नेपाल और तिब्बत सीमा पर प्रकृति का ऐसा भयंकर तांडव देखने को मिला है जिसने पूरे उपमहाद्वीप को झकझोर कर रख दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश, पहाड़ों से दरकती चट्टानों और उफान पर आई नदियों ने पड़ोसी देश नेपाल में तबाही का एक नया इतिहास लिख दिया है। इस आपदा के बीच सबसे बड़ी चिंता महाराष्ट्र से नेपाल घूमने गए उन परिवारों के लिए बढ़ गई है, जिनका पिछले कुछ दिनों से अपने परिजनों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महाआपदा की चपेट में आने से महाराष्ट्र के 61 सैलानी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
सैकड़ों सैलानियों के फंसे होने की थी आशंका, 53 सुरक्षित
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) और आपदा प्रबंधन विभाग से मिले शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र से कुल 114 पर्यटक इस वक्त नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में कुदरत के कहर के बीच फंसे हुए थे। राहत की बात यह है कि इनमें से 53 लोगों से प्रशासन और उनके परिजनों का संपर्क साध लिया गया है, और वे सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
लेकिन, इसके विपरीत 61 ऐसे यात्री हैं जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इन पर्यटकों के मोबाइल फोन या तो स्विच ऑफ आ रहे हैं या फिर बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेटवर्क पूरी तरह ठप हो चुका है। इस अनिश्चितता और लंबी खामोशी ने लापता लोगों के परिजनों की नींद उड़ा दी है और वे हर पल टीवी स्क्रीन और फोन पर टकटकी लगाए बैठे हैं।
एकनाथ शिंदे ने खुद संभाली कमान, वीडियो कॉल पर की बात
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने नेपाल के पोखरा क्षेत्र में फंसी शिवसेना की उप जिला प्रमुख मेघा चोरगे और उनके साथियों से सीधे वीडियो कॉल के जरिए लंबी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने वहां के जमीनी हालात का जायजा लिया और फंसे हुए नागरिकों को ढांढस बंधाया।
उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित नागरिकों से बात करते हुए कहा कि, 'आप बिल्कुल घबराएं नहीं। महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर आपको सुरक्षित आपके घर वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही मौसम और रास्ते साफ होंगे, एयरलिफ्ट या अन्य सुरक्षित माध्यमों से उन्हें बाहर निकाला जाएगा।
ग्राउंड जीरो पर उतरे शिवसैनिक, नेपाल के लिए रवाना हुई टीमें
सरकारी तंत्र के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है। एकनाथ शिंदे के स्पष्ट निर्देशों के बाद शिवसेना और युवासेना के वरिष्ठ पदाधिकारी व कार्यकर्ता सीधे नेपाल के लिए रवाना हो चुके हैं। युवासेना से जुड़े राहुल कनाल और अन्य शिवसैनिकों की टीमें इस समय नेपाल के प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत सामग्रियां बांटने और फंसे हुए भारतीयों को ढूंढने का काम कर रही हैं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, नेपाल में फंसे लोगों में मुख्य रूप से महाराष्ट्र के सातारा, महाबलेश्वर और पुणे क्षेत्र के नागरिक शामिल हैं। ये सभी लोग छुट्टियों के दौरान नेपाल की वादियों का लुत्फ उठाने पहुंचे थे, लेकिन किसे पता था कि यह सुहाना सफर एक भयानक डरावने सपने में बदल जाएगा।
केंद्र और राज्य सरकार का साझा रेस्क्यू मिशन
इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार भी पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल सरकार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है, जिसके बाद भारतीय आपदा प्रबंधन दल (NDRF) और नेपाली सेना मिलकर युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
राहत कार्यों से जुड़ी मुख्य बातें:
- एसईओसी (SEOC) की पैनी नजर: महाराष्ट्र का आपदा प्रबंधन विभाग लगातार नेपाल में भारतीय दूतावास के संपर्क में है।
- फंसे लोगों की पहचान: सातारा, पुणे और महाबलेश्वर के पर्यटकों की सूचियां तैयार कर ली गई हैं।
- हेल्पलाइन और संपर्क: परिजनों की मदद के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जहां लगातार अपडेट दिए जा रहे हैं।
- स्थानीय स्तर पर मदद: नेपाल में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों और शिवसेना कार्यकर्ताओं की मदद से भोजन और पानी की व्यवस्था की जा रही है।
मौसम बनी सबसे बड़ी बाधा
बचाव दलों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश है। नेपाल के कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide) के कारण सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं। पुल बह जाने के कारण कई टूरिस्ट स्पॉट्स का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया है। यही वजह है कि रेस्क्यू टीमों को ग्राउंड जीरो तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में यदि मौसम थोड़ा भी साफ होता है, तो हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकालने का अभियान और तेज किया जाएगा।
परिजनों की धड़कनें तेज, उम्मीद की आस बाकी
महाराष्ट्र के उन 61 परिवारों के घरों में इस वक्त सन्नाटा पसरा हुआ है जिनके अपने नेपाल में फंसे हैं। हर गुजरते घंटे के साथ चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ सरकार के कड़े रुख और शिवसैनिकों की जमीनी सक्रियता ने लोगों के दिलों में एक उम्मीद की किरण भी जगाई है। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि उनके अपने सुरक्षित घर लौट आएं।
प्रशासन ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। जैसे ही लापता लोगों के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि होगी, तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा।
