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GST अधिकारियों का बड़ा खेल: डेढ़ करोड़ की घूस, फिर चालीस लाख में तय हुआ सौदा

GST अधिकारियों का बड़ा खेल: डेढ़ करोड़ की घूस, फिर चालीस लाख में तय हुआ सौदा

भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त प्रशासनिक लड़ाई के बीच देश के आर्थिक गलियारों से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के कर विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दो बड़े अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वतखोरी के आरोप में रंगे हाथों दबोच लिया गया। इस सनसनीखेज मामले की जो परतें खुली हैं, उन्होंने महकमे के भीतर चल रहे अवैध वसूली के एक बड़े खेल को उजागर कर दिया 1.50 करोड़ से शुरू हुई थी बात, 40 लाख पर आकर रुकी डीलजांच एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, पूरा मामला किसी सामान्य लेन-देन का नहीं, बल्कि कर चोरी से जुड़े एक बड़े प्रकरण को दबाने के एवज में भारी-भरकम घूसखोरी का है। आरोपी अधिकारियों ने प्रभावित पक्ष से शुरुआत में डेढ़ करोड़ रुपये (1.50 करोड़) की भारी-2 रकम की डिमांड रखी थी। मामला जब बातचीत के दौर से गुजरा और सौदेबाजी हुई, तो यह डील अंततः 40 लाख रुपये पर आकर तय हुई।

हालांकि, भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल लोगों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी इस अवैध गतिविधियों पर कानून की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। पीड़ित या इस मामले से जुड़े अन्य पक्षों द्वारा की गई गुप्त शिकायत के आधार पर सतर्कता एजेंसियों ने जाल बिछाना शुरू कर दिया थाकैसे खुला भ्रष्टाचार का यह पूरा राज?

किसी भी सिस्टम में जब दीमक की तरह भ्रष्टाचार फैल जाता है, तो उसे रोकने के लिए अंदरूनी और बाहरी दोनों स्तरों पर चौकसी बढ़ानी पड़ती है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब संबंधित करदाताओं पर अनावश्यक दबाव बनाकर भारी रिश्वत की मांग की जाने लगी, तो उन्होंने चुप बैठने के बजाय सीधे भ्रष्टाचार रोधी तंत्र का दरवाजा खटखटाया।

शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी गोपनीय विंग को सक्रिय किया। मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए हर एक कदम बेहद सावधानी से उठाया गया। प्रारंभिक पड़ताल में जब प्रथम दृष्टया अधिकारियों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत हाथ लगे, तो एक सुनियोजित ऑपरेशन को अंजाम देने की रूपरेखा तैयार की गछापेमारी और गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम

नियोजित योजना के तहत, जब घूस की पहली या तयशुदा किस्त का आदान-प्रदान होना था, तभी जांच दल ने तय ठिकाने पर दबिश दे दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से दोनों आरोपी अधिकारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। एजेंसी के अधिकारियों ने मौके से ही दोनों को हिरासत में ले लिया और उनके दफ्तर तथा ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

  • प्रमुख बिंदु जो इस कार्रवाई को बनाते हैं अहम:
  • मांग की गई राशि: डेढ़ करोड़ रुपये (1,50,00,000 रुपये)अंतिम सौदा: 40 लाख रुपये पर तय हुआ मामला।
  • कार्रवाई करने वाली एजेंसी: भ्रष्टाचार रोधी एवं केंद्रीय जांच दल।
  • प्रभावित क्षेत्र: महाराष्ट्र का प्रमुख कर वसूली जोन।

विभाग की साख पर लगा बड़ा बट्टायह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार कर प्रशासन को पारदर्शी, डिजिटल और जनता के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में, विभाग के जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा ही इस तरह की अवैध वसूली में संलिप्त पाया जाना पूरी व्यवस्था के लिए एक बड़ा आघात है। आम जनता और कारोबारियों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए।

व्यापारी संगठनों और उद्योग जगत ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस प्रकार के भ्रष्ट अधिकारी न सिर्फ देश के राजस्व को चूना लगाते हैं, बल्कि ईमानदार कारोबारियों का मानसिक उत्पीड़न भी करते हैं। व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) के दावों को ऐसे कृत्य पलीता लगा देते हैं।आगे की कानूनी कार्रवाई और कड़े संदेश

गिरफ्तार किए गए दोनों जीएसटी अधिकारियों से अब गहन पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। क्या इस वसूली के खेल में कुछ और बड़े चेहरे भी पर्दे के पीछे से अपनी रोटियां सेक रहे थे? इसके अलावा, अधिकारियों की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान इस तरह के अनैतिक तरीकों से कितनी संपत्ति अर्जित की है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत बेहद सख्त धाराओं में मुकदमे चलाए जाएंगे, ताकि यह मामला दूसरे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक बन सके। अदालतों में भी इस तरह के मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।निष्कर्ष

महाराष्ट्र की यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि प्रशासनिक अमले में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। हालांकि, जिस तत्परता और गोपनीयता के साथ एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, वह यह जरूर दर्शाती है कि कानून का हाथ कितना भी लंबा हो, भ्रष्टाचारियों तक पहुंच ही जाता है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और खुलासे होने की पूरी उम्मीद है, जो इस पूरे सिंडिकेट की पोल खोलकर रख देंगे।



ई।


है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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