मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में गणेश उत्सव का समापन एक बेहद अनूठी और पर्यावरण के अनुकूल परंपरा के साथ हो रहा है। शहर में स्थापित होने वाली भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाओं के विधिवत और सम्मानजनक विसर्जन के लिए इस बार भी जिला प्रशासन और नगर निगम ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान के संयुक्त प्रयासों से चलित विसर्जन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का सम्मान करती है, बल्कि जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने का एक प्रभावी संदेश भी देती है।
कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त ने की विधिवत पूजा-अर्चना
शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान और नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उनके साथ वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान के प्रमुख भूपेंद्र जैन, अपर आयुक्त मुनीष सिकरवार, प्रदीप तोमर समेत कई विभागीय अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर रुचिका चौहान और नगर निगम आयुक्त चौधरी ने चलित वाहन में स्थापित गंगाजल युक्त टंकियों के पास विधिवत अनुष्ठान किया और कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन कर इन वाहनों को सागरताल पर बनाए गए अस्थायी जलाशयों की ओर रवाना किया। प्रशासन की इस सक्रियता से शहरवासियों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
क्या है चलित वाहन विसर्जन की यह पूरी व्यवस्था?
अक्सर गणेश विसर्जन के दौरान बड़े जलाशयों, नदियों और झीलों में प्रदूषण की समस्या सामने आती है। इसे रोकने के लिए ग्वालियर में पिछले कई वर्षों से एक बेहतरीन परंपरा चली आ रही है। इस व्यवस्था के तहत विशेष रूप से तैयार किए गए चलित वाहनों में पानी की बड़ी टंकियां स्थापित की जाती हैं, जिनमें शुद्ध गंगाजल मिला होता है।
इस वर्ष प्रशासन और संस्थाओं के सहयोग से कुल 25 चलित वाहन शहर के विभिन्न इलाकों में संचालित किए जा रहे हैं। इन वाहनों के माध्यम से घर-घर और मोहल्लों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं को ससम्मान इन टंकियों में विसर्जित किया जाता है, जिससे पारंपरिक जलाशयों पर दबाव भी कम होता है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता।
प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का तालमेल
ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस अवसर पर मीडिया और जनता से बातचीत करते हुए कहा कि शहरवासियों की धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए यह व्यवस्था बेहद कारगर साबित हो रही है। उन्होंने कहा, 'ग्वालियर के नागरिकों ने इस गणेश उत्सव के दौरान भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और प्रशासन इसमें हरसंभव सहयोग कर रहा है।'
वहीं, नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने बताया कि नगर निगम की ओर से सामाजिक संस्थाओं और विशेषकर वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान को वाहन, ड्राइवर और अन्य सभी आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। निगम का पूरा अमला इस पुनीत और धार्मिक कार्य में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पर्यावरण संरक्षण और आस्था का अनूठा संगम
आज के दौर में जहां बड़े पैमाने पर जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, ऐसे में ग्वालियर प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल पेश करती है। बिना प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित किए, श्रद्धा के साथ पर्व का समापन करना यह साबित करता है कि आधुनिकता के साथ परंपराओं का निर्वहन किस प्रकार जिम्मेदारी के साथ किया जा सकता है।
सागरताल पर बनाए गए अस्थायी जलाशयों और इन चलित वाहनों की वजह से इस बार का गणेश विसर्जन शहर में पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संपन्न हो रहा है। प्रशासन की इस त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई की सराहना शहर के बुद्धिजीवी वर्ग और श्रद्धालुओं द्वारा भी की जा रही है।