सुहागिन महिलाओं के लिए साल के सबसे बड़े व्रतों में शुमार हरतालिका तीज का पर्व आज यानी 14 सितंबर 2026 को पूरे देश में बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के रहकर अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करती हैं।
व्रत के नियमों के अनुसार, इस दिन सुबह के समय स्नान-ध्यान के बाद प्रदोष काल या सुबह के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने का विशेष विधान है। हालांकि, आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी, घर की व्यस्तताओं या किसी अन्य अपरिहार्य कारणों के चलते कई बार महिलाएं सुबह के निर्धारित मुहूर्त में पूजा संपन्न नहीं कर पाती हैं। ऐसे में मन में यह घबराहट होना स्वाभाविक है कि कहीं उनका व्रत अधूरा तो नहीं रह गया या पूजा खंडित तो नहीं हो गई।
क्या सुबह की पूजा छूटने पर व्रत हो जाता है खंडित?
धर्म और ज्योतिष के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि अगर किसी कारणवश आप हरतालिका तीज की सुबह पूजा नहीं कर पाई हैं, तो आपको बिल्कुल भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। सनातन संस्कृति में हर परिस्थिति के लिए विकल्प और विशेष समय निर्धारित किए गए हैं। व्रत की मुख्य आत्मा आपकी सच्ची निष्ठा और अटूट आस्था है। यदि सुबह का समय निकल चुका है, तो आप दिन के अन्य शुभ मुहूर्तों या विशेष तौर पर शाम के प्रदोष काल में पूरी श्रद्धा के साथ पूजा कर सकती हैं। आपका व्रत पूरी तरह मान्य होगा।
शाम की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन प्रदोष काल (शाम का समय) भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। सूर्यास्त के बाद का समय पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ होता है।
- प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 06:33 बजे से रात 08:51 बजे तक
- वृषभ लग्न (विशेष पूजा समय): शाम 07:05 बजे से रात 08:55 बजे तक (यह समय महापूजा और अखंड सौभाग्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है)
यदि आप सुबह का शुभ समय गवां चुकी हैं, तो शाम को इन मुहूर्तों में से किसी एक समय का चयन करके अपनी पूजा को पूर्ण कर सकती हैं। कोशिश करें कि सूर्यास्त के तुरंत बाद प्रदोष काल शुरू होते ही पूजा की सभी तैयारियां पूरी कर लें।
शाम के समय इस प्रकार करें पूजा की पूरी तैयारी
अगर आपने सुबह पूजा नहीं की है, तो शाम के समय पूरी तन्मयता के साथ इन चरणों का पालन करते हुए पूजा संपन्न करें:
1. वेदी और मंडप सजावट
शाम की पूजा से पहले स्नान करके साफ और नए वस्त्र (विशेषकर लाल या पीले रंग के) धारण करें। पूजा स्थल या मंदिर को अच्छी तरह साफ करें। केले के पत्तों और फूलों से एक सुंदर मंडप तैयार करें। यदि आपने सुबह बालू (रेत) या काली मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा नहीं बनाई है, तो शाम के समय शुभ मुहूर्त में तुरंत प्रतिमा का निर्माण कर लें।
2. षोडशोपचार पूजा सामग्री
भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद उन्हें रोली, अक्षत, चंदन, सुहाग की पिटारी (जिसमें सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, महावर, आलता, कंघी आदि हो), नए वस्त्र, जनेऊ, बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, भांग, गंध, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
3. माता पार्वती को अर्पित करें सुहाग सामग्री
इस व्रत में माता पार्वती को सुहाग का सामान अर्पित करने का विशेष महत्व है। श्रृंगार की सामग्री अर्पित करते समय मन ही मन अपने सुहाग की लंबी उम्र और रक्षा की कामना करें। पूजा के बाद इस सुहाग सामग्री को किसी सुहागन महिला को दान कर सकते हैं या मंदिर में पंडित जी को दे सकते हैं।
4. हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ
पूजा के दौरान हरतालिका तीज की पौराणिक कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें। बिना कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है और दांपत्य जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
5. आरती और रात्रि जागरण
कथा के बाद धूप, दीप और कपूर से शिव-पार्वती की आरती उतारें। भगवान को सात्विक भोग (विशेषकर मिष्ठान और मौसमी फल) अर्पित करें। इस व्रत में रातभर जागकर भजन-कीर्तन करने का विधान है, जिसे 'जागरण' कहा जाता है। सुहागिन महिलाएं रातभर जागकर भगवान का स्मरण करती हैं।
व्रत से जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां
हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन माना जाता है, इसलिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- यह एक निर्जला व्रत है, यानी इसमें अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में गर्भवती महिलाएं या बीमार महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर ही जल ग्रहण कर सकती हैं।
- व्रत के दौरान क्रोध न करें, मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- पूजा के अगले दिन यानी सूर्योदय के बाद स्नान-ध्यान करके ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) किया जाता है। पारण के समय सबसे पहले खीर या सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ होता है।
तो यदि आपकी सुबह की पूजा किसी वजह से छूट गई है, तो निराश होने के बजाय शाम के प्रदोष काल में पूरी श्रद्धा के साथ माता पार्वती और भोलेनाथ की आराधना करें। आपकी सच्ची भक्ति से भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करेंगे।