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हरितालिका तीज: मंगला गौरी मंदिर में उमड़ी सुहागिनों की भीड़, गूंजे जयकारे

हरितालिका तीज: मंगला गौरी मंदिर में उमड़ी सुहागिनों की भीड़, गूंजे जयकारे

सनातन संस्कृति में पर्वों और त्योहारों की एक लंबी श्रृंखला है, जो हमारे जीवन में उल्लास, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है। इन्हीं पावन पर्वों में 'हरितालिका तीज' का विशेष स्थान है, जो महिलाओं के लिए अटूट आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। आज यानी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देश भर में हरितालिका तीज का पावन पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी में अजब ही नजारा देखने को मिला। काशी के प्रसिद्ध पंचगंगा घाट के समीप स्थित मां मंगला गौरी के दिव्य मंदिर में सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का तांता लगा रहा।

भोर की पहली किरण के साथ ही काशी की गलियां और घाट 'हर हर महादेव' और 'मां मंगला गौरी की जय' के उद्घोष से गूंज उठे। हाथों में पूजा की सजी हुई थालियां, सोलह श्रृंगार से सजी सुहागिन महिलाएं और चेहरे पर अटूट विश्वास—यह दृश्य किसी का भी मन मोह लेने के लिए काफी था। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही थीं कि भारतीय संस्कृति में आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं।

पंचगंगा क्षेत्र में गूंजे मां के जयकारे, अलौकिक दिखा नजारा

वाराणसी के पंचगंगा घाट के पास स्थित मां मंगला गौरी का मंदिर अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। हर साल हरितालिका तीज के मौके पर इस क्षेत्र की रौनक देखने लायक होती है। आज भी सुबह से ही मंदिर के आसपास का पूरा इलाका श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। महिलाओं ने अनुशासन का परिचय देते हुए कतारबद्ध होकर मां के दर्शन किए।

पर्व की महत्ता को देखते हुए मंदिर समिति और पुजारियों द्वारा विशेष तैयारियां की गई थीं। भोर में ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां मंगला गौरी का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद विधि-विधान से पूजन और मंगला आरती संपन्न हुई, जिसके बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मां के इस अलौकिक रूप के दर्शन मात्र से ही भक्तों के चेहरे खिल उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का वरदान

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मां मंगला गौरी के दरबार में जो भी सुहागिन सच्ची श्रद्धा के साथ आती है, उसे अखंड सौभाग्य, आरोग्यता और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी अटूट विश्वास के तहत वाराणसी के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचीं।

  • विशेष श्रृंगार: तीज के पावन अवसर पर मां मंगला गौरी को भव्य वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया।
  • पूजन सामग्री: महिलाओं ने मां को लाल चुनरी, सिंदूर, सुहाग की सामग्री और ताजे फूल अर्पित किए।
  • पारिवारिक मंगलकामना: मां से अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

मां मंगला गौरी सेवक परिवार के सदस्य दीपक कुमार पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि, 'तीज पर्व को लेकर इस बार भक्तों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से अटा पड़ा है। हर कोई मां के चरणों में अपनी हाजिरी लगाकर परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद मांग रहा है।'

पौराणिक कथा और कठोर तपस्या की परंपरा

हरितालिका तीज का व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह उस महान प्रेम और तपस्या का स्मरण है जो माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने बालू से शिवलिंग बनाकर वनों में कठोर तपस्या की थी, ताकि उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हो सकें। उनकी इस निष्ठा और कठोर तप से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अटूट रिश्ते की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे और योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत विधि-विधान से संपन्न करती हैं। इस दिन अन्न और जल का त्याग कर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना की जाती है।

काशी की संस्कृति और उत्सवधर्मिता

काशी यानी वाराणसी हमेशा से अपनी सांस्कृतिक धरोहर और पर्वों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जब भी यहां कोई तीज-त्योहार आता है, तो पूरी नगरी उत्सव के रंग में रंग जाती है। पंचगंगा घाट पर उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता की दौड़ के बावजूद आज भी हमारी प्राचीन परंपराएं और धार्मिक मूल्य पूरी तरह सुरक्षित और जीवंत हैं।

मंदिर में दर्शन के लिए आई महिलाओं ने बताया कि साल भर वे इस दिन का इंतजार करती हैं। मां मंगला गौरी के दरबार में आकर जो मानसिक शांति और ऊर्जा मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। दिन ढलने के साथ ही मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाने का सिलसिला भी शुरू हो गया, जिससे पूरा पंचगंगा क्षेत्र भक्ति की त्रिवेणी में गोता लगाता नजर आया।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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