्टल सुविधा मुहैया कराएगी।
प्लेसमेंट के मोर्चे पर एक मिसाल पेश करते हुए मधुबनी पॉलिटेक्निक कॉलेज ने शत-प्रतिशत (100%) प्लेसमेंट का रिकॉर्ड दर्ज किया है। इस सफलता से प्रेरित होकर विभाग अब मिशन मोड में काम कर रहा है ताकि राज्य के अन्य पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों से पास होने वाले हर छात्र के हाथ में बेहतर रोजगार का अवसर हो।
बिहार का यह नया तकनीकी रोडमैप इस बात का सुबूत है कि राज्य अब पारंपरिक शिक्षा के दायरे से निकलकर भविष्य की तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले कुछ वर्षों में यह बदलाव बिहार को देश का एक प्रमुख तकनीकी एजुकेशन हब बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।