चंद्रपुर जिले के सावली में इन दिनों राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों के साथ-साथ कृषि से जुड़ी तमाम जरूरी चीजों के बढ़ते दामों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने एक विशाल 'जनआक्रोश मोर्चा' निकाला। इस प्रदर्शन में उमड़ी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आम जनता मौजूदा हालात से किस हद तक त्रस्त है। सबसे खास बात यह रही कि मूसलाधार बारिश भी जनता के उत्साह और रोष को डिगा नहीं पाई। बारिश के बीच सड़कों पर उतरी भीड़ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बैलगाड़ी पर सवार होकर नेताओं ने जताया विरोध, शहर बना अखाड़ा
सावली की सड़कों पर निकला यह मोर्चा अपने अनोखे अंदाज की वजह से पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। पारंपरिक प्रदर्शनों से हटकर इस बार कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैलगाड़ी पर सवार होकर शहर का भ्रमण किया। पेट्रोल और डीजल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी और आम आदमी की पहुंच से बाहर होती रोजमर्रा की चीजों के विरोध का यह एक प्रतीकात्मक तरीका था। बैलगाड़ियों के इस काफिले ने सावली के मुख्य मार्गों से होते हुए अपना सफर तय किया, जिसके दोनों ओर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा और महिलाएं समर्थन में खड़े नजर आए।
तेज बारिश के बावजूद जनसैलाब का कम न होना इस बात का स्पष्ट संकेत था कि आम जनता की समस्याएं अब असहनीय हो चुकी हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के व्यक्ति ने इस मोर्चे में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सरकार की नीतियों के प्रति अपना तीखा गुस्सा जाहिर किया।
विजय वडेट्टीवार का तीखा हमला: 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' के नारे पर सवाल
मोर्चे को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने सत्ताधारी दल पर बेहद तीखे और कड़े प्रहार किए। उन्होंने सरकार के पुराने नारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' का दावा करने वालों के राज में ही देश की संपत्ति को लूटा जा रहा है और आम आदमी का जीवन नर्क बन गया है।
वडेट्टीवार ने अपने संबोधन में कहा, "आज देश और राज्य का हर वर्ग आर्थिक संकट के गहरे दौर से गुजर रहा है। चुनाव से पहले बड़े-बड़े सपने और लुभावने आश्वासन देने वाले लोग सत्ता में आने के बाद जनता की सुध लेना भूल गए हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी की जेब पर रोज डाका डाल रहे हैं, रसोई गैस सिलेंडर गरीब की पहुंच से बाहर हो चुका है, और बेरोजगार युवा दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। किसान, मजदूर, महिलाएं और छोटे व्यापारी—सबकी कमर टूट चुकी है।"
खेती की बढ़ती लागत और किसानों की बेबसी
केवल शहरी इलाकों की समस्याएं ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के दर्द को भी इस मोर्चे के दौरान प्रमुखता से उठाया गया। विधायक वडेट्टीवार ने रासायनिक खादों की बेतहाशा बढ़ती कीमतों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खेती की रीढ़ कहे जाने वाले यूरिया और अन्य रासायनिक खाद अब इतने महंगे हो गए हैं कि किसानों के लिए फसल उगाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि उपकरणों के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। लागत और मुनाफे का यह बिगड़ता गणित किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है। इसके साथ ही, चीनी और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे ने हर घर के रसोई बजट को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।
स्थानीय नेतृत्व और भारी जनसमर्थन
इस जनआक्रोश मोर्चे को सफल बनाने में स्थानीय कांग्रेस संगठन और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता दिनेश चिटरनुरवार, तालुका अध्यक्ष नितीन गोहणे, शहराध्यक्ष कृष्णा राऊत, महिला कांग्रेस अध्यक्ष उषाताई भोयर, शहराध्यक्ष भारती चौधरी, नगराध्यक्ष साधना वाढई, लता लाकडे, विजय कोरेवार, राकेश गड्डमवार, कृषि उत्पन्न बाजार समिति (कृउबा) के सभापति राजू ठाकरे, किशोर कारडे, बडू बोरकुटे, नरेश सुरमवार, विलास यासलवार और निखिल सुरमवार समेत बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेता, नगर पंचायत के पदाधिकारी, पार्षद और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मोर्चे के अंत में कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया कि जब तक आम जनता को राहत नहीं मिलती और महंगाई पर लगाम नहीं लगाई जाती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी तरह लगातार जारी रहेगा। सावली की इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी अब सूबे की सियासत का सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।
