ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक प्रतिष्ठित आवासीय सोसाइटी इन दिनों किसी हॉरर फिल्म के सेट जैसी नजर आ रही थी। यहां रहने वाले लोग अपनी बालकनी में जाने से भी डर रहे थे, और इसकी वजह कोई चोर या लुटेरा नहीं, बल्कि प्रकृति के अजीब मिजाज वाले जीव यानी उल्लू थे। पिछले कुछ दिनों से इस हाई-राइज सोसाइटी में उल्लुओं के एक झुंड ने ऐसा आतंक मचाया कि निवासियों की रातों की नींद उड़ गई।
ला रेसिडेंशिया सोसाइटी में फैला डर का माहौल
मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित लोकप्रिय 'ला रेसिडेंशिया' (La Residencia) सोसाइटी का है। यहां रहने वाले लोगों के लिए शाम ढलने के बाद घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया था। सोसाइटी परिसरों में टहलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को इन पक्षियों ने अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। कई लोगों पर अचानक हुए इन हमलों से स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया था।
सोसाइटी के निवासियों का कहना था कि पिछले कुछ दिनों से उल्लुओं का एक समूह आक्रामक हो गया था। जैसे ही कोई व्यक्ति टावर के पास या हरे-भरे क्षेत्र में से गुजरता, ये पक्षी अचानक पेड़ों या ऊंची छतों से गोता लगाते और सिर पर वार कर देते थे। कई लोगों को इन हमलों में मामूली चोटें भी आईं, जिसके बाद सोसाइटी में दहशत का माहौल बन गया।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और रेस्क्यू ऑपरेशन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोसाइटी के प्रबंधन और निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग (Forest Department) को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हालात का जायजा लिया और इन आक्रामक पक्षियों को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित अभियान शुरू किया।
कड़ी मशक्कत और घंटों की छानबीन के बाद वन विभाग के कर्मियों ने सोसाइटी परिसर से कुल 7 उल्लुओं को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की। गनीमत यह रही कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान किसी भी पक्षी या इंसान को गंभीर चोट नहीं आई।
क्यों आक्रामक हो जाते हैं उल्लू? जानिए इसके पीछे की वजह
प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि उल्लू आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। वे बेहद शर्मीले और निशाचर जीव होते हैं, जो अपनी ही दुनिया में मस्त रहते हैं। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है:
- प्रजनन का मौसम (Breeding Season): साल के इस समय में उल्लू अपने बच्चों (Nestlings) की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं। यदि उन्हें लगता है कि कोई उनके घोंसले के करीब आ रहा है, तो वे बचाव की मुद्रा में हमला कर देते हैं।
- मानव बस्तियों का विस्तार: जंगलों और प्राकृतिक आवासों के कटने के कारण वन्यजीवों के पास इंसानी बस्तियों में आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। वे ऊंची इमारतों और सोसाइटी के पेड़ों को अपना नया आशियाना बना लेते हैं।
- गलतफहमी या आत्मरक्षा: कई बार लोग अनजाने में उनके करीब चले जाते हैं, जिसे उल्लू अपनी सुरक्षा पर खतरा मान लेते हैं।
सोसाइटी के लोगों ने ली राहत की सांस
वन विभाग द्वारा सभी 7 उल्लुओं को पकड़कर सुरक्षित जंगल या उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की प्रक्रिया के बाद ला रेसिडेंशिया सोसाइटी के निवासियों ने चैन की सांस ली है। लोगों का कहना है कि अब वे बिना किसी डर के सोसाइटी परिसर में घूम पा रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर पर्यावरण और इंसानी बस्तियों के बीच संतुलन पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन की अपील
इस घटना के बाद वन्यजीव अधिकारियों ने आसपास की अन्य सोसाइटियों के लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें इस तरह की कोई भी समस्या दिखाई दे, तो वे तुरंत वन विभाग को सूचित करें। किसी भी वन्यजीव को खुद नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेना ही समझदारी है।